NEW English Version

भारत के हिन्दू मन्दिरों ने पर्यटन के पंख लगाये

–राष्ट्रीय पर्यटन दिवस– 25 जनवरी, 2024 पर विशेष-

हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ समय ऐसा जरूर निकालना चाहिए जिसमें खुशी, शांति, आस्था, धार्मिकता एवं प्रसन्नता के पल जीवंत हो सके, इसका सशक्त माध्यम है पर्यटन। जीवन में पर्यटन के सर्वाधिक महत्व के कारण ही हर साल 25 जनवरी को भारतीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। भारत की विविधता, धार्मिकता, ऐतिहासिकता और बहुसंस्कृतिवाद के कारण, यह दिन देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव, जीवन में खुशियां, आस्था एवं मुस्कान देने वाले पर्यटन के महत्व को उजागर करने के लिए है। भारत में कई धार्मिक स्थल हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों के आस्था का केंद्र है। जहां हजारों-लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मंदिरों की भव्यता देख दीवाने हो जाते हैं, अपूर्व शांति एवं धार्मिकता का अनुभव करते हैं। भारत की परंपरा, आस्था, धर्म और संस्कृति की अलग ही पहचान है। यहां ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की भरमार है। भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा धार्मिक स्थलों का देश कहा जाता है। एक अनुमान के अनुसार, देशभर में पांच हजार से अधिक सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। अब उनमें एक और स्थान जुड़ गया- अयोध्याधाम। काशी, प्रयागराज और अयोध्या धाम धार्मिक पर्यटन के सबसे बड़े स्वर्ण त्रिकोण (गोल्डन ट्रायंगल) में शामिल हो गये हैं, अयोध्या में श्रीराम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले ही दिन पांच लाख लोगों ने दर्शन किये, वैसे सामान्य तौर पर अनुमान है कि यहां एक से डेढ़ लाख लोगों के आने की संभावना है। साल भर में संख्या 10 करोड़ को पार कर सकती है। भारत के हिन्दू मन्दिरों ने पर्यटन को पंख लगा दिये हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में प्रभु श्रीराम मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा एवं काशी की कायाकल्प करके दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है।

धर्म और अध्यात्म भारत की आत्मा है। यह धर्म ही है, जो भारत को उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक एकात्मता के सूत्र में बांधता है। भारत की सभ्यता और संस्कृति का अध्ययन करते हैं तो हमें साफ दिखायी देता है कि धार्मिक पर्यटन हमारी परंपरा में रचा-बसा है। तीर्थाटन के लिए हमारे पुरखों ने पैदल ही इस देश को नापा है। भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में आंध्रप्रदेश का तिरुपति भी एक है, यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर में आए पर्यटक मंदिर की दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्पकला को देख दीवाने हो जाते हैं। मान्यता है कि, यहां आने के बाद व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। ओडिशा के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के चार धाम में से एक माना जाता है। यहां हर साल जून में होने वाला रथ यात्रा उत्सव विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें भारत समेत विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सपनों की माया नगरी कहे जाने वाले मुंबई में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन के बिना कोई भी पर्यटक नहीं लौटता।
वाराणसी या बनारस को दुनिया का सबसे प्राचीन शहर कहा जाता है।

गंगा किनारे बसे इस शहर की खूबसूरती, लोगों का रहन-सहन, बुद्ध से लेकर कबीर-तुलसी, घाट, मंदिर, गलियां, खान-पान पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसलिए हर दिन यहां हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। बनारस का काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है। गढ़वाल, उत्तरांचल में हिमालय पर्वतों के तल में बसा ऋषिकेश में नीलकंठ महादेव का मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थलों में है। यह शहर दुनियाभर में योग राजधानी के तौर पर जाना जाता है। विदेश लोग योग साधना के लिए भी ऋषिकेश को खूब पसंद करते हैं, साथ ही हरिद्वार में गंगा की खूबसूरती एवं संध्या में गंगा आरती भी लोगों को खूब लुभाती है। ऐसे में जो लोग योग और अध्यात्म में रूचि रखते हैं वो यहां जरूर पहुंचते हैं। मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, काशी, उज्जैन, द्वारिका, त्रिवेंद्रम, कन्याकुमारी, अमृतसर, जम्मू-कश्मीर, पुरी, केदारनाथ, बद्रीनाथ ऐसे आस्था के पर्यटन केन्द्र हैं, जो सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों एवं आस्था के पलों को वापस लाने में ही मदद नहीं करते बल्कि ये देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का माध्यम भी बन रहे हैं। देश की पहली जरूरत अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है उसमें पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था पर्यटन-उद्योग के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

भारतीय पर्यटन दिवस को वैश्विक पर्यटक को बढ़ावा देने के प्रयास हेतु मील के पत्थर के रूप में देखा जाता है एवं इस दिवस को मनाने का उद्देश्य विश्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सामाजिक विरासत को जीवंतता देना एवं उसके प्रति जन जागरूकता फैलाना है। भारत जैसे देशों के लिए पर्यटन का खास महत्व है। देश की पुरातात्विक विरासत या सांस्कृतिक धरोहर केवल दार्शनिक, धार्मिक, सांस्कृतिक स्थल के लिए नहीं है बल्कि यह राजस्व प्राप्ति का भी स्रोत है। पर्यटन क्षेत्रों से कई लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है। आज भारत जैसे देशों को देखकर ही विश्व के लगभग सभी देशों में पुरानी और ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण, संवर्द्धन किया जाने लगा है।

भारत असंख्य पर्यटन अनुभवों और मोहक स्थलों का देश है। चाहे भव्य स्मारक हों, प्राचीन मंदिर या मकबरे हों, नदी-झरने, प्राकृतिक मनोरम स्थल हो, इसके चमकीले रंगों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रौद्योगिकी से चलने वाले इसके वर्तमान से अटूट संबंध है। केरल, शिमला, गोवा, आगरा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, मथुरा, काशी जैसी जगहें तो अपने विदेशी पर्यटकों के लिए हमेशा चर्चा में रहती हैं। भारत में पर्यटन की उपयुक्त क्षमता है। यहां सभी प्रकार के पर्यटकों को चाहे वे साहसिक यात्रा पर हों, सांस्कृतिक यात्रा पर या वह तीर्थयात्रा करने आए हों या खूबसूरत समुद्री-तटों की यात्रा पर निकले हों, सबके लिए खूबसूरत जगहें हैं। दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दक्षिण भारत के अनेक राज्यों में तो लोगों को घूमते-घूमते महीना बीत जाते हैं।

भारत के हर राज्य की अलौकिक और विलक्षण विशिष्टताएं हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। उन पर्यटकों के लिए भारत-यात्रा का विशेष आकर्षण है जो शांत, जादुई, सौंदर्य और रोमांच की तलाश में रहते हैं। यह भारत पल-पल परिवर्तित, नितनूतन, बहुआयामी और इन्द्रजाल की हद तक चमत्कारी यथार्थ से परिपूर्ण है। इस भारत की समग्र विविधताओं, नित नवीनताओं और अंतर्विरोधों से साक्षात्कार करना सचमुच अलौकिक एवं विलक्षण अनुभव है। जिससे इस बहुरूपी भारत को उसके बहुआयामी और निहंग वास्तविक रूप में देखा जा सके और ऊबड़-खाबड़ अनगढ़ता की परतों में छिपी सुंदरता को उद्घाटित किया जा सके। हम भारत को एक गुलदस्ते की भांति अनुभव करते हैं, एक ऐसा गुलदस्ता जिसमें भिन्न-भिन्न प्रकार के पुष्प सुसज्जित हैं। किसी फूल में कश्मीर की लालिमा है तो किसी में कामरूप का जादू। कोई फूल पंजाब की कली संजोए हैं, तो किसी में तमिलनाडु की किसी श्यामा का तरन्नुम। किसी में राजस्थान के बलिदान की गाथाएं हैं तो किसी में उत्तरप्रदेश की धार्मिकता। महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल और अन्य प्रदेशों में तो विविधता में सांस्कृतिक एकता के दर्शन होते हैं।  इसी भांति जैसलमेर में पर्यटन से हटकर वहां संग्रहीत प्राचीन पांडुलिपियों की विशद् जानकारी, स्थापत्य कला एवं जैन दर्शनीय स्थलों का अनुभव भी अनूठा है।

भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुन्दरता इतनी ज्यादा है कि पर्यटक ज्यादा समय तक यहां के सुन्दर नजारे देखने से दूर नहीं रह सके। यही वजह है कि भारत में विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न शहरों में अलग-अलग योजनाएं भी लागू की गयीं हैं। भारतीय पर्यटन विभाग ने ‘अतुल्य भारत’ नाम से अभियान चलाया था। इस अभियान का उद्देश्य भारतीय पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रोत्साहित करना था जो काफी हद तक सफल हुआ। भारत सरकार ने ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक वृद्धि अभियान’ (प्रसाद) नाम से योजना शुरू की है। प्रसाद योजना का उद्देश्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के बुनियादी ढांचे एवं सुविधाओं में सुधार करना है। इसे 2015 में पर्यटन मंत्रालय द्वारा ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के हिस्से के रूप में प्रारंभ किया गया था। आज नरेन्द्र मोदी सरकार भारतीय पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिये उल्लेखनीय कार्य कर रही है, जिनमें भारतीय रेल की महत्वपूर्ण भूमिका है, ताकि सैलानी पर्यटन के लिहाज से सुदूर स्थलों की सैर भी आसानी से कर सकते हैं। सिमटती दूरियों के बीच लोग बाहरी दुनिया के बारे में भी जानने के उत्सुक रहते हैं। यही कारण है कि आज भारत में टूरिज्म एक फलता फूलता उद्योग बन चुका है।

ललित गर्ग
ललित गर्ग
Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Translate »