मान हुआ नारी का जग में देखो तार- तार है। कोखों ने था जन्म दिया लो…
Category: कविता
तुम्हारा खत पढ़कर
अचानक ही वक्त की स्मृतियों से निकलकर, तुम्हारे वो खत तुम्हें मुझ तक पहुंचा गए। मानों…
जीत ना सको बनाफर राय स्वाभिमान कभी नहीं छूटे चाहे तन से प्राण गवाएं।…
जीत ना सको बनाफर राय स्वाभिमान कभी नहीं छूटे चाहे तन से प्राण गवाएं ।। राणा…
पंखुड़ियाँ : सुगंध बिखेरती रचनाओं का सुखद संसार
कविता व्यक्ति को रचती है, एक दृष्टि देती है। एक रचनाकार अपने परिवेश से सोये कथ्य…
राम रमे हर श्वास में
राम जगत आधार हैं, राम सृष्टि के हेतु। राम सकल व्यवहार में, गगन फहरता केतु।। देह-गेह…
गुरु बिन होय न बोध
जो जन चाहें मुक्ति सुख, निज जीवन कल्यान। गुरुपद पंकज का करें, सदा हृदय में ध्यान।।…