जिनके उर में राम हैं, मन में बसे न काम। दृष्टि चित्त निर्मल हुए, सब जग…
Category: कविता
राम रमे हर श्वास में
राम जगत आधार हैं, राम सृष्टि के हेतु। राम सकल व्यवहार में, गगन फहरता केतु।। देह-गेह…
गुरु बिन होय न बोध
जो जन चाहें मुक्ति सुख, निज जीवन कल्यान। गुरुपद पंकज का करें, सदा हृदय में ध्यान।।…
बच्चे निर्मल मन सदा
बच्चे निर्मल मन सदा, बच्चे भगवत रूप। बच्चे सुख की छाँव हैं, मधुर मुलायम धूप।। माखन…