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रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट का अध्ययन: रहस्यमय अंतरिक्ष पिंडों से निकलने वाले ऊर्जा विस्फोटों की नई व्याख्या

ब्रह्मांड के अत्यंत ऊर्जावान और रहस्यमय पिंडों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के खगोलविदों ने एक अल्ट्रा-ल्यूमिनस एक्स-रे स्रोत (ULX) से उत्पन्न होने वाले दुर्लभ ऊर्जा विस्फोटों—जिन्हें ‘फ्लेयर’ कहा जाता है—का विस्तृत अध्ययन किया है। यह शोध न केवल इन विस्फोटों की प्रकृति को समझने में सहायक है, बल्कि सघन खगोलीय पिंडों की आंतरिक भौतिक प्रक्रियाओं पर भी नई रोशनी डालता है।

यह अध्ययन सर्पिल आकाशगंगा एम74 आकाशगंगा में स्थित ULX स्रोत M74 X-1 पर केंद्रित है, जिसे खगोल विज्ञान में लंबे समय से एक रहस्यमय और अत्यधिक ऊर्जावान प्रणाली के रूप में देखा जाता रहा है।

एक संचयित बाइनरी प्रणाली में एक सघन वस्तु के आसपास की भौतिक प्रणालियां।

अल्ट्रा-ल्यूमिनस एक्स-रे स्रोत: चरम भौतिकी की प्रयोगशाला

ULX वे खगोलीय तंत्र होते हैं जिनमें एक सघन पिंड—जैसे ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारा—अपने साथी तारे से पदार्थ खींचता है। इस प्रक्रिया को ‘अभिवृद्धि’ (Accretion) कहा जाता है और यह एक संचयकारी द्विआधारी तंत्र (Accreting Binary System) का निर्माण करती है।

इन प्रणालियों की विशेषता यह है कि ये तथाकथित एडिंगटन सीमा से कहीं अधिक चमक उत्पन्न कर सकती हैं—कभी-कभी 100 गुना तक। यह सीमा उस अधिकतम चमक को परिभाषित करती है, जिस पर विकिरण दबाव और गुरुत्वाकर्षण के बीच संतुलन बना रहता है।

डेटा और प्रेक्षण: दो दशकों का विश्लेषण

आरआरआई के पीएचडी शोधार्थी अमन उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने 2001 से 2021 के बीच के प्रेक्षणों का उपयोग किया, जो नासा की चंद्र एक्स-रे वेधशाला और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की XMM-Newton वेधशाला से प्राप्त हुए थे।

शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।

सघन वस्तु के डगमगाने से दृष्टि रेखा से प्रेक्षणों में अंतर उत्पन्न होता है।

फ्लेयरिंग व्यवहार: अनियमित लेकिन संरचित संकेत

इस ULX स्रोत की एक प्रमुख विशेषता है—तेजी से बदलती चमक।

  • फ्लेयर की अवधि: लगभग 30 मिनट
  • पैटर्न: दोहराव वाला, लेकिन अनिश्चित अंतराल पर

फ्लेयरिंग स्पेक्ट्रम के विश्लेषण में लगभग 1 किलो-इलेक्ट्रॉनवोल्ट (keV) के आसपास एक विशेष उभार पाया गया। यह संकेत करता है कि स्रोत से तीव्र विकिरण दबाव के कारण अभिवृद्धि डिस्क से पदार्थ बाहर की ओर ‘पवन’ (Outflow/Wind) के रूप में निकल रहा है।

दृष्टि कोण और ‘डगमगाती’ अभिवृद्धि डिस्क

शोध का सबसे रोचक निष्कर्ष यह है कि इस प्रणाली का व्यवहार केवल आंतरिक प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि दृष्टि कोण (Viewing Angle) से भी प्रभावित होता है।

  • फ्लेयरिंग अवस्था में:
    प्रणाली को उच्च झुकाव कोण से देखा गया, जहां पवन के माध्यम से अवलोकन होता है
  • गैर-फ्लेयरिंग अवस्था में:
    प्रणाली कम झुकाव कोण से दिखाई देती है, जहां सीधे केंद्रीय, उच्च-ऊर्जा क्षेत्र से फोटॉन प्राप्त होते हैं

इस विरोधाभास को समझाने के लिए शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण परिकल्पना प्रस्तुत की—अभिवृद्धि डिस्क का डगमगाना (Precession)

यह प्रक्रिया एक घूमते हुए लट्टू के समान है, जहां डिस्क अपनी धुरी पर हल्का झुकाव लेते हुए घूमती है। परिणामस्वरूप:

  • कभी पवन दृष्टि रेखा में आती है
  • कभी साफ दृश्य मिलता है
  • इससे चमक में अनियमित उतार-चढ़ाव उत्पन्न होता है

ब्लैक होल या न्यूट्रॉन तारा? नई बहस

पहले के अध्ययनों में इस स्रोत को मध्य-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल के रूप में वर्गीकृत किया गया था। हालांकि, आरआरआई टीम ने अद्यतन स्पेक्ट्रल मॉडल का उपयोग करते हुए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।

उन्होंने ‘डबल डिस्क ब्लैकबॉडी’ मॉडल का उपयोग किया, जो दर्शाता है कि:

  • अभिवृद्धि डिस्क में अलग-अलग तापमान क्षेत्र मौजूद हैं
  • बाहरी क्षेत्र अपेक्षाकृत ठंडा है
  • आंतरिक क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जावान और सक्रिय है

इस मॉडल के आधार पर:

  • वस्तु का द्रव्यमान लगभग सूर्य के द्रव्यमान का 7 गुना आंका गया
  • यह इसे तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की श्रेणी में रखता है

हालांकि, कुछ अवलोकन न्यूट्रॉन तारे के व्यवहार से भी मेल खाते हैं, जिससे यह संभावना खुली रहती है कि यह पिंड वास्तव में न्यूट्रॉन स्टार हो सकता है।

भविष्य की दिशा: स्पंदनों की खोज

शोधकर्ताओं का अगला लक्ष्य इस स्रोत से निकलने वाले स्पंदनों (Pulsations) की पहचान करना है।

  • यदि स्पंदन पाए जाते हैं, तो यह न्यूट्रॉन तारे की उपस्थिति की पुष्टि करेगा
  • इससे ULX स्रोतों की प्रकृति को समझने में एक महत्वपूर्ण प्रगति होगी

व्यापक वैज्ञानिक महत्व

यह अध्ययन कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:

  1. चरम भौतिकी की समझ
    • सुपर-एडिंगटन अभिवृद्धि प्रक्रियाएं
    • विकिरण और पदार्थ के जटिल अंतःक्रियाएं
  2. खगोलीय वर्गीकरण में सुधार
    • ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारे के बीच अंतर स्पष्ट करना
  3. प्रेक्षणीय तकनीकों का विकास
    • स्पेक्ट्रल विश्लेषण और दीर्घकालिक डेटा उपयोग
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