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दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन ने मनाई विवेकानंद जयंती

दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन ने प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विवेकानंद जयंती के अवसर पर एनडीएमसी के विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए ‘युवा शक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में विवेकानंद के विचारों की भूमिका’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही वरिष्ठ गीतकार इंदिरा मोहन ने कहा कि विवेकानंद के विचारों में व्यक्ति और व्यक्तित्व निर्माण के गुण कालजयी रूप से विद्यमान हैं। उनके विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। इस अवसर पर सारस्वत अतिथि के रूप में बाल साहित्यकार रिंकल शर्मा ने स्वामी विवेकानंद से जुड़े एक प्रेरक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी जी का ओजस्वी व्यक्तित्व और उनके विचार आज भी जीवन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के अमर संदेश “उठो, जागो और अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक निर्भयता के साथ लगे रहो” को जीवन का सशक्त मंत्र बताया।

उन्होंने कहा कि दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने स्वामी विवेकानंद के इस प्रेरक सूत्र को अपने कार्यों में आत्मसात कर हिंदी के विकास और विस्तार की दिशा में निरंतर सार्थक प्रयास किए हैं। यह संस्थान की वैचारिक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और भाषा के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है।

इस अवसर पर सम्मेलन के महामंत्री प्रो हरीश अरोड़ा ने स्वामी विवेकानंद की विचारणा को युवाओं के लिए ही नहीं बल्कि प्रत्येक वर्ग के लिए प्रेरणाप्रद बताता। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार भारतीय जीवन दर्शन की महान विरासत को गति देते हैं। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या मीनाक्षी कौशिक ने सम्मेलन के इस महती प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे युवाओं के व्यक्तित्व को प्रभावी बनाने में विशेष भूमिका रही।

इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक आचार्य अनमोल ने कार्यक्रम की योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्षों से इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को भारत के महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर स्वयं को उनके जीवन के समान बनाने का अवसर प्रदान करना है। प्रतियोगिता के निर्णायकों में सुनील विज तथा सुधा शर्मा पुष्प ने बताया कि प्रतिभागियों के विचार सच में उनकी प्रतिभा को लक्षित करते हैं। इस अवसर पर 50 प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया। विद्यालय के विभिन्न प्राध्यापकों ने इस कार्य में अपना सहयोग प्रदान किया।

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