वाराणसी : डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, वाराणसी के बहुउद्देश्यीय सभागार में विज्ञान संकाय द्वारा नवप्रवेशित छात्र/छात्राओं के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम( ओरिएंटेशन प्रोग्राम) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए छात्रों को महाविद्यालय के परिवेश, पाठ्यक्रम और भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराना था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. घनश्याम सिंह कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. सुनील मिश्रा की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती और महाविद्यालय के प्रेरणापुंज स्व. डॉ. घनश्याम सिंह तैलचित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य वक्ता डॉ. मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि- विज्ञान हमें तार्किक रूप से सोचने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने रोज़मर्रा के जीवन में विज्ञान के योगदान को कई उदाहरणों से समझाया। और बताया कि किस तरह विज्ञान ने मानवता के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों, जैसे-बीमारियों और पर्यावरणीय समस्याओं, का सामना करने में मदद की है। अपने संबोधन के दौरान डॉ. मिश्रा ने न केवल नवप्रवेशित छात्र/छात्राओं को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया बल्कि उन्हें यह भी अवगत कराया कि जिज्ञासा और नवाचार ही विज्ञान की प्रगति के मुख्य स्तंभ हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपने आसपास की दुनिया को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें।


इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ आनंद सिंह ने छात्रों का स्वागत किया और उन्हें उच्च शिक्षा के महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होनें इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान केवल एक विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का क्षेत्र अनंत संभावनाओं से भरा है अतः छात्रों को अपनी जिज्ञासा बनाए रखनी चाहिए।
विज्ञान संकाय की डॉ. ज्योति सिंह ने छात्रों को विभिन्न विभागों, जैसे- भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह संकाय के अनुभवी शिक्षक छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा में सहयोग प्रदान करते हैं। साथ ही नए छात्र/छात्राओं को कॉलेज जीवन में सामंजस्य बैठाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अलावा, छात्रों को महाविद्यालय के पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं के बारे में भी बताया गया।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए महाविद्यालय के प्रबंधक नागेश्वर सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो जिज्ञासा को जीवित रखे, विवेक और संवेदनशीलता को विकसित करे तथा जीवन के प्रश्नों का समाधान तर्क और नैतिकता के साथ खोजने की क्षमता दे। यहाँ आपका प्रत्येक अनुभव तभी सार्थक होगा जब आप अध्ययन को कक्षा से बाहर जीवन के प्रत्येक आयाम से जोड़ पाएँगे।
मैं आपसे अपेक्षा करता हूँ कि आप परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास को अपनी आदत बनाएँ और जिज्ञासा को कभी समाप्त न होने दें। आप सभी भविष्य की वह धारा हैं जो समाज और राष्ट्र की दिशा निर्धारित करेगी। मुझे विश्वास है कि आप इस महाविद्यालय से प्राप्त ज्ञान और संस्कारों के बल पर अपने जीवन को सार्थक और समाज को प्रगतिशील बनाएँगे।

