भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 05 फरवरी 2026 को ओमान के सलालाह बंदरगाह पर अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह पड़ाव जहाज की दस महीने लंबी महासागरीय यात्रा ‘लोकायन 26’ का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सद्भाव को बढ़ावा देना है।

इस यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने रॉयल नेवी ऑफ ओमान के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल ग़ैलेनी तथा रॉयल नेवी ऑफ ओमान के जहाज ‘अल मोज़ेर’ के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी से औपचारिक मुलाकात की। इन संवादों में भारत और ओमान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक समुद्री संबंधों पर विशेष बल दिया गया। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, पेशेवर सहयोग और आपसी विश्वास को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पोर्ट कॉल के दौरान पेशेवर आदान-प्रदान को आगे बढ़ाते हुए आईएनएस सुदर्शिनी पर रॉयल नेवी ऑफ ओमान के अधिकारियों के लिए विशेष भ्रमण का आयोजन किया गया। इस पहल ने दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन समझ को बढ़ाने के साथ-साथ प्रशिक्षण और समुद्री परंपराओं के साझा अनुभव का अवसर प्रदान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की यात्राएं रक्षा कूटनीति का प्रभावी माध्यम बनती हैं और समुद्री साझेदारी को नई दिशा देती हैं।
जनसंपर्क और सांस्कृतिक जुड़ाव के तहत सेल ट्रेनिंग शिप को आम आगंतुकों के लिए भी खोला गया। स्कूल के बच्चों सहित 600 से अधिक आगंतुकों ने इस तीन मस्तूल वाले बार्क का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और पारंपरिक नौकायन की जटिलताओं तथा समुद्री जीवन की बारीकियों को समझा। इस पहल ने न केवल भारत की समुद्री परंपरा को प्रदर्शित किया, बल्कि युवा पीढ़ी में समुद्री जागरूकता और रुचि को भी प्रोत्साहित किया।
‘लोकायन 26’ भारतीय नौसेना की उस व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जिसके माध्यम से भारत अपने समुद्री इतिहास, प्रशिक्षण उत्कृष्टता और वैश्विक मैत्री के संदेश को विभिन्न देशों तक पहुंचा रहा है। आईएनएस सुदर्शिनी, जो अपनी विशिष्ट संरचना और प्रशिक्षण भूमिका के लिए जानी जाती है, लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुद्री अभियानों में भारत का प्रतिनिधित्व करती रही है। यह जहाज केवल एक प्रशिक्षण मंच नहीं, बल्कि भारत की समुद्री पहचान और कूटनीतिक पहुंच का प्रतीक भी है।