सुनहु मीत प्रमुदित मम बानी।
जग आधार राम सिय जानी।।
करहु सदा मंगल जन प्रीती।
लघु सनेह बड़ मान सभीती।।
सुमिरन नाम अवस तुम करहू।
कथा भजन सुन माथे धरहू।।
यहि बिधि पालहु निज परिवारा।
मिलहिं सदा सुख कुल संसारा।।
परिजन सह नित कथा प्रसंगा।
अघ अन्याय अनीति असंगा।।
मधुर बचन मुख मुदित प्रबीना।
सुख संतुष्टि शांति शुभ लीना।।
जीवन सरस सहज शुभ साचा।
भगति उमग उर गुरमुख बांचा।।
