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भारत-इंडोनेशिया नौसैनिक सहयोग को नई दिशा: विशाखापत्तनम में ‘समुद्र शक्ति–2025’ अभ्यास का शुभारंभ

भारत और इंडोनेशिया के बीच सामरिक साझेदारी और समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘समुद्र शक्ति–2025’ के पांचवें संस्करण की मेजबानी की है। यह संयुक्त अभ्यास 14 से 17 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दोनों देशों की नौसेनाएं एक साथ मिलकर रणनीतिक कौशल, संचालनिक तालमेल और पारस्परिक सहयोग को और मजबूत कर रही हैं।

भारत-इंडोनेशिया नौसैनिक सहयोग को नई दिशा: विशाखापत्तनम में ‘समुद्र शक्ति–2025’ अभ्यास का शुभारंभ

अभ्यास का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

‘समुद्र शक्ति’ भारत और इंडोनेशिया के बीच आयोजित एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालन क्षमता) को बढ़ाना, पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान करना, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करना है।

इस अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, और तब से यह दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक विश्वास और सहयोग का प्रतीक बन गया है। वर्ष 2025 में इसका पांचवां संस्करण भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान (Eastern Naval Command) के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

भाग लेने वाली इकाइयाँ और संचालन विवरण

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस कवरत्ती (INS Kavaratti) भाग ले रही है, जो एक अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्धक (Anti-Submarine Warfare Corvette) है। यह पोत पूर्वी बेड़े का हिस्सा है और अपनी उन्नत तकनीकी क्षमता के लिए जाना जाता है।

वहीं, इंडोनेशियाई नौसेना की ओर से केआरआई जॉन लाइ (KRI John Lie) नामक एक कोर्वेट भाग ले रही है, जो एक अभिन्न हेलीकॉप्टर से लैस है। विशाखापत्तनम पहुंचने पर दोनों देशों की नौसैनिक इकाइयों का भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

बंदरगाह चरण: सौहार्द और पेशेवर जुड़ाव

‘समुद्र शक्ति–2025’ का बंदरगाह चरण (Harbour Phase) दोनों नौसेनाओं के बीच सौहार्द, विश्वास और पेशेवर संबंधों को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। इस चरण के दौरान कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • क्रॉस-डेक विजिट्स (Cross Deck Visits): दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे के जहाजों का दौरा और तकनीकी जानकारी का साझा करना।
  • संयुक्त योग सत्र (Joint Yoga Session): दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच सांस्कृतिक एकता और आपसी समझ बढ़ाने का प्रतीक।
  • मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएँ (Friendly Sports Events): टीम भावना और पारस्परिक सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित।
  • विषय-वस्तु विशेषज्ञों का आदान-प्रदान (Subject Matter Expert Exchange – SMEE): नौसैनिक संचालन, रणनीतिक समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान साझा करना।

समुद्री चरण: रणनीतिक अभ्यास और समन्वय

बंदरगाह चरण के बाद अभ्यास का समुद्री चरण (Sea Phase) आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दोनों नौसेनाएँ वास्तविक परिस्थितियों में जटिल नौसैनिक अभियानों का अभ्यास कर रही हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा संचालन में पारस्परिक समझ और समन्वय को और मजबूत करना है।

मुख्य गतिविधियों में शामिल हैं:

  • हेलीकॉप्टर संचालन और वायु रक्षा अभ्यास (Air Defence Drills)
  • हथियार फायरिंग अभ्यास (Weapons Firing Exercise)
  • दौरा, बोर्ड, खोज और जब्ती अभ्यास (Visit, Board, Search & Seizure – VBSS)
  • सामरिक संचालन और नौसैनिक समन्वय अभ्यास

ये सभी गतिविधियाँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए दोनों नौसेनाओं की प्रतिबद्धता को और दृढ़ बनाती हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण

भारत और इंडोनेशिया दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था (Free, Open & Rules-Based Indo-Pacific) के प्रबल समर्थक हैं। दोनों देशों की नौसेनाएँ इस क्षेत्र में समुद्री डकैती, तस्करी, और मानवीय संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ा रही हैं।

‘समुद्र शक्ति’ जैसे अभ्यास इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं, जो सुरक्षा, स्थिरता और परस्पर विश्वास पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग को गति देते हैं।

भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग केवल समुद्री अभ्यास तक सीमित नहीं है। दोनों देश सूचना साझाकरण, साझा गश्ती अभियान, रक्षा प्रशिक्षण और उद्योग सहयोग के माध्यम से अपने संबंधों को और गहराई दे रहे हैं।

विशाखापत्तनम में आयोजित यह अभ्यास न केवल दोनों देशों की नौसेनाओं के सामरिक कौशल को निखारने का अवसर है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में साझा सुरक्षा हितों और रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा देता है।

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