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पंखुड़ियाँ : सुगंध बिखेरती रचनाओं का सुखद संसार

कविता व्यक्ति को रचती है, एक दृष्टि देती है। एक रचनाकार अपने परिवेश से सोये कथ्य…

राम सुखद शुभ नाम

जिनके उर में राम हैं, मन में बसे न काम। दृष्टि चित्त निर्मल हुए, सब जग…

राम रमे हर श्वास में

राम जगत आधार हैं, राम सृष्टि के हेतु। राम सकल व्यवहार में, गगन फहरता केतु।। देह-गेह…

गुरु बिन होय न बोध

जो जन चाहें मुक्ति सुख, निज जीवन कल्यान। गुरुपद पंकज का करें, सदा हृदय में ध्यान।।…

धरा करे सत्कार

धरती धीरज है धरे, धरती कानन भार। पर्वत घाटी सिंधु का, धरती है आधार।।

वक्त

यूं बदलना वक्त का जिंदगी के दरमियां बचपने के नन्हे पांव का झुर्रियों तक पहुंचना है…

बच्चे श्वेत कपास

कपट नहीं है हृदय में, नहीं किसी से बैर। बच्चे समता साधते, क्या अपने क्या गैर।।

बच्चे निर्मल मन सदा

बच्चे निर्मल मन सदा, बच्चे भगवत रूप। बच्चे सुख की छाँव हैं, मधुर मुलायम धूप।। माखन…

ऐ कवि सबकी कहते रहना।

ऐ कवि सबकी कहते रहना। नदियों की कलकल के संग बहते रहना। ऐ कवि सबकी कहते…

बच्चे कल हैं विश्व का

परिजन से नित सीखते, भाषा का व्यवहार। बच्चे रचने हैं लगे, शब्दों का संसार।।

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