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बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित

बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक 17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में दस केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सात राज्यों के आधिकारिक सदस्यों, दो बांध सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ-साथ सभी राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों और अन्य विशेष आमंत्रित सदस्यों ने भाग लिया।

उद्घाटन भाषण में, एनसीडीएस के अध्यक्ष ने नियमों की अधिसूचना, तकनीकी दिशानिर्देश जारी करने और बांध सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ तैयार करने के ज़रिए बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 को लागू करने में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने आपातकालीन कार्य योजनाओं, बांध सुरक्षा के व्यापक मूल्यांकन, ए एंड एम मैनुअल और जोखिम मूल्यांकन अध्ययन जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों में तेज़ी लाने की ज़रुरत पर ज़ोर दिया। अध्यक्ष ने जलाशय में गाद जमा होने और बांध की निगरानी व सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का समाधान करने, राज्य बांध सुरक्षा संगठनों को मज़बूत करने और एजेंडा के मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा के माध्यम से अधिनियम को समय पर लागू करने पर भी ज़ोर दिया।

इस मामले पर विस्तार से चर्चा हुई और समिति ने आखिर में कुछ अहम कामों पर सहमति जताई। इनमें शामिल हैं: जल संबंधित ढ़ांचे के सामने नए तरह के खतरों के मद्देनज़र खास बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए नियम बनाना, खास बांधों की सुरक्षा जांच चेकलिस्ट से जुड़े नियमों में बदलाव, बांधों के निर्माण या उनमें बदलाव से जुड़े कानून के तहत विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए दिशानिर्देशों में बांध सुरक्षा चैप्टर को अंतिम रूप देना, जांच, डिज़ाइन, निर्माण और क्वालिटी कंट्रोल का काम करने वाली एजेंसियों को मान्यता देना, बांध टूटने की घटना पर रिपोर्ट तैयार करने के ढांचे को अंतिम रूप देना और विशेषज्ञों का पैनल बनाना, बांधों के लिए खतरों के वर्गीकरण, जोखिम के आकलन, खास बांधों और उनके कैचमेंट एरिया में उपकरणों, इमरजेंसी एक्शन प्लान, ऑपरेशन और मेंटेनेंस मैनुअल, जिसमें जलाशय के लिए रूल कर्व को अंतिम रूप देना भी शामिल है, के आधार पर तकनीकी दशानिर्देश तैयार करना और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की इस पहल को लंबे समय तक जारी रखने के लिए, आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा बांध सुरक्षा पर चलाए जा रहे पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम के लिए बांध मालिकों द्वारा काम कर रहे इंजीनियरों को नियमित रूप से नामांकित करना। बांध मालिकों की क्षमता बढ़ाने के लिए एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग जैसे क्षेत्रीय संस्थानों को शामिल करने की संभावना तलाशने का भी फैसला किया गया। समिति ने बांध मालिकों से यह भी कहा कि वे खास तौर पर कस्टमाइज़्ड ट्रेनिंग और बांध सुरक्षा से जुड़ी सपोर्ट सर्विस के लिए तकनीकी और अकादमिक संस्थानों के साथ स्वतंत्र सहयोग की संभावना तलाशें। समिति ने इस बात पर भी विचार विमर्श किया कि क्या जलाशय में गाद जमा होने की चुनौती से निपटने के लिए कोई नया नियम लाने की ज़रूरत है।

संबंधित बांध मालिकों ने समिति के सामने हाल ही में हुई बांधों की विफलता के बारे में विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतिकरण भी दिए। इनमें छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग द्वारा लुटी टैंक और राजाडेरा बांध की विफलता, सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड द्वारा तीस्ता स्टेज-III बांध की विफलता, पंजाब जल संसाधन विभाग द्वारा माधोपुर बैराज की विफलता और राजस्थान जल ग्रिड कॉर्पोरेशन द्वारा बीसलपुर बांध पर चल रही जलाशय ड्रेजिंग गतिविधियां शामिल हैं।

बैठक के आखिर में, अध्यक्ष ने सभी राज्यों से कहा कि वे तय कानूनी समय-सीमा (यानी दिसंबर 2026 तक) के भीतर ज़रूरी कामों में तेज़ी लाएं। इनमें खास तौर पर हर तय बांध की व्यापक सुरक्षा जांच, आपातकालीन कार्य योजना तैयार करना और जोखिम का आकलन करने वाला अध्ययन भी शामिल हैं।

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