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नगर निकायों में बेहतर साफ सफ़ाई के लिए जल्द प्रभावी होगा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026

गुरुवार को नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा की अध्यक्षता में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के  नए नियमों के विभिन्न प्रावधानों, उनकी व्यवहारिक उपयोगिता तथा नगर निगम स्तर पर किए जाने वाले आवश्यक कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन नगर निगम सेवा भवन सभागार में हुआ। 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, विभिन्न नगर पालिकाओं और नगर पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों को  नगर निगम द्वारा आधुनिक तकनीकी की मदद से डोर टू डोर कचरा एकत्रीकरण, कचरा गाड़ियों की ट्रैकिंग जीपीएस मोनिटरिंग व कमांड सेंटर से गाड़ियो की निगरानी की व्यवस्था से रूबरू कराया।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026

इस नियम के नगर निकायों में प्रभावी होने से नगर निकायों में कचरा निस्तारण व्यवस्था प्रभावी बनेगी साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर आयुक्त जिलाधिकारी को नियमानुसार अपने प्रतिष्ठान का सॉलिड बेस मैनेजमेंट वैज्ञानिक तरीके से न करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर्स के विरुद्ध कार्यवाई करने का अधिकार मिलेगा।

इस नए नियम के तहत 20 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल उपभोग अथवा 100 किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले संस्थानों को बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे सभी संस्थानों के लिए अपने परिसर में ही जैविक कचरे का प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा।

इस नए नियमों के तहत अब प्रत्येक नागरिक, संस्थान एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान को कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण करना अनिवार्य होगा। इसमें गीला अपशिष्ट, सूखा अपशिष्ट, सैनिटरी अपशिष्ट तथा घरेलू खतरनाक अपशिष्ट शामिल हैं। गीले कचरे का निस्तारण कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मीथनेशन के माध्यम से तथा सूखे कचरे को अधिकृत मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) तक पहुंचाना आवश्यक होगा।

अवहेलना व सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का नियम अनुसार निस्तारण नया करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर्स के विरुद्ध प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को Polluter pay rule Environmental compensation act के तहत कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इसके साथ साथ नगर आयुक्त व जिलाधिकारी को ऐसे लोगो द्वारा इस्तेमाल की जा रही जनसुविधाओं जैसे पानी, लाइट, स्वच्छता आदि को बंद करने का बड़ा अधिकार दिया गया है।

बैठक में पुराने कूड़ा स्थलों के वैज्ञानिक निस्तारण, बायोमाइनिंग एवं बायो-रिमेडिएशन कार्यों को गति देने, कचरा प्रबंधन से संबंधित समस्त गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर नियमित डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए गए। साथ ही कचरे से तैयार होने वाले रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) के उपयोग को बढ़ावा देने तथा पुनर्चक्रण आधारित सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को अपनाने पर भी जोर दिया गया।

प्रशिक्षण बैठक में नगर आयुक्त ने सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायत को निर्देश देते हुए कहा अपने अपने क्षेत्र में बेहतर सफाई व्यवस्था को प्रभावी रूप दिए जाने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 कल लागू किया जाना वर्तमान परिस्थितियों में बेहद आवश्यक है स्वच्छता के प्रति लोगों के व्यवहार परिवर्तन के लिए यह नियम बेहद महत्वपूर्ण है। इस नियम के प्रभावी होने से निश्चित रूप से नगर निगम के साथ-साथ नगर पालिकाओं और नगर पंचायत में सफाई की बेहतर स्थिति देखने को मिलेगी साथ ही साथ स्वच्छता से खिलवाड़ करने वालों पर आर्थिक दंड के प्रावधान से भी कही न कही लोगों की स्वच्छता के प्रति व्यवहार में परिवर्तन आएगा।

बैठक में नगर आयुक्त ने कहा बड़े अपशिष्ट उत्पादकों (Bulk Waste Generators) के लिए निर्धारित मानकों की भी समीक्षा की गई। निर्धारित सीमा से अधिक क्षेत्रफल, जल उपभोग अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को अपने परिसर में ही जैविक कचरे का प्रसंस्करण सुनिश्चित करना होगा। इसके अतिरिक्त लैंडफिल में केवल अवशिष्ट एवं अनुपयोगी कचरा ही भेजा जा सकेगा तथा मिश्रित कचरे के निस्तारण पर रोक रहेगी।

नगर आयुक्त ने बैठक में पुराने कूड़ा स्थलों के वैज्ञानिक निस्तारण, बायोमाइनिंग एवं बायो-रिमेडिएशन कार्यों को गति देने, कचरा प्रबंधन से संबंधित समस्त गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर नियमित डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए गए। साथ ही कचरे से तैयार होने वाले रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) के उपयोग को बढ़ावा देने तथा पुनर्चक्रण आधारित सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को अपनाने पर भी जोर दिया गया।

एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यशाला में नगर निगम सहित नगर पालिकाओं और नगर पंचायत में बल्क वेस्ट जनरेटर्स के कारण खराब हो रही सफ़ाई व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया सभी नगर पालिकाएं और नगर पंचायत अगले 10 दिनों में अपने-अपने क्षेत्र की सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स जैसे हवाई, मैरिज होम,होटल रेस्टोरेंट, गोदाम, विवाह स्थल, स्कूल कालेज, हॉस्पिटल का विवरण तैयार करके क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराये। ताकि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उक्त नियम के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर्स के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कर सके।

नगर आयुक्त ने एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायत के आए अधिशासी अधिकारियों और कर्मचारियों को 45 दिन की समयसीमा देते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को नियमानुसार अपने बोर्ड के समक्ष रखकर इसे प्रभावी रूप से लागू कराए जाने के लिए कहा। 

नगर आयुक्त ने बताया कि नए नियमों के तहत अब प्रत्येक नागरिक, संस्थान एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान के लिए कचरे का चार श्रेणियों गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा तथा घरेलू खतरनाक कचरामें पृथक्करण अनिवार्य किया गया है। गीले कचरे के स्थानीय स्तर पर निस्तारण, सूखे कचरे के पुनर्चक्रण तथा विशेष श्रेणी के कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष बल दिया गया।

नगर आयुक्त ने कहा नगर निकायों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 बेहद उपयोगी है इस नियम को प्रभावी रूप से अगले 45 दिनों में ड्राफ्ट तैयार करके माननीय बोर्ड के समक्ष स्वीकृति हेतु रखा जाएगा तत्पश्चात प्रभावी रूप से इसको लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा निश्चित रूप से इस नए नियम के लागू होने से नगर निकायों में सफाई व्यवस्था बेहतर होगी साथ ही साथ नगर निकाय की सफाई व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने में भी नगर निकाय सशक्त बनेंगे।

कार्यशाला में सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी रामानंद त्यागी, नोशी अनीस, रामजीलाल अहसान सैफी पंचायतीराज विभाग से राकेश सिंह, जेड.एस.ओ. नगर निगम इगलास से रामचन्द्र कश्यप, एसएफआई-एनएनए से पोंगेन्द्र कुमार, एसपीआई-एनएनए से विजय सिंह, कार्यालय अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत चण्डौस से मिथिलेश कुमार शर्मा, ईओ नगर पंचायत इगलास/लोधा से बृजेन्द्र चौधरी, ईओ नगर पंचायत गभाना, चण्डौस एवं खैर से रेनू यादव, आरओ टप्पल से भानु प्रताप, ईओ नगर पंचायत जलाली से विवेक कुमार गौड़, एसएफआई एनपीपी टप्पल से अजीत पाल सिंह आदि उपस्थित रहे।

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