केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने मानव रचना शैक्षणिक संस्थानों (एमआरईआई) के दीक्षांत समारोह 2025-26 को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों से राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया। यह समारोह शैक्षणिक गरिमा, उत्साह और उपलब्धियों के माहौल में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विषयों के हजारों छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

अपने संबोधन में श्री नड्डा ने दीक्षांत समारोह को वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, समर्पण और निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहां से युवा पेशेवर समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रों को सशक्त मूल्यों, नैतिक आचरण और जनसेवा की भावना को अपने जीवन का आधार बनाने की सलाह दी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्नातक होने वाले युवाओं को अमृतकाल के दूसरे चरण में अपने करियर की शुरुआत करने का अवसर मिल रहा है, जो वर्ष 2047 तक जारी रहेगा। यह वह अवधि है जब भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने युवाओं से अपार अवसरों के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को समझने और देश की प्रगति में सार्थक योगदान देने का आग्रह किया।
पिछले ग्यारह वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि पहले जहां देश में केवल छह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इससे देशभर में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है, जो आम नागरिकों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से लेकर संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण तक, स्वास्थ्य के लगभग सभी प्रमुख सूचकों में भारत ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। संस्थागत प्रसव की दर 78 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है, जबकि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में वैश्विक औसत की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक गिरावट दर्ज की गई है।
तपेदिक उन्मूलन के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की प्रगति को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि टीबी मामलों में गिरावट की दर वैश्विक औसत से दोगुनी रही है। साथ ही, विश्व की लगभग एक-छठी जनसंख्या भारत में रहने के बावजूद मलेरिया से होने वाली मृत्यु दर घटकर 0.6 प्रतिशत रह गई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
श्री नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और व्यापक जनसंख्या स्क्रीनिंग कार्यक्रमों जैसी पहलों ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाया है। इन योजनाओं के प्रभाव से स्वास्थ्य पर जेब से होने वाला खर्च 62 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत तक आ गया है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिली है।
भविष्य की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने छात्रों से सेवा वितरण में गुणवत्ता और व्यापकता बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि देश की विशाल जनसंख्या की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कुशल, संवेदनशील और जिम्मेदार पेशेवरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
केंद्रीय मंत्री ने छात्रों की सफलता में अभिभावकों, शिक्षकों, संस्थागत नेतृत्व और सहायक कर्मचारियों के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की उपलब्धि सामूहिक प्रयासों का परिणाम होती है और इस सहयोग की भावना को जीवनभर याद रखना चाहिए।
अपने संबोधन के समापन में श्री नड्डा ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे हमेशा यह स्मरण रखें कि उनकी सफलता में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए उन्हें निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हुए सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर मानव रचना अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान एवं अध्ययन संस्थान और मानव रचना विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रशांत भल्ला ने स्नातकों को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार आधारित शिक्षा, उद्योग सहयोग और वैश्विक अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने छात्रों को पेशेवर सफलता के साथ सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने तथा नैतिक मूल्यों पर दृढ़ रहने के लिए प्रेरित किया।
समारोह के दौरान समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कई विशिष्ट व्यक्तियों को मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। इनमें न्यायमूर्ति गीता मित्तल, बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयासी सिंह, भारतीय चिकित्सा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक तथा माल्टा गणराज्य के उप प्रधानमंत्री और विदेश एवं पर्यटन मंत्री डॉ. इयान बोर्ग शामिल रहे।
दीक्षांत समारोह में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कानून, शिक्षा, विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न विषयों के कुल 2,150 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 521 स्नातक, 58 स्नातकोत्तर और 11 डॉक्टरेट शोधार्थी शामिल थे। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन और असाधारण उपलब्धियों के लिए मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और अन्य शैक्षणिक पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।