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भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भारत की राष्ट्रपति से मुलाकात की


समाज को वनों की सुरक्षा के कार्य में भागीदार बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी एवं दीर्घस्‍थायी बनेंगे: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज, 17 जुलाई 2026  को राष्ट्रपति भवन सांस्‍कृतिक केन्‍द्र में भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे केवल वनों के प्रशासक नहीं हैं, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षक भी हैं। आज उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। सम्‍पूर्ण विश्‍व जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ह्रास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का निराकरण करने में वन महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह, भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का योगदान केवल भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके योगदान से सतत विकास के वैश्विक प्रयासों को भी बल मिलेगा। उन्होंने युवा अधिकारियों को वन क्षेत्र का विस्‍तार करने पर ध्यान देने की सलाह दी, क्योंकि वन ही पृथ्‍वी पर जीवन के आधार हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि वनों एवं उनके आसपास रहने वाले लोगों की वैध आकांक्षाओं के साथ संतुलन बनाते हुए पारिस्थितिक संरक्षण को आगे बढ़ाना चाहिए। विकास और संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्‍यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से आग्रह किया कि वे ऐसे समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य करें, जिनसे प्रकृति और स्थानीय समुदाय दोनों एक साथ फल-फूल सकें। उन्होंने संरक्षण, वन-पुनर्स्थापन तथा सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों, वनवासियों, महिलाओं, किसानों तथा स्थानीय संस्थाओं के विचारों और चिंताओं को समझने से अधिकारियों को बहुमूल्य दृष्टिकोण प्राप्त होगा। समाज को वनों की सुरक्षा के कार्य में भागीदार बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी एवं दीर्घस्‍थायी बनेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवा का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए पारिस्थितिक सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्‍होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के रूप में युवा अधिकारी यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि भारत की विकास यात्रा हरित, समावेशी और सतत बनी रहे।

भारतीय वन सेवा के दो बैच के प्रशिक्षु अधिकारी वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में अपनी प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रहे हैं। वर्ष 2024 बैच में 111 प्रशिक्षु अधिकारी हैं, जबकि वर्ष 2025 बैच में 131 प्रशिक्षु अधिकारी हैं; दोनों ही बैच में भूटान के दो-दो प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें

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