प्यार कीजिए। अजी प्यार कीजिए। चाहे कोई आप सा हो या अलग, पराया। जान वार दीजिए।…
Category: कविता
एड़ी की बिवाय (कहानी किसान की)
दाल-भात खाते हो ले-ले के चाव। अरे ओ बाबू दिखे ना तुमको मेरी एड़ी की बिवाय।
दाल-भात खाते हो ले-ले के चाव। अरे ओ बाबू दिखे ना तुमको मेरी एड़ी की बिवाय।