बिलासपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” ने की सहभागिता
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के दसवें प्रांतीय सम्मेलन का द्विदिवसीय आयोजन बेमेतरा में हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन दुर्ग सांसद विजय बघेल, विधायक दीपेश साहू एवं पूर्व विधायक अवधेश चंदेल ने किया। आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने बताया कि छत्तीसगढ़ी को राजकाज की भाषा के रूप में स्थापित करने, आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयासों, साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन को प्रोत्साहित करने तथा साहित्य सेवियों के सम्मान एवं स्मरण के उद्देश्य से सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर बिलासपुर के साहित्यकार सुरेश सिंह बैस शाश्वत ने अपनी कृति व काव्यपाठ कर अपनी सहभागिता की।

सम्मेलन में विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे, डॉ. विवेक तिवारी एवं सोमप्रभा तिवारी ने किया। वक्ता के रूप में डॉ. विनोद कुमार वर्मा, डॉ. ईशाबेला लकड़ा, डॉ. अंकुर शुक्ला एवं शरद यादव ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। सम्मेलन के दौरान सात सत्रों में विभिन्न साहित्यिक एवं भाषायी विषयों पर संगोष्ठियां आयोजित की गईं। सम्मेलन के अवसर पर आयोजित प्रांतीय कवि सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कवि-कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया। बिलासपुर की ओर से डॉ. राघवेन्द्र कुमार दुबे, डॉ. अंकुर शुक्ला, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी, शीतल प्रसाद पाटनवार, डॉ. दीनदयाल यादव ‘नीलेश’, अजय शर्मा, सुरेश सिंह बैस , डॉ. विनोद कुमार वर्मा, डॉ. सुनीता मिश्रा, पूर्णिमा तिवारी, सोमप्रभा तिवारी, शरद यादव, बालमुकुन्द श्रीवास, गजानन पात्रे, सेवकराम साहू एवं डॉ. विवेक तिवारी ने काव्य पाठ कर अपनी प्रभावी सहभागिता दर्ज कराई। सम्मेलन में बिलासपुर जिला समन्वयक डॉ. विवेक तिवारी के नेतृत्व में जिले के 30 साहित्यकारों ने सहभागिता की।सम्मेलन के अंत में सभी साहित्यकारों को आयोग द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के इस प्रांतीय सम्मेलन में बिलासपुर के साहित्यकारों की व्यापक एवं सक्रिय भागीदारी ने छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति जिले की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। एवीके न्यूज सर्विस