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नव संवत्सर की अरुणिम बेला: नव ऊर्जा से जगमगाए जीवन

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सुहानी, झंकृत रोम रोम कर जाए,
भारत भूमि के नवल वर्ष के शुभागमन से मन खिल जाए।

देहरी, आंगन, चौक पुराके, चलो सखि सब मिल मंगलगाएं
तोरण अपने द्वार लगाकर, हम अपना नव वर्ष मनाएं।

ले मन में स्नेह का नवांकुर,नव श्वासों का मलय बहे,
ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध को तजकर हम सब जग में मिलके रहें।

नव ऊर्जा और नव उमंग संग, मानव का कल्याण हो,
पद दलितों का उत्थान हो, नव आशा का संचार हो।

नवल गीत और नवल प्रीत से हर जीवन हो जाए तरंगित
नवल चाह और नव प्रवाह से हर जीवन हो जाए पुलकित।

नवल वर्ष की अरुणिम किरणें, लाएं सुखद, सुनहरा पल,
सुख के सुमन खिलें प्रति गृह में,जीवन ये हो जाए सरल।

हे नव वर्ष के प्रथम प्रभात, दो सबको अच्छी सौगात,
नैतिकता के मूल्य गढ़ें और नव इतिहास के पृष्ठ रचें।

नव उत्कर्ष,नवल उल्लास, नवल राह और नवल उजास,
नए वर्ष में नई पहल हो,सुखमय हर आंगन का कल हो !!!

स्मृति श्रीवास्तव
स्मृति श्रीवास्तव
अन्तर्ध्वनि
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