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ग्रामीण डाक सेवक समुदायों को जोड़ने और शासन को अंतिम छोर तक पहुंचाने की मजबूत कड़ी: डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर

केंद्रीय संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने तमिलनाडु के चेन्नई में आयोजित ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय डाक की ऐतिहासिक भूमिका और ग्रामीण भारत में उसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण डाक सेवक देश के दूरदराज क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और वास्तव में वे ग्रामीण भारत की धड़कन हैं।

डॉ. पेम्मासानी ने सम्मेलन में उपस्थित जीडीएस कर्मचारियों का स्वागत करते हुए कहा कि पत्रों और पार्सलों की डिलीवरी से लेकर सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं, आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसी सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कठिन मौसम परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण डाक सेवक निरंतर सेवा देकर ग्रामीण भारत में विश्वास का सेतु बने हुए हैं।

अपने संबोधन में राज्य मंत्री ने भारत में संगठित संचार प्रणालियों के लंबे इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मौर्य काल में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने शाही संदेशवाहक सेवा की स्थापना की थी, जबकि दक्षिण भारत में चोल, पांड्या और चेरा शासकों ने अपने क्षेत्रों में सुदृढ़ संदेश व्यवस्था विकसित की थी। आधुनिक डाक प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1774 में कलकत्ता में प्रधान डाकघर की स्थापना के साथ हुई और 1 अक्टूबर 1854 को भारतीय डाक ने अपने वर्तमान स्वरूप में कार्य प्रारंभ किया।

डॉ. पेम्मासानी ने ई कॉमर्स क्षेत्र में तेजी से बढ़ती संभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि भारतीय डाक के सामने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यापक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय डाक का पार्सल राजस्व एक हजार करोड़ रुपये से कम है, जबकि एक निजी कूरियर कंपनी लगभग छह हजार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करती है। उन्होंने कहा कि देश का लॉजिस्टिक्स बाजार लगभग 10 बिलियन डॉलर का है और वर्ष 2031 तक इसके 20 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने डाक कर्मचारियों से इन अवसरों का लाभ उठाने और सेवाओं के विस्तार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि दशकों तक भारतीय डाक देश में संचार की रीढ़ के रूप में कार्य करता रहा है। डाक सेवा के माध्यम से कानूनी दस्तावेज, धनादेश, समाचार पत्र और पुस्तकें लोगों तक पहुंचती थीं और दूरस्थ क्षेत्रों के परिवारों को जोड़ने का कार्य करती थीं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में डाकिया लोगों के लिए पत्र पढ़ने और लिखने में भी सहायता करता था और गांवों तथा बाहरी दुनिया के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता था।

राज्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारतीय डाक विश्व के सबसे बड़े डाक नेटवर्क में से एक का संचालन करता है। देशभर में लगभग चार लाख नियमित कर्मचारी और 2.5 लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवक 1.6 लाख से अधिक डाकघरों के माध्यम से सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, इंटरनेट और निजी कूरियर सेवाओं के विस्तार से लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, ऐसे में भारतीय डाक को लागत घटाने के बजाय नए अवसरों से राजस्व बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि ग्रामीण डाक सेवक शासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल अंतिम कड़ी नहीं बल्कि सरकारी सेवाओं की पहली कड़ी हैं, क्योंकि उनके बिना योजनाएं और सेवाएं गांवों तक नहीं पहुंच सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां निजी लॉजिस्टिक्स कंपनियां लाभ वाले क्षेत्रों में कार्य करती हैं, वहीं भारतीय डाक दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों सहित उन स्थानों तक सेवाएं पहुंचाती है जहां लोगों की जरूरत होती है।

उन्होंने तमिलनाडु डाक सर्कल के प्रदर्शन की भी सराहना करते हुए बताया कि कुल राजस्व के मामले में यह देश में दूसरे स्थान पर है।

राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मार्गदर्शन में डाक विभाग तेजी से आधुनिक और ग्राहक केंद्रित सार्वजनिक लॉजिस्टिक्स संगठन के रूप में विकसित हो रहा है। इस परिवर्तन के अंतर्गत तकनीकी उन्नयन और प्रबंधन सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि लगभग पांच हजार करोड़ रुपये के निवेश से आईटी 2.0 प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक तकनीकी उन्नयन किया जा रहा है। इसके तहत मेल और पार्सल की एंड टू एंड ट्रैकिंग, ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट, यूपीआई आधारित नकदी रहित भुगतान, जियोटैगिंग और एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

राज्य मंत्री ने डिजीपिन नामक नई पहल का भी उल्लेख किया। यह दस अंकों पर आधारित एक भू कोडित राष्ट्रीय पता प्रणाली है जो आपातकालीन सेवाओं, ई कॉमर्स, ड्रोन लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्रामीण डाक सेवकों के योगदान को ध्यान में रखते हुए संशोधित पारिश्रमिक व्यवस्था, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन, पदोन्नति के अवसर, प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्थानांतरण संबंधी सुविधाएं प्रदान की हैं।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. पेम्मासानी ने डाक कर्मचारियों से भारतीय डाक की समृद्ध विरासत को बनाए रखते हुए समर्पण और पेशेवर दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समय पर डाकघर खोलना, जिम्मेदारी के साथ डिलीवरी करना और बचत खातों तथा बीमा योजनाओं के माध्यम से लोगों को जोड़ना देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण डाक सेवकों के कंधों पर केवल चिट्ठियों का बोझ नहीं होता बल्कि देश का विश्वास भी होता है और भारतीय डाक आने वाले समय में भी देश को जोड़ने और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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