NEW English Version

नयी विश्व संरचना में विरासत एवं विकास का समन्वय अपेक्षित

-विश्व विरासत दिवस/विश्व धरोहर दिवस- 18 अप्रैल, 2025-

विश्व धरोहर दिवस अथवा विश्व विरासत दिवस मानव सभ्यता के इतिहास और विरासत को एक साथ सम्मान देने एवं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षित करने के लिए हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक परिदृश्यों और संरचनाओं का जश्न मनाना और उन पर ध्यान आकर्षित करना है, जो व्यक्तियों, समुदायों और राष्ट्रों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की पहल पर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि की गई जो विश्व के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है। यह संधि सन् 1972 में लागू की गई। प्रारंभ में मुख्यतः तीन श्रेणियों में धरोहर स्थलों को शामिल किया गया। पहले वह धरोहर स्थल जो प्राकृतिक रूप से संबद्ध हो अर्थात प्राकृतिक धरोहर स्थल, दूसरे सांस्कृतिक धरोहर स्थल और तीसरे मिश्रित धरोहर स्थल।

वर्ष 1982 में इकोमार्क नामक संस्था के ट्यूनिशिया में अंतर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस में यह बात उठी कि विश्व भर में विरासत दिवस का आयोजन किया जाना चाहिए। यूनेस्को के महासम्मेलन में इसके अनुमोदन के पश्चात विश्व धरोहर दिवस के रूप में मनाने के लिए घोषणा की गई। हर साल धरोहर दिवस की एक खास थीम होती है। साल 2024 में विश्व विरासत दिवस की थीम विविधता की खोज और अनुभव थी। वहीं इस साल थीम है आपदाओं और संघर्षों से खतरे में पड़ी विरासतः आईसीओएमएस की 60 वर्षों की कार्रवाइयों से तैयारी और सीख। यह थीम गौरवशाली अतीत में विश्व संस्कृतियों की सुंदरता को बढ़ाने एवं संरक्षित के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

दुनिया के तमाम देशों में कई सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरें हैं, जिन्हें यूनेस्को ने विश्व विरासत घोषित किया है। इनमें से आठ ऐसी विश्व धरोहर हैं जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और लोकप्रिय हैं। जिनमें मिस्र में मौजूद गीज़ा का ‘ग्रेट पिरामिड’ आज भी रहस्य बना हुआ है। 481 फीट ऊंचा यह पिरामिड विश्व के आठ प्राचीन अजूबों में शामिल है और माना जाता है कि इसे चांद से भी देखा जा सकता है। माचू पिच्चू, पेरू यह ऐतिहासिक स्थल पेरू की पहाड़ियों पर बसा है और रहस्यमयी और खूबसूरत माचू पिच्चू को ‘इंकाओं का खोया हुआ शहर’ भी कहा जाता है। चीन की महान दीवार दुनिया की सबसे लंबी दीवार है, जिसकी लंबाई करीब 21,196 किलोमीटर है। यह दीवार कई राजाओं और साम्राज्यों द्वारा रक्षा के लिए बनाई गई थी। आगरा का ताजमहल मोहब्बत एवं प्रेम की सबसे खूबसूरत मिसाल है। इसे शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था। यह सफेद संगमरमर की इमारत भारत की सबसे मशहूर धरोहरों में से एक है।

क्राइस्ट द रिडीमर, ब्राजील रियो डी जेनेरियो में स्थित यीशु की यह विशाल प्रतिमा 30 मीटर ऊंची है। यह प्रतिमा न सिर्फ धार्मिक प्रतीक है, बल्कि शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। पेट्रा, जॉर्डन रेगिस्तान के बीच स्थित पेट्रा शहर अपनी अनोखी लाल पत्थर की इमारतों और मंदिरों के लिए जाना जाता है। इसकी वास्तुकला और नक्काशी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। कोलोसियम, रोम (इटली) प्राचीन रोम के सम्राटों द्वारा बनवाया गया यह विशाल अखाड़ा कभी ग्लैडिएटरों की लड़ाई का गवाह था। यह आज भी रोम की पहचान बना हुआ है और विश्व धरोहर सूची में शामिल है। चिचेन इट्जा, मेक्सिको यह माया सभ्यता का प्रमुख धार्मिक स्थल रहा है। यहां बना ‘एल कैस्टिलो’ पिरामिड देखने लायक है। चिचेन इट्जा को मेक्सिको का सबसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल माना जाता है।

भारत में ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध है। भारत में 43 यूनेस्को आधारित विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें से 35 सांस्कृतिक हैं, सात प्राकृतिक हैं और कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान एक मिश्रित स्थल है। 62 अन्य संभावित सूची में हैं, यहाँ ऐतिहासिक स्थलों का खजाना है जो इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। 2024 में, असम से चराइदेव मोइदम विश्व धरोहर सूची में शामिल होने वाली नवीनतम भारतीय प्रविष्टि बन गई। अहोम राजघरानों के दफ़न टीलों में गुंबददार कक्ष हैं, जो अक्सर दो-मंजिला होते हैं और जहां मेहराबदार मार्गों से पहुँचा जा सकता है। इन कक्षों में, मृतक को उनके सामान, जिसमें कपड़े और आभूषण, हथियार, फर्नीचर और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं के साथ सुरक्षित रखा गया है।

विश्व विरासत दिवस सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों के पलों को लाने में ही मदद नहीं करता बल्कि यह देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का माध्यम भी है। यह पर्यटन को प्रोत्साहन देने का सशक्त माध्यम है। भारत की अर्थव्यवस्था पर्यटन-उद्योग के इर्द-गिर्द घूमती रही है। भारत की विरासत विश्व में सबसे प्राचीन और समृद्ध विरासतों में से एक मानी जाती है। हज़ारों वर्षों से यह भूमि सांस्कृतिक, धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अनेक महान परिवर्तनों एवं प्रगतियों की साक्षी रही है। भारतीय संस्कृति का इतिहास अत्यंत विविधतापूर्ण और बहुआयामी है, जिसने न केवल भारत बल्कि समग्र मानवता को गहराई से प्रभावित किया है।

भारत की विकास यात्रा का इतिहास रोमांचक और प्रेरणादायक रहा है। स्वतंत्रता के बाद देश को एक ऐसे रास्ते पर चलना था जहाँ उसे पुनर्निर्माण के साथ-साथ आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाना था। वर्तमान में भारत विश्व की प्रमुख आर्थिक एवं प्रौद्योगिकीय शक्तियों में से एक है, लेकिन यह यात्रा आसान नहीं थी। स्वतंत्रता के बाद भारत को न केवल अपने सामाजिक और आर्थिक ढाँचे को पुनर्स्थापित करना था, बल्कि उसे एक ऐसे लोकतांत्रिक देश का निर्माण करना था जो अपने नागरिकों को समान अवसर और अधिकार प्रदान कर सके। इस वर्ष गणतंत्र दिवस की थीम ‘स्वर्णिम भारत- विकास के साथ विरासत’ है। यह थीम देश की विरासत को संभालते हुए भारत की प्रगति की यात्रा को दर्शाती है। भारत अपनी सुंदरता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

राजस्थान भारत का एक राज्य है जो विश्व विरासत का समृद्ध केन्द्र है, यह पर्यटन के लिए सबसे समृद्ध राज्य माना जाता है। राजस्थान की पुरातात्विक विरासत या सांस्कृतिक धरोहर केवल दार्शनिक, धार्मिक, सांस्कृतिक स्थल के लिए नहीं है बल्कि यह राजस्व प्राप्ति का भी स्रोत है। यूं तो भारत के सभी राज्यों में समृद्ध विरासत देखने को मिलती है। पर्यटन क्षेत्रों से कई लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है। प्राकृतिक सुंदरता और महान इतिहास से संपन्न राजस्थान में पर्यटन उद्योग समृद्धिशाली है। राजस्थान देशीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों, दोनों के लिए एक सर्वाधिक आकर्षक पर्यटन स्थल है। भारत की सैर करने वाला हर तीसरा विदेशी सैलानी राजस्थान देखने ज़रूर आता है। जयपुर के महल, उदयपुर की झीलें और जोधपुर, बीकानेर तथा जैसलमेर के भव्य दुर्ग भारतीय और विदेशी सैलानियों के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक हैं। इन प्रसिद्ध विरासत स्थलों को देखने के लिए यहाँ हज़ारों पर्यटक आते हैं। जयपुर का हवामहल, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर के धोरे काफी प्रसिद्ध हैं। जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग, सवाई माधोपुर का रणथम्भोर दुर्ग एवं चित्तौड़गढ़ दुर्ग काफी प्रसिद्ध है। यहाँ शेखावटी की कई पुरानी हवेलियाँ भी हैं जो वर्तमान में हैरीटेज होटलें बन चुकी हैं।

विश्व विरासत दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि चिंतन, कार्रवाई और प्रतिबद्धता का दिन है। इस अवसर का उपयोग सभी के लाभ के लिए अपने सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक संरक्षण में योगदान देना है। यह वैश्विक आयोजन सांस्कृतिक धरोहर के प्रति चिंतन करता है और इन अमूल्य खजानों के साथ जुड़ाव को प्रोत्साहित करता है। यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन सांस्कृतिक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित और सुरक्षित रखने के महत्व को पहचानने, दुनिया भर में उनकी सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक महत्व के लिए सराहना को बढ़ावा देने का अवसर है।

ललित गर्ग
ललित गर्ग
Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »