होगी निश्चित भोर

मन के अंदर शोर कबीरा।
बैठा कोई चोर कबीरा।।

समाधान शुभ सहज मिलेगा
एक पकड़ ले छोर कबीरा।।

प्रेम सदा बंधन से ऊपर।
नहीं चलेगा जोर कबीरा।
जीवन-संकट सघन छंटेगा
होगी निश्चित भोर कबीरा।।

नाच रहे हम पुतलों जैसे।
हाथ परम नट डोर कबीरा।।

कहां खोजता मंदिर-मंदिर।
रमा राम तन पोर कबीरा।।

तय करता व्यवहार किसी का।
मानव है या ढोर कबीरा।।

अंतिम विजय सुनिश्चित करने।
कृष्ण बने रणछोर कबीरा।।

प्रमोद दीक्षित मलय शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)
प्रमोद दीक्षित मलय
शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)

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