वक्त की रफ्तार इतनी तेज है कि पता ही नहीं चलता कब आया और कब चला…
Category: कविता
जीत ना सको बनाफर राय स्वाभिमान कभी नहीं छूटे चाहे तन से प्राण गवाएं।…
जीत ना सको बनाफर राय स्वाभिमान कभी नहीं छूटे चाहे तन से प्राण गवाएं ।। राणा…
पंखुड़ियाँ : सुगंध बिखेरती रचनाओं का सुखद संसार
कविता व्यक्ति को रचती है, एक दृष्टि देती है। एक रचनाकार अपने परिवेश से सोये कथ्य…
राम रमे हर श्वास में
राम जगत आधार हैं, राम सृष्टि के हेतु। राम सकल व्यवहार में, गगन फहरता केतु।। देह-गेह…
गुरु बिन होय न बोध
जो जन चाहें मुक्ति सुख, निज जीवन कल्यान। गुरुपद पंकज का करें, सदा हृदय में ध्यान।।…
बच्चे निर्मल मन सदा
बच्चे निर्मल मन सदा, बच्चे भगवत रूप। बच्चे सुख की छाँव हैं, मधुर मुलायम धूप।। माखन…