सोचले रहनी एह बार हम गांवे जाइबधूमधाम से सबके साथे छठ मनाइब। बाकी टूट गइल देखल…
Category: कविता
शाबाशियाँ ( स्त्री विमर्श )
बालियाँ तेरे हर किरदार को, शाबाशियाँ तेरे अस्तित्व को, शाबाशियाँ बेटी, बहन,बहू,पत्नी, माँ और सुगढ़ ग्रहणी…
क्या जज्बात हैं उनके…
क्या जज्बात हैं उनके…जो दे रहे हैं ज्ञान, क्या हालात हैं उनके, जो बड़ा रहे हैं…
हिंसा को ना बनाओ यारों जीवन का हिस्सा।
हिंसा को ना बनाओ यारों जीवन का हिस्सा। वर्ना बिखर जाओगे जैसे टूट कर शीशा। हिंसा…
मान हुआ नारी का जग में देखो तार- तार है…
मान हुआ नारी का जग में देखो तार- तार है। कोखों ने था जन्म दिया लो…
तुम्हारा खत पढ़कर
अचानक ही वक्त की स्मृतियों से निकलकर, तुम्हारे वो खत तुम्हें मुझ तक पहुंचा गए। मानों…