भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी क्षमता, विश्वसनीयता और व्यावसायिक सामर्थ्य का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस मिशन ने विश्व स्तरीय विश्वसनीयता के साथ सबसे भारी पेलोड को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर नई ऊँचाइयों को छुआ है।

अपने संदेश में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में इसरो लगातार ऐसे कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जो भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक सशक्त, विश्वसनीय और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं। एलवीएम3-एम6 मिशन इसी निरंतर प्रगति का प्रमाण है, जिसमें भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा अब तक का सबसे भारी उपग्रह उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करने वाली भी है।
अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने प्रक्षेपण की सफलता की औपचारिक घोषणा करते हुए बताया कि एलवीएम3-एम6 प्रक्षेपण यान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित निम्न पृथ्वी कक्षा में अत्यंत सटीकता के साथ स्थापित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्वदेशी प्रक्षेपण यान के माध्यम से भारतीय धरती से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है और एलवीएम3 का तीसरा पूर्णतः वाणिज्यिक मिशन भी है। उनके अनुसार, यह मिशन प्रक्षेपण यान की असाधारण विश्वसनीयता और विश्वस्तरीय प्रदर्शन को रेखांकित करता है, जिससे भारत वैश्विक अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी देशों की पंक्ति में खड़ा होता दिखाई देता है।
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह अगली पीढ़ी के उपग्रह समूह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि बिना किसी विशेष या अतिरिक्त उपयोगकर्ता उपकरण के, सामान्य मोबाइल स्मार्टफोन को सीधे अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके। यह तकनीक दूरसंचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ पारंपरिक नेटवर्क की पहुँच सीमित या असंभव है।
यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए एक वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित किया गया। इस सहयोग के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए, बल्कि वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी एक भरोसेमंद प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में उभर रहा है। भारी-भारित उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण की क्षमता अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी देश की तकनीकी परिपक्वता और विश्वसनीयता का प्रमुख संकेतक मानी जाती है।
लॉन्च व्हीकल मार्क-3 की इस सफल उड़ान के साथ भारत ने जटिल और भारी मिशनों को अंजाम देने की अपनी क्षमता को पुनः सिद्ध किया है। इससे स्वदेशी प्रक्षेपण प्रणालियों में विश्वास और मजबूत हुआ है तथा वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि एलवीएम3-एम6 जैसी सफलताओं से भारत आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाओं, उपग्रह संचार और अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के क्षेत्र में और अधिक अवसर प्राप्त कर सकेगा।