दिल्ली में शराब नीति की खामियाँ: रिपोर्ट में उजागर हुई गंभीर गड़बड़ियाँ

दिल्ली में शराब नीति और उसके क्रियान्वयन में कई गंभीर खामियाँ उजागर हुई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में दिल्ली सरकार की शराब नीति 2021-22 में कई अनियमितताओं को चिन्हित किया गया है। यह नीति मूल रूप से पारदर्शिता, समान वितरण और अवैध शराब बिक्री को रोकने के उद्देश्य से लाई गई थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई गड़बड़ियाँ पाई गईं।

मुख्य निष्कर्ष

  • अनुचित लाइसेंसिंग:
    • शराब लाइसेंस जारी करते समय कई अनियमितताएँ पाई गईं।
    • कई लाइसेंस बिना उचित जाँच के जारी किए गए।
    • एक ही कंपनी के विभिन्न शाखाओं को कई लाइसेंस जारी कर दिए गए, जिससे एकाधिकार की स्थिति बनी।
  • वित्तीय अनियमितताएँ:
    • सरकार को लाइसेंस शुल्क में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
    • नीति के तहत शुल्क संग्रह में बड़े स्तर पर गड़बड़ियाँ देखी गईं।
    • 941.53 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा समय पर मंजूरी न लेने के कारण हुआ।
  • गुणवत्ता नियंत्रण की विफलता:
    • शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
    • टेस्टिंग मानकों का पालन नहीं किया गया।
    • भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की शर्तों को पूरा किए बिना लाइसेंस जारी किए गए।
  • नीति निर्माण में विसंगतियाँ:
    • विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज कर नीति बनाई गई।
    • गोपनीय रूप से निर्णय लिए गए और कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली गई।
    • नीति का क्रियान्वयन दोषपूर्ण था, जिससे कई कंपनियों को अनुचित लाभ मिला।

प्रमुख समस्याएँ और सिफारिशें

  1. अनुचित लाइसेंस वितरण:
    • सरकार को लाइसेंस जारी करने से पहले उचित जाँच सुनिश्चित करनी चाहिए।
    • संबंधित प्राधिकरणों से पूर्व अनुमोदन आवश्यक होना चाहिए।
  2. राजस्व हानि को रोकने के लिए सख्त निगरानी:
    • शराब बिक्री से जुड़ी वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
    • सभी लेन-देन डिजिटल तरीके से दर्ज किए जाएं ताकि हेरफेर न हो सके।
  3. गुणवत्ता नियंत्रण:
    • शराब की गुणवत्ता की नियमित रूप से जाँच हो।
    • गैर-अनुपालन पाए जाने पर लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए जाएं।
  4. एकाधिकार और मिलीभगत को रोकना:
    • नीति को इस तरह तैयार किया जाए कि कोई भी कंपनी शराब व्यापार पर एकाधिकार न जमा सके।
    • गोपनीय निर्णय लेने के बजाय, सभी नीतिगत बदलाव सार्वजनिक किए जाएं।

CAG की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली की शराब नीति में भारी अनियमितताएँ थीं। सरकार को भविष्य में ऐसी नीतियों के क्रियान्वयन में अधिक पारदर्शिता और कठोर नियामक उपाय अपनाने चाहिए। इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि नीति निर्माण और कार्यान्वयन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का अभाव था, जिससे न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि शराब व्यापार में भी गड़बड़ी हुई।

सरकार को इस रिपोर्ट की सिफारिशों को गंभीरता से लेना चाहिए और एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी शराब नीति लागू करनी चाहिए, जिससे भ्रष्टाचार और एकाधिकार की संभावना समाप्त हो सके।

Source: CAG Report – 1 (25 Feb, 2025)

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