मन में जब उजियारा भरता। सघन तमस भी हारा करता। नेहिल निर्झर बहते झर-झर, कष्ट कलुष…
Category: कविता
दुर्गा स्तुति
जगजननी मां तुझे नमन है, भवतारिणी मां तुझे नमन। ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है, भयहारिणी मां तुझे…
जागें जीवन गढ़ने वाले
कंटक पथ पर बढ़ने वाले। अंधकार से लड़ने वाले। द्वार खड़ा है प्रमुदित सूरज, जागें जीवन…
सतत चलें हम
नदी सिखाती सतत चलें हम, निर्झर-सा हो निर्मल जीवन। सुमन सुगंध सदा बिखराते, करें सुवासित उपवन…
हे ग्रीष्म! तुम्हें प्रणाम
हे तप्त सूर्य की स्वामिनी ! तुम हो ऊर्जा का अनन्य उद्गम। अपनी प्रखर ज्योति से…