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खुशी बांटते सुरभित उपवन

मन में जब उजियारा भरता। सघन तमस भी हारा करता। नेहिल निर्झर बहते झर-झर, कष्ट कलुष…

पिता और पेड़

द्वार पर खड़ा पेड़ दिखता है अकेला, प्रकृति की साख संजोए, पेड़ कभी अकेला नहीं होता…

पितृपक्ष

शीश झुकाकर नमन करें हम पूर्वजों की पावन आशीषों को जिन्होंने दिखलाया जीवन पथ मिटा के…

दुर्गा स्तुति

जगजननी मां तुझे नमन है, भवतारिणी मां तुझे नमन। ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है, भयहारिणी मां तुझे…

जागें जीवन गढ़ने वाले

कंटक पथ पर बढ़ने वाले। अंधकार से लड़ने वाले। द्वार खड़ा है प्रमुदित सूरज, जागें जीवन…

सतत चलें हम

नदी सिखाती सतत चलें हम, निर्झर-सा हो निर्मल जीवन। सुमन सुगंध सदा बिखराते, करें सुवासित उपवन…

प्रकृति और मानुष..

प्रकृति ने पंछी को पंख दिए, जल को लहर, गगन को विस्तार। सबने मर्यादा ओढ़ी अपनी,…

रक्षाबंधन

प्रीति की धरती, ममता का आकाश है रक्षाबंधन। भाई बहन के प्रेम से मिश्रित हास है…

हे ग्रीष्म! तुम्हें प्रणाम

हे तप्त सूर्य की स्वामिनी ! तुम हो ऊर्जा का अनन्य उद्गम। अपनी प्रखर ज्योति से…

वीरों का वंदन

चलो उठाएं आज कलम हम उन वीरों के वंदन में, जो सो जाते हैं अमर नींद…

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