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एससीओ की 25वीं बैठक में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर कड़ा रुख, पूरे तंत्र के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई पर जोर

दुशान्बे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए एकजुट होकर ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल निर्दोष लोगों की जान लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश और सामाजिक स्थिरता को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी या दोहरे मापदंड की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

रक्षा मंत्री मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति विकसित करने के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, परिवहन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई जरूरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद शांति और विकास के सामने मौजूद सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। इसके कारण निर्दोष नागरिकों की जान जाती है, निवेश का माहौल प्रभावित होता है और व्यापारिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचता है। आतंकवाद समाज में कट्टरता को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों से भी दूर करता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे निपटने के लिए सभी देशों को समान दृष्टिकोण अपनाना होगा। आतंकवादियों को वित्तीय सहायता देने, उन्हें समर्थन प्रदान करने अथवा सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने वालों के प्रति भी सख्त रुख अपनाना जरूरी है।

रक्षा मंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी सदस्य देशों की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। भारत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल उसके प्रत्यक्ष कृत्यों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे सहायता देने वाले नेटवर्क और संसाधनों पर भी प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

आर्थिक सहयोग में पारस्परिक लाभ को प्राथमिकता

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने एससीओ के भीतर आर्थिक सहयोग को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने अगस्त-सितंबर 2026 में बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन की चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुरक्षा, संपर्क और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता रेखांकित की थी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एससीओ को संप्रभु समानता, आम सहमति और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। उनके अनुसार, केवल नए संस्थानों और व्यवस्थाओं की स्थापना से प्रगति सुनिश्चित नहीं होती। ऐसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए, उन्हें मौजूदा कार्यों की पुनरावृत्ति से बचना चाहिए और सदस्य देशों को वास्तविक लाभ पहुंचाना चाहिए।

उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार में बाधाओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान तथा ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान दिलाया। तकनीकी विभाजन भी देशों के बीच आर्थिक सहयोग को प्रभावित कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ को साझा सहमति को ठोस कार्रवाई में बदलना होगा। इसके तहत आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश को आसान बनाने और विकास के लिए प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल करने की जरूरत है। उन्होंने वर्ष 2026 से 2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना अपनाने के प्रति भारत का समर्थन भी दोहराया।

मध्य एशिया से संपर्क बढ़ाने पर जोर

राजनाथ सिंह ने क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को साझा समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो बाजारों को आपस में जोड़ें, व्यापार की लागत कम करें और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा करें।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मध्य एशिया को बड़े बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बेहतर परिवहन और व्यापारिक संपर्क से क्षेत्रीय कारोबार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संपर्क परियोजनाओं का विकास संबंधित देशों के साथ परामर्श, उनकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के आधार पर होना चाहिए। इन सिद्धांतों की अनदेखी करने वाली परियोजनाएं दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं हो सकतीं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए केवल सड़क, रेल और बंदरगाह जैसी भौतिक सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में सुधार करना और विभिन्न देशों की डिजिटल प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी जरूरी है। इन उपायों से सीमा पार व्यापार में लगने वाला समय और लागत कम की जा सकती है।

उन्होंने इस महीने की शुरुआत में मुंबई में आयोजित मध्य एशिया में अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण से संबंधित संगोष्ठी में भाग लेने वाले मध्य एशियाई देशों और एससीओ के साझेदारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पहली बार आयोजित एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद का भी उल्लेख किया।

नई तकनीक और नवाचार से विकास को गति

रक्षा मंत्री ने कहा कि एससीओ की सफलता का आकलन केवल बैठकों और समझौतों की संख्या से नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में आने वाले बदलावों से किया जाना चाहिए। युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर, किसानों तथा छोटे कारोबारियों के लिए उपयोगी तकनीक और समाजों के बीच मजबूत संबंध आर्थिक सहयोग की वास्तविक उपलब्धियां हैं।

भारत के विकास अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार आर्थिक प्रगति को गति देने तथा सार्वजनिक समस्याओं का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल का जिक्र किया, जिसने सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में योगदान दिया है। साथ ही, भारत के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और महिला-नेतृत्व वाले विकास पर जोर को भी रेखांकित किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी विकास प्रक्रिया को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए, ताकि विकास के अवसर कुछ क्षेत्रों या समूहों तक सीमित न रहें।

स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने भारत की उन वैश्विक पहलों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटना है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी पहलें किफायती स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास को प्रोत्साहित करती हैं। मिशन लाइफ के माध्यम से टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों के विस्तार में योगदान दे रहा है।

उन्होंने एससीओ के सदस्य देशों से इन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास को साझा प्राथमिकता बनाने का आग्रह किया।

एससीओ के नए केंद्रों की प्रभावशीलता पर ध्यान

राजनाथ सिंह ने बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में लिए गए उन निर्णयों का स्वागत किया, जिनके तहत ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशान्बे में मादक पदार्थ-रोधी केंद्र को संगठन के स्थायी निकायों के रूप में स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इन केंद्रों की वास्तविक उपयोगिता उनके समन्वय, कार्यकुशलता और समयबद्ध निष्पादन पर निर्भर करेगी। संस्थागत व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने के लिए यह जरूरी है कि वे निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप काम करें और सदस्य देशों की साझा चुनौतियों के समाधान में योगदान दें।

एससीओ के भविष्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता

रक्षा मंत्री ने एससीओ से पिछले 25 वर्षों में स्थापित सहयोग की नींव को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठन को आम सहमति पर आधारित सहयोग और ठोस परिणामों पर केंद्रित भविष्योन्मुखी रूपरेखा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने वर्ष के अंत में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच में भाग लेने के लिए सदस्य देशों को आमंत्रित किया। इस पहल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सभ्यतागत संवाद और आपसी समझ को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करना है।

बैठक में सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

बैठक के अंत में प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक की संयुक्त घोषणा को अपनाया। इसमें वर्ष 2027 के लिए संगठन के बजट, संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों और वर्ष 2026 से 2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को शामिल किया गया। एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद संगठन का एक प्रमुख तंत्र है, जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत वर्ष 2017 से संगठन का पूर्ण सदस्य है और इसके विभिन्न तंत्रों में सक्रिय भागीदारी करता रहा है।

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