10 मार्च सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स स्थापना दिवस-
हर वर्ष 10 मार्च को सीआईएसएफ स्थापना दिवस मनाया जाता है। 1969 में संसद के अधिनियम के तहत गठित सेंट्रल इंडस्ट्रीयल सिक्योरिटी फोर्स ने देश की औद्योगिक इकाइयों, हवाई अड्डों, मेट्रो नेटवर्क और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह दिवस केवल एक बल की वर्षगांठ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अवसंरचना की सुरक्षा के प्रति हमारे सामूहिक दायित्व का स्मरण भी है।
तेजी से विकसित हो रहे भारत में ऊर्जा संयंत्र, इस्पात कारखाने, परमाणु प्रतिष्ठान, बंदरगाह, तेल रिफाइनरी और सूचना प्रौद्योगिकी पार्क।ये सभी राष्ट्र की आर्थिक धुरी हैं। इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा किसी भी व्यवधान से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। सीआईएसएफ को प्रारंभ में सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक उपक्रमों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, परंतु समय के साथ इसकी जिम्मेदारियाँ व्यापक होती गईं। आज यह बल देश के प्रमुख हवाई अड्डों और दिल्ली मेट्रो जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं की सुरक्षा भी संभालता है।

आतंकवाद, साइबर खतरे, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ और आपदा प्रबंधन इन सभी क्षेत्रों में सीआईएसएफ की भूमिका विकसित हुई है। आधुनिक तकनीक, निगरानी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से यह बल सुरक्षा के नए मानक स्थापित कर रहा है। विशेष रूप से हवाई अड्डों पर यात्रियों की सुरक्षा और सुगमता के बीच संतुलन बनाना एक जटिल कार्य है, जिसे सीआईएसएफ कुशलता से निभा रहा है।
सीआईएसएफ केवल सशस्त्र सुरक्षा बल नहीं, बल्कि आपदा के समय सहायता और राहत कार्यों में भी सक्रिय रहता है। औद्योगिक दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं या आपात स्थितियों में इसकी तत्परता उल्लेखनीय रही है। इस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी लैंगिक समानता की दिशा में सकारात्मक संकेत है। महिला कर्मियों की तैनाती ने सुरक्षा व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाया है।
सुरक्षा और विकास का संबंध राष्ट्रीय विकास की गति तभी स्थिर रह सकती है, जब रणनीतिक संस्थान सुरक्षित हों। यदि ऊर्जा संयंत्र,परिवहन तंत्र या वित्तीय संस्थान असुरक्षित हों, तो आर्थिक प्रगति बाधित हो सकती है। सीआईएसएफ का कार्य इसलिए केवल पहरेदारी तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता की रक्षा से जुड़ा है।

