शीश झुकाकर नमन करें हम पूर्वजों की पावन आशीषों को जिन्होंने दिखलाया जीवन पथ मिटा के…
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दुर्गा स्तुति
जगजननी मां तुझे नमन है, भवतारिणी मां तुझे नमन। ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है, भयहारिणी मां तुझे…
हे ग्रीष्म! तुम्हें प्रणाम
हे तप्त सूर्य की स्वामिनी ! तुम हो ऊर्जा का अनन्य उद्गम। अपनी प्रखर ज्योति से…
मातृभूमि वंदन
हे जन्मदायिनी धरिणी जननि, हे जन्मभूमि, मातृभूमि, हम तुझको शीश नवाएं, हम गीत तेरे ही गाएं।
तमसो मां ज्योतिर्गमय
अंतहीन रजनी के तिमिर में नन्हीं दीपशिखा है प्रज्ज्वलित। अभिलाषाओं की चिंगारी गहन अंधेरे में भी…
मौसम ने बदला रंग
वर्षा ऋतु की मनोहारी छटा, प्रकृति का नव श्रृंगार, हरियाली, उमंग और कर्म का संदेश समेटती…