मन के अंदर शोर कबीरा।
बैठा कोई चोर कबीरा।।
समाधान शुभ सहज मिलेगा
एक पकड़ ले छोर कबीरा।।
प्रेम सदा बंधन से ऊपर।
नहीं चलेगा जोर कबीरा।
जीवन-संकट सघन छंटेगा
होगी निश्चित भोर कबीरा।।
नाच रहे हम पुतलों जैसे।
हाथ परम नट डोर कबीरा।।
कहां खोजता मंदिर-मंदिर।
रमा राम तन पोर कबीरा।।
तय करता व्यवहार किसी का।
मानव है या ढोर कबीरा।।
अंतिम विजय सुनिश्चित करने।
कृष्ण बने रणछोर कबीरा।।

शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)