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पूर्वोत्तर में शांति और विकास का नया परिदृश्य स्पष्ट: गुवाहाटी में डॉ. जितेंद्र सिंह का संबोधन

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में वर्ष 2014 के बाद जो परिवर्तन आए हैं, वे आज जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन बदलावों की वास्तविक गहराई को वही लोग बेहतर समझ सकते हैं जिन्होंने पहले की परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा है।

पूर्वोत्तर में शांति और विकास का नया परिदृश्य स्पष्ट: गुवाहाटी में डॉ. जितेंद्र सिंह का संबोधन

डॉ. सिंह गुवाहाटी में आयोजित एक सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला का आयोजन पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने असम सरकार के सहयोग से किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ जन प्रतिनिधि, राज्य प्रशासन के अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक सहित बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधि तथा सेवानिवृत्ति के निकट पहुंचे कर्मचारी उपस्थित रहे। यह इस वर्ष असम में आयोजित दूसरा ऐसा कार्यक्रम था, जो राज्य सरकार के प्रशासनिक सहयोग और समन्वय को रेखांकित करता है।

शांति और विकास का परस्पर संबंध

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विकास और शांति एक दूसरे के पूरक हैं। जब शांति स्थापित होती है तो विकास की गति तेज होती है, और जब विकास का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचता है तो वह शांति को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में पिछले दशक में जो बुनियादी ढांचा विस्तार हुआ है, वह इस परस्पर संबंध का प्रमाण है।

उन्होंने गुवाहाटी और शिलांग के बीच बेहतर सड़क संपर्क, उन राज्यों तक रेल सेवाओं का विस्तार जहां पहले रेल संपर्क नहीं था, नए हवाई अड्डों का निर्माण, भूपेन हजारिका पुल जैसे महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया। उनके अनुसार ये सभी पहलें पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने और क्षेत्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्राथमिकता देना और विकास परियोजनाओं की व्यक्तिगत समीक्षा के लिए बार-बार दौरा करना इस परिवर्तन के प्रमुख कारकों में रहा है।

पेंशन सुधारों पर सरकार का नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और स्वास्थ्य मानकों में सुधार के कारण देश में पेंशनभोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श पहल का उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को उनके अगले जीवन चरण के लिए तैयार करना है, ताकि उनका अनुभव और विशेषज्ञता राष्ट्र निर्माण में उपयोग हो सके।

उन्होंने कहा कि आज 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले अनेक कर्मचारी अपने स्वास्थ्य और पेशेवर क्षमता के उच्च स्तर पर होते हैं। इसलिए उनकी ऊर्जा और अनुभव समाज के लिए उपयोगी संपदा हैं।

पिछले दशक में किए गए पेंशन सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पहले पेंशनभोगियों को कई जटिल प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता था, जिसके कारण भुगतान में देरी होती थी। अब अधिकांश प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है और सेवानिवृत्ति से काफी पहले आवश्यक दस्तावेज तैयार कर लिए जाते हैं।

सीसीएस (पेंशन) नियमों को सरल और तर्कसंगत बनाया गया है। विभिन्न रंगों वाले अलग-अलग प्रपत्रों को एकीकृत डिजिटल फॉर्म में परिवर्तित किया गया है। औपनिवेशिक काल के अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाया गया है।

डॉ. सिंह ने बताया कि अविवाहित, तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों को अब बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र बनाया गया है। इसके अतिरिक्त यदि किसी कर्मचारी की दस वर्ष की सेवा पूरी होने से पहले मृत्यु हो जाती है तो भी उसके परिवार को पेंशन का लाभ मिलेगा।

लापता कर्मचारियों के मामलों में पहले परिवारों को सात वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। इस नियम में संशोधन कर कठिनाइयों को कम किया गया है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पूर्व में कानून व्यवस्था संबंधी चुनौतियां रही हैं।

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और तकनीकी नवाचार

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान को उन्होंने जन आंदोलन की संज्ञा दी। देशभर में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और फेस रिकग्निशन तकनीक को शामिल किया गया है ताकि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में आने वाली कठिनाइयों का समाधान हो सके। लाखों पेंशनभोगी अब अपने मोबाइल उपकरणों के माध्यम से घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र जमा कर पा रहे हैं।

उन्होंने “भविष्य” पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पेंशन प्रक्रिया, पेंशन वितरण करने वाले बैंकों को एकल खिड़की प्रणाली में एकीकृत करने, नियमित पेंशन अदालतों के आयोजन तथा पेंशनभोगी कल्याण संघों को सुदृढ़ करने जैसे कदमों का भी उल्लेख किया। इन प्रयासों से दशकों से लंबित मामलों सहित अनेक शिकायतों का समाधान संभव हुआ है।

अनावश्यक नियमों की समाप्ति और सहभागी भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नए नियम बनाना नहीं, बल्कि उन पुराने और अप्रासंगिक नियमों को हटाना भी है जो वर्तमान सामाजिक संदर्भ में उपयुक्त नहीं रह गए हैं।

उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं को विकसित भारत की यात्रा का सक्रिय सहभागी मानें। सेवानिवृत्ति को जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए चरण की शुरुआत बताते हुए उन्होंने कहा कि अनुभवी नागरिकों की भूमिका सामाजिक मार्गदर्शन, प्रशासनिक परामर्श और सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण हो सकती है।

डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श पहल कर्मचारियों को अपने आगामी जीवन की स्पष्ट योजना बनाने में सहायक सिद्ध होगी और सरकार को भी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनके अनुभव का लाभ मिलता रहेगा।

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