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डाॅक्टर से सलाह लिए बिना ना लें स्वंय दवा

डाॅक्टर

सिर में दर्द महसूस हो रहा है, तो पेनकिलर ले लिया जाए। गैस की परेशानी दूर करने के लिए एसिडिटी की दवा, वो भी डॉक्टर की सलाह लिए बिना। देखा जाए तो इन दवाइयों से फौरन आराम तो मिल जाता है। लेकिन यह स्‍थायी इलाज नहीं होता है। साथ ही बिना पूछे दवाइयों का सेवन सेहत को नुकसान भी पहुंचाता है।  सिर दर्द हो या बदन दर्द, बस एक पेनकिलर… यह किसी दवा कंपनी के विज्ञापन का हिस्‍सा हो सकता है। पर असल जिंदगी में बिना सोचे इस तरह की दवाइयों का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं होती है। चाहे बात विटामिन्स की गोलियां लेने की हो या पेनकिलर और एंटी-बायोटिक दवाओं के इस्तेमाल की। हम बिना पूछें इन दवाइयों का सेवन आराम से करते रहते हैं। कभी केमिस्ट से पूछकर, तो कभी अपनों की सलाह पर। आजकल तो फूड सप्लीमेंट के तौर पर पिल्स का फैशन चल पड़ा है। जबकि आए दिन दवाइयों के साइड इफेक्ट्स की खबरें आती रहतीं हैं। इसके बावजूद लोगों में जागरूकता नहीं है। दूर-दराज के इलाकों में तो यह समस्या और भी गंभीर है। वहां लोग दुकानदार से पूछकर दवाइयां ले लेते हैं। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि हर किसी की बॉडी की जरूरत अलग होती है और शरीर में गोलियों के माध्यम से पहुंचने वाले तत्व संतुलित मात्रा में ही फायदा करते हैं। ऐसे में बिना जांच करवाए या डॉक्टर की राय लिए विटामिन्स या अन्य गोलियों का सेवन किसी और समस्या को भी जन्म दे सकता है। इसलिए जरूरी है कि कोई भी दवा लेने से पहले डाॅक्टर से अवश्य सलाह लें लेें, स्वंय डाक्टर बनने की कोशिश ना करें।

हो सकते है यह नुकसान

  • जरूरत से ज्यादा लेने पर पेनकिलर्स घातक हो सकती हैं। कहा जाता है कि एक साल तक पेनकिलर्स को रोज इस्तेमाल किया जाए, तो ये बेहद नुकसानदायक हो सकती हैं।
  • एक अनुमान के मुताबिक जिंदगी में एक हजार से ज्यादा पेनकिलर्स खाने से किडनी खराब हो सकती है। अगर आपको सौ साल जीना है, तो साल में 10 गोली से ज्यादा कभी न लें।
  • पेनकिलर्स लगातार लेते रहने से किडनी और लिवर में जहर बन सकता है। पेट में ब्लीडिंग भी हो सकती है।
  • उबकाई आना, सुस्ती, मुंह सूखना, अचानक ब्लड प्रेशर कम होना और कब्ज जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।

सावधानियां बरतें

  • जब तक हो सके, दर्द सहन कर लें। पेनकिलर का इस्तेमाल मजबूरी में ही करें।
  • पेनकिलर लेने की वजह से अगर पेट दर्द होता है, तो सबसे पहले उस पेनकिलर का इस्तेमाल बंद कर दें। एक एंटैसिड (डाइजीन, जिनटैक आदि) लें और डॉक्टर से सलाह लें।
  • कोई भी पेनकिलर बेस्ट नहीं है, सिर्फ किसी का असर कम साइड इफेक्ट के साथ ज्यादा हो सकता है।
  • दिल, बीपी, डायबीटीज और किडनी के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई पेनकिलर नहीं लेना चाहिए।
  • खाली पेट बिल्कुल न लें। कई तरह के पेनकिलर्स को खाली पेट लेने से किडनी, लिवर और पेट को नुकसान हो सकता है।
  • आम आदमी बिना डॉक्टर से पूछे सिर्फ एक पेनकिलर ले सकता है और वह है पैरासीटामोल।

पेनकिलर बिना पूछे ना लें

इब्यूप्रोफेन और ऐस्पिरिन जैसी दवाओं का भी साइड इफेक्ट होता है। ये दवाएं आंतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए दवा लेते समय डॉक्टर से इस पर जरूर बात करें। जहां तक हो सके अपनी मर्जी से इन दवाओं का इस्तेमाल न करें। जरूरत से ज्यादा पेनकिलर्स लेने से किडनी पर इसका बुरा असर होता है। पेट संबंधी समस्या भी हो सकती है। सुस्ती, मुंह सूखना, अचानक ब्लड प्रेशर कम होना और कब्ज जैसी शिकायतें भी पेनकिलर से हो सकती हैं। इसलिए पेनकिलर का इस्तेमाल सोच-समझकर ही करें। विशेषकर दिल, बीपी, डायबिटीज और किडनी के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई पेनकिलर नहीं लेना चाहिए। खाली पेट तो पेनकिलर बिल्कुल भी न लें। इससे किडनी, लिवर और पेट को नुकसान हो सकता है। अगर आपको पहले से कोई समस्या नहीं है, तो पैरासिटामॉल में क्रोसिन, कालपोल आदि गोलियां ली जा सकती हैं। अगर इससे फायदा न हो, तो निमेसुलाइड या वोवरान भी लिया जा सकता है। पर एक बार डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

एंटीबायोटिक

कॉमन कोल्ड हो या वायरल एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल खुद से न करें। इससे संक्रमण दूर हो या न हो, लेकिन डायरिया, एलर्जी जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इनके अधिक इस्तेमाल से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए एंटीबायोटिक और दूसरी दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।

विनीता झा
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