NEW English Version

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शिक्षा मंत्रालय का विशेष सत्र: ‘भारत में एआई का दायरा बढ़ाना’ पर व्यापक मंथन

शिक्षा मंत्रालय ने भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत ‘शिक्षा मंत्रालय – भारत में एआई का दायरा बढ़ाना’ विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में शिक्षा, कौशल, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के संगम पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकृत और जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक विचार विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। शिक्षा तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री जयंत चौधरी ने भी सत्र में सहभागिता की। इसके अतिरिक्त स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव श्री संजय कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि, विभिन्न आईआईटी के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, शोधकर्ता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र में एआई आधारित समाधान विकसित करने वाले प्रमुख स्टार्टअप संस्थापक उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उस दूरदर्शी पहल का विस्तार बताया, जिसका उद्देश्य देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को गति देना और वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि तीव्र तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में विश्व की दृष्टि भारत की ओर है, क्योंकि भारत एआई को तेजी से अपनाते हुए उसे शिक्षा, प्रशासन और उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में लागू कर रहा है।

श्री प्रधान ने विश्वास व्यक्त किया कि एआई भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने युवाओं की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि आज का भारतीय युवा नवाचार, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के प्रति अधिक सजग और सक्रिय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा में एआई और एआई में शिक्षा परस्पर पूरक हैं। उनके अनुसार, छात्रों और युवा पेशेवरों को एआई को केवल एक उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि परिवर्तन के माध्यम के रूप में अपनाना चाहिए।

श्री जयंत चौधरी ने सत्र को ज्ञानवर्धक और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप शिक्षा के विभिन्न आयामों में एआई के सुव्यवस्थित एकीकरण पर गंभीर चर्चा हुई। इसमें मूलभूत शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व के संदर्भ में एआई की भूमिका को रेखांकित किया गया। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय और स्किल इंडिया के पवेलियन का भी उल्लेख किया, जहां व्यावहारिक और विस्तार योग्य एआई समाधान प्रदर्शित किए गए, जो नीतिगत दृष्टि को जमीनी प्रभाव में रूपांतरित करने की क्षमता रखते हैं।

पिछले एक दशक में शिक्षा मंत्रालय ने डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत ढांचे और संस्थागत सुधारों के माध्यम से एआई सक्षम शिक्षा की मजबूत नींव रखी है। राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफार्मों का विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, पाठ्यक्रम में तकनीकी एकीकरण और उन्नत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहे हैं। पिछले वर्ष की बजट घोषणा के बाद आईआईटी मद्रास में शिक्षा के लिए एआई उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना भी इसी क्रम का हिस्सा है।

मंत्रालय ने शिक्षा में एआई के एकीकरण के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार करने हेतु शिक्षाविदों, उद्योग, नागरिक समाज और सरकारी निकायों के साथ व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई है। हाल ही में मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में एआई स्टार्टअप के संस्थापकों के साथ संवाद किया और दो दिवसीय भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026 की अध्यक्षता की, जिसका उद्देश्य जिम्मेदार एआई आधारित परिवर्तन को आगे बढ़ाना था।

सत्र के पैनल में शिक्षा, उद्योग और निवेश क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ शामिल रहे। इनमें डॉ. श्रीधर वेम्बु, डॉ. विभू मित्तल, श्री राजन आनंदन, प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल, प्रोफेसर वी. कामकोटि और प्रोफेसर सुनीता सरावगी जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल थे। सत्र का संचालन आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रोफेसर मनोज एस. गौर ने किया।

चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि भारत की यात्रा केवल नीतिगत घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना, उत्कृष्टता केंद्रों, शिक्षक प्रशिक्षण और उद्योग सहयोग के माध्यम से बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है। शासन ढांचे, राष्ट्रीय शिक्षण मंचों और स्वदेशी एआई नवाचारों को समन्वित कर शिक्षा के परिणामों को बेहतर बनाने की रणनीति पर विस्तृत विचार हुआ। विशेष रूप से यह रेखांकित किया गया कि अलग थलग परियोजनाओं के बजाय समेकित और संरचित कार्यक्रम ही स्थायी और राष्ट्रव्यापी प्रभाव सुनिश्चित कर सकते हैं।

सत्र का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में एआई के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक कार्ययोजना पर विचार करना तथा उद्योग, शिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना था। समापन के साथ यह संदेश स्पष्ट हुआ कि भारत एआई को केवल तकनीकी प्रवृत्ति के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार और ज्ञान अर्थव्यवस्था के निर्माण के केंद्रीय साधन के रूप में देख रहा है।

Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »