राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ऐतिहासिक बोत्सवाना यात्रा : भारत-बोत्सवाना संबंधों में नए युग की शुरुआत

भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच साझेदारी के इतिहास में आज एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बोत्सवाना की राजधानी गैबोरोन पहुंचकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। यह किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की पहली बोत्सवाना यात्रा है, जो दोनों देशों के संबंधों के इतिहास में मील का पत्थर मानी जा रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ऐतिहासिक बोत्सवाना यात्रा : भारत-बोत्सवाना संबंधों में नए युग की शुरुआत

यह यात्रा राष्ट्रपति मुर्मु के अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा के अंतिम चरण का हिस्सा है। उनके साथ इस दौरे पर जल शक्ति एवं रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, और सांसद श्री परभुभाई नागरभाई वसावा तथा श्रीमती डी.के. अरुणा भी शामिल हैं।

गर्मजोशी भरा स्वागत और ऐतिहासिक सम्मान

गैबोरोन स्थित राष्ट्रपति कार्यालय में बोत्सवाना गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम एडवोकेट ड्यूमा गिदोन बोको ने राष्ट्रपति मुर्मु का अत्यंत गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति बोको ने कहा कि भारत, जिसे उन्होंने “लोकतंत्र का जनक” बताया, बोत्सवाना की विकास यात्रा में प्रेरणा और समर्थन का एक अटूट स्रोत रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मु की शिक्षा, लैंगिक समानता और हाशिए पर आने वाले वर्गों के उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।

राष्ट्रपति बोको ने यह भी उल्लेख किया कि उनके पदभार ग्रहण करने के बाद यह किसी भी देश की पहली राजकीय यात्रा है, जो भारत और बोत्सवाना के द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को दर्शाती है।

प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता : सहयोग के नए आयाम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राष्ट्रपति बोको के बीच हुई व्यापक व्यक्तिगत बैठकों और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और गहराई देने पर सहमति व्यक्त की।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यह यात्रा भारत-बोत्सवाना संबंधों को नई दिशा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी, और यह यात्रा उस ऐतिहासिक मील के पत्थर की तैयारी के रूप में भी देखी जा रही है।

भारत-अफ्रीका साझेदारी को मिलेगी नई ऊर्जा

राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की ओर से अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत, बोत्सवाना के साथ मिलकर न केवल द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करेगा बल्कि भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (India-Africa Forum Summit) के तहत अफ्रीका के साथ साझेदारी के नए आयाम स्थापित करने के लिए भी कार्य करेगा।

वन्यजीव संरक्षण में साझा पहल : ‘प्रोजेक्ट चीता’ को मिला समर्थन

राष्ट्रपति मुर्मु ने बोत्सवाना सरकार द्वारा ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अगले चरण में भारत को सहयोग देने के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत सरकार की एक अद्वितीय वन्यजीव संरक्षण परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत के पारिस्थितिक तंत्र में चीतों को पुनर्स्थापित करना है। राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति बोको और बोत्सवाना के नागरिकों को भारत में अपने देश से चीते भेजने की सहमति देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

फार्माकोपिया समझौते पर हस्ताक्षर : स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल

दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से फार्माकोपिया पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से बोत्सवाना के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाइयां आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी बताया कि बोत्सवाना सरकार के अनुरोध पर भारत आवश्यक एंटी-रेट्रोवायरल (ARV) दवाइयां उपलब्ध कराएगा। यह पहल भारत की “वैश्विक दक्षिण के लिए स्वास्थ्य सहयोग नीति” की भावना को भी आगे बढ़ाती है।

द्विपक्षीय संवाद के नए अध्याय की शुरुआत

इस यात्रा के दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने आपसी संवाद, समझ और सहयोग के माध्यम से भारत-बोत्सवाना संबंधों को और सशक्त बनाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया। दोनों नेताओं ने साझा प्रेस वक्तव्यों में इस विश्वास को व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत और बोत्सवाना के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जन-जन के स्तर पर संबंध और अधिक सुदृढ़ होंगे।

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