भारत को यूएन-जीजीआईएम-एपी की क्षेत्रीय समिति का सह-अध्यक्ष चुना गया: वैश्विक भू-स्थानिक नेतृत्व में भारत की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत ने वैश्विक भू-स्थानिक क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति को एक बार फिर सिद्ध किया है। देश के महासर्वेक्षक श्री हितेश कुमार एस. मकवाना, आईएएस को एशिया और प्रशांत क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र वैश्विक भू-स्थानिक सूचना प्रबंधन (UN-GGIM-AP) की क्षेत्रीय समिति के सह-अध्यक्ष (Co-Chair) के प्रतिष्ठित पद के लिए चुना गया है। यह चुनाव भारत के लिए न केवल एक सम्मानजनक उपलब्धि है, बल्कि भू-स्थानिक नवाचार, नीति-निर्माण और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में इसकी बढ़ती नेतृत्व भूमिका का प्रमाण भी है।

कोरिया में हुआ चुनाव, एशिया-प्रशांत देशों का भारत पर भरोसा

यह चुनाव 24 से 26 सितंबर 2025 के बीच कोरिया के गोयांग-सी में आयोजित यूएन-जीजीआईएम-एपी की 14वीं पूर्ण बैठक के दौरान संपन्न हुआ। इस बैठक की मेजबानी कोरिया के राष्ट्रीय भौगोलिक सूचना संस्थान (NGII) ने की।
बैठक में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के सदस्य देशों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ, और कई अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय भू-स्थानिक सूचना प्रबंधन से जुड़े प्रमुख विषयों—जैसे डेटा मानकीकरण, नीति-संरेखण, तकनीकी क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय साझेदारी—पर गहन विचार-विमर्श किया।

चुनाव के परिणामस्वरूप भारत को अगले तीन वर्ष (2025–2028) के लिए सह-अध्यक्ष के रूप में चुना गया। यह चयन एशिया-प्रशांत के 56 सदस्य देशों द्वारा भारत की नीतियों, तकनीकी क्षमता और सहयोगी दृष्टिकोण पर व्यक्त गहरे विश्वास को दर्शाता है।

भारत की वैश्विक स्थिति को मिला नया आयाम

सह-अध्यक्ष के रूप में भारत का चयन वैश्विक भू-स्थानिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सैटेलाइट डेटा प्रबंधन, भू-स्थानिक नीति 2021, और डिजिटल कार्टोग्राफी सुधारों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है।

यह जिम्मेदारी न केवल भारत के नवाचारों की मान्यता है, बल्कि यह भी संकेत है कि आने वाले समय में भारत क्षेत्रीय सहयोग, डिजिटल परिवर्तन और डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

श्री हितेश कुमार एस. मकवाना का वक्तव्य: “हम समावेशी और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध हैं”

इस अवसर पर सह-अध्यक्ष चुने जाने के बाद श्री हितेश कुमार एस. मकवाना ने कहा:

“एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सदस्य देशों द्वारा भारत पर जताए गए भरोसे से मैं अत्यंत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। आगामी कार्यकाल में, हम सभी सदस्य देशों, साझेदारों और हितधारकों के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से समावेशी, सुदृढ़ और परिणाम-उन्मुख पहलें सुनिश्चित करेंगे।”

उन्होंने कहा कि भारत का आगामी कार्यकाल यूएन-जीजीआईएम के रणनीतिक ढांचे के अनुरूप होगा, जिसमें मज़बूत नेतृत्व, डिजिटल परिवर्तन और सुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

“हमारा उद्देश्य डेटा-आधारित निर्णय लेने, समावेशिता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, हम क्षमता निर्माण और साझेदारी को सशक्त बनाकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-स्थानिक प्रबंधन का मापनीय प्रभाव स्थापित करेंगे,” उन्होंने कहा।

यूएन-जीजीआईएम-एपी: क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक नीतियों का केंद्र

यूएन-जीजीआईएम-एपी (United Nations Global Geospatial Information Management – Asia and the Pacific), संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ समिति की पाँच प्रमुख क्षेत्रीय समितियों में से एक है।
यह समिति एशिया और प्रशांत क्षेत्र के 56 देशों की राष्ट्रीय भू-स्थानिक सूचना एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करती है।

इसका मुख्य उद्देश्य है —

  • क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भू-स्थानिक डेटा के सहयोग और साझाकरण को बढ़ावा देना।
  • क्षमता विकास, प्रशिक्षण और नवाचार को प्रोत्साहित करना।
  • आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों के लिए भू-स्थानिक सूचना का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना।

यूएन-जीजीआईएम अंतर-सरकारी निर्णय लेने का वह सर्वोच्च मंच है जो भू-स्थानिक डेटा से संबंधित नीतियों, मानकों और दिशानिर्देशों का निर्धारण करता है। इसका लक्ष्य है कि वैश्विक स्तर पर भू-स्थानिक सूचना का उपयोग सतत विकास, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और शासन सुधारों में प्रभावी रूप से किया जा सके।

भारत की भूमिका: क्षेत्रीय सहयोग का नया अध्याय

सह-अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-स्थानिक सहयोग और नीति-निर्माण को नई दिशा देगी। भारत के पास पहले से ही सर्वे ऑफ इंडिया, इसरो, राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र, और डिजिटल इंडिया भू-स्थानिक पहल जैसी संस्थागत शक्तियाँ हैं, जिनसे क्षेत्रीय क्षमता निर्माण को गति मिलेगी।

भारत आने वाले तीन वर्षों में –

  • क्षेत्रीय स्तर पर डेटा पारदर्शिता और मानकीकरण को बढ़ावा देगा,
  • भू-स्थानिक तकनीकों में नवाचार और कौशल विकास पर बल देगा,
  • और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के समर्थन में भू-स्थानिक डेटा के उपयोग को सशक्त बनाएगा।

एक अधिक जुड़ा हुआ और सक्षम भू-स्थानिक समुदाय

श्री मकवाना ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य एक “अधिक जुड़ा हुआ, सक्षम और दूरदर्शी भू-स्थानिक समुदाय” का निर्माण करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत के नेतृत्व में यूएन-जीजीआईएम-एपी आने वाले वर्षों में तकनीकी, नीति और सहयोग के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा।

भारत की यह भूमिका यह सुनिश्चित करेगी कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र न केवल भू-स्थानिक सूचना प्रबंधन में आत्मनिर्भर बने, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नीति-निर्माण में एक अग्रणी भूमिका निभाए।

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