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यूनीसेफ : बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कल्याण को समर्पित संस्था

द्वितीय विश्व युद्ध (वर्ष 1939 से 1945 तक) के बाद पूरी दुनिया में महिलाओं और बच्चों के लिए सामान्य मानवीय जीवन जीने की चुनौती उपस्थित हुई। भोजन एवं सुरक्षित आश्रय का बड़ा संकट खड़ा हुआ। बच्चों के लिए भोजन एवं आवास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, समुचित पोषण और विकास के रास्ते पर रुकावटें एवं बाधाएं मुंह बाये खड़ी थीं। अधिकांश बच्चों के माता-पिता और परिवार युद्ध से प्रभावित हुए थे। बच्चों का जीवन कष्ट एवं पीड़ा के अंधेरे में सिसक रहा था, बालपन छिन गया था। बच्चों की स्वाभाविक निश्छलता, प्रसन्नता और अल्हड़ता गायब थी। बच्चे कुंठा, अवसाद और तनाव की काली चादर तले सहमते-सिसकते जीवन और मौत के पाटों के बीच अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे थे।‌

चतुर्दिक नैराश्य और संवेदनहीनता का माहौल था। भूख, प्यास, दवा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति का कोई साधन दूर-दूर तक दृष्टिगोचर न था। कहीं से कोई मदद करने वाला नहीं, सहायता मिलने का कोई रास्ता नहीं दिखाई पड़ रहा था। तब एक आशा की किरण दिखाई दी। वर्ष 1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्रसंघ ने बाल कल्याण के लिए एक संगठन बनाने का निर्णय लिया और 11 दिसम्बर, 1946 को ‘संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष’ (UNICEF) की स्थापना किया जो वर्तमान में 190 से अधिक देशों में ‘यूनीसेफ’ के नाम से सामान्य मानवीय जरूरतों से वंचित एवं जोखिम उठा रहे बच्चों के समग्र विकास एवं कल्याण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और पोषण प्रदान करने के विविध कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।

तब से स्थापना दिवस 11 दिसम्बर को प्रत्येक वर्ष यूनीसेफ दिवस या बाल कल्याण कोष दिवस नाम से मनाते हुए यूनीसेफ द्वारा बच्चों की मदद के लिए किए गये महनीय योगदान को स्मरण किया जाता है। यूनीसेफ बाल अधिकारों की पैरवी करते हुए युद्ध एवं आपदा के समय आपातकालीन स्थितियों में भी अविलम्ब सहायता पहुंचाने को तत्पर रहता है। यूनीसेफ को दुनिया भर के बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कल्याण के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए वर्ष 1965 में नोबल शांति पुरस्कार, 1989 में इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार तथा 2006 में प्रिंसेस आप आस्टुरियस पुरस्कार जैसे अंतरराष्ट्रीय विख्यात एवं प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।

भारत में यूनीसेफ ने वरू 1949 में केवल तीन कर्मचारियों के साथ काम करना आरंभ किया था और 1952 में नई दिल्ली में पहला कार्यालय खोला था।  आज भारत के 16 से अधिक राज्यों में यूनीसेफ सरकारी विभागों एवं गैर सरकारी संस्थाओं के साथ मिल कर बाल कल्याण के विविध कार्यक्रम चला रहा है। भारत सरकार द्वारा यूनीसेफ के साथ साझेदारी के 75 वर्ष  पूरे होने पर 10 रुपए मूल्य का एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था। इसके पूर्व 25वीं वर्षगांठ 1974, बाल अधिकार सम्मेलन की 30वीं वार्षिकी पर 1989 और एक अन्य अवसर पर 2009 में भी डाक टिकट जारी किए थे।  वर्ष 1986 में यूनीसेफ गठन के 40 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टीकाकरण एवं विकास निगरानी विषयक 50 पैसे एवं 5 रुपए के दो डाक टिकट जारी किए थे। निश्चित रूप से, यह भारत और यूनीसेफ के सम्बंधों की प्रगाढ़ता, गहराई और पारस्परिक समझ को दर्शाता है।

यूनीसेफ की भारत में बाल कल्याण की यात्रा 75 वर्ष से अधिक की हो गई है। इन वर्षों में यूनीसेफ ने सरकार, समुदाय और स्वैच्छिक संस्थाओं के साथ मिलकर राष्ट्रीय टीकाकरण, जल स्वच्छता, शिशु मृत्यु दर में कमी, हिंसा एवं बाल यौन शोषण से बचाव, समुचित पोषण, आनंदमय गुणवत्ता परक शिक्षा,  बाल अधिकारों का समर्थन एवं पैरवी तथा बाल कल्याण के अन्यान्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किया है। हर बच्चे के जीवन का सबसे अच्छा आरम्भ हो और वह अपनी क्षमता अनुसार अपना पूर्ण विकास कर सके, इसके लिए यूनीसेफ उचित परिवेश निर्माण और जागरूकता के लिए सरकार एवं भागीदारों के साथ कार्यक्रम सुनिश्चित करता है। यूनीसेफ के कतिपय विशेष योगदान पर दृष्टिपात करें तो उत्साहजनक दृश्य दिखाई देता है।

दुग्ध सहकारी संस्थाओं से बच्चों को रियायती दर पर दूध उपलब्ध कराने तथा दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापना हेतु 1954 में समझौता किया। इसी वर्ष मलेरिया उन्मूलन हेतु डीडीटी उत्पादन हेतु कारखाना निर्माण हेतु सहयोग किया। 1960 के दशक में विद्यालयों में रुचि पूर्ण विज्ञान शिक्षण हेतु तथा 1966 में सूखाग्रस्त बिहार के लोगों के लिए स्वच्छ सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने हेतु सरकार के साथ अनुबंध किया जो आगे चलकर ग्रामीण जलापूर्ति कार्यक्रम नाम से जाना गया। इसके अतिरिक्त टीकारण, राष्ट्रीय जनगणना, पोलियो मुक्ति अभियान को भी मदद दी। भारत की एक बड़ी सामाजिक समस्या खुले में शौच जाने की थी। यह बच्चों और महिलाओं के लिए शर्मनाक, अपमानजनक, अमानवीय और कष्टभरा दैनंदिन जरूरी कार्य था। वर्ष 2019 में खुले में शौच से मुक्ति का एक बड़ा अभियान चलाकर घर-घर शौचालय बनाने का काम सरकार के सहयोग से सम्पन्न हुआ। आज महिलाओ और बच्चों के लिए उनके मकान में या सहज पहुंच में ही शौच सुविधा उपलब्ध है। मानवता के लिए महासंकट कोविड के दौरान जीवन रक्षक दवाएं एवं उपकरण, आक्सीजन उत्पादन हेतु संयंत्र स्थापना तथा चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित मेडिकल संसाधन उपलब्ध करायें। यूनीसेफ के लिए भारत महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक अग्रणी और विश्वसनीय साझीदार है।

यूनीसेफ के स्थापना दिवस के अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं विकास के लिए घर-परिवार, पड़ोस और कार्य स्थलों में सम्मानजनक स्थान बनाएंगे ताकि संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा घोषित बाल अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने में हम योगदान दे सकें। कह सकते हैं कि यूनीसेफ ने भारत के बाल कल्याण क्षेत्र में प्रतिष्ठित एवं उल्लेखनीय कार्य किया है। युद्धग्रस्त हिंसक दुनिया में हम बच्चों के लिए एक खुशियों भरी मुस्कुराती जगह बना सकें, जहां बच्चे अपना स्वाभाविक प्राकृतिक विकास कर सकें; यह संकल्प सिद्ध हो, ऐसी शुभेच्छा ।

प्रमोद दीक्षित मलय शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)
प्रमोद दीक्षित मलय
शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)
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