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श्रीलंका के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण का अध्ययन किया

श्रीलंका की संसद की इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रणनीतिक विकास संबंधी क्षेत्रीय निगरानी समिति का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत के एक सप्ताह के अध्ययन दौरे पर है। सांसद (अध्यक्ष) एस.एम. मारिक्कर के नेतृत्व में आए इस प्रतिनिधिमंडल ने पेयजल एवं स्वच्छता क्षेत्र में भारत की प्रमुख पहलों का अवलोकन किया।

इस क्रम में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय के तत्वावधान में, प्रतिनिधिमंडल के लिए जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण पर विस्तृत प्रस्तुति आयोजित की गई। कार्यक्रम में डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक के.के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक के.के. मीना ने अपने संबोधन में भारत के विकेंद्रीकृत प्रशासनिक मॉडल को रेखांकित करते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें ग्राम पंचायतों के माध्यम से सेवा वितरण सुनिश्चित करती हैं, जिससे समुदाय स्वयं जल एवं स्वच्छता सेवाओं का प्रबंधन कर सके। उन्होंने वर्ष 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन और वर्ष 2014 में प्रारंभ स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण की प्रमुख उपलब्धियों और उनसे प्राप्त अनुभवों को साझा किया।

उन्होंने चार प्रमुख सीखों पर बल दिया—ग्राम पंचायत आधारित विकेंद्रीकरण, विभागीय समन्वय, मोबाइल एप आधारित निगरानी एवं पारदर्शिता, तथा जल प्रबंधन में स्थिरता और सर्कुलर अर्थव्यवस्था का समावेश।

प्रस्तुति के दौरान जल जीवन मिशन के निदेशक हरि नारायणन मुरुगन ने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति में भारत की प्रगति और भारत-श्रीलंका सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रत्येक ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने की घोषणा के बाद मिशन की शुरुआत हुई। वर्तमान में देश के 82 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों तक नल का जल पहुंच चुका है, जो पहले लगभग 17 प्रतिशत था।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 मार्च 2026 को स्वीकृत जेजेएम 2.0 के तहत मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, जिसमें परिचालन एवं रखरखाव, जल गुणवत्ता प्रबंधन, डिजिटल डेटा प्रणाली और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण पर प्रस्तुति देते हुए उप सचिव कृतिका कुलहारी ने बताया कि अक्टूबर 2014 में प्रारंभ इस मिशन ने 2 अक्टूबर 2019 तक देश को खुले में शौच मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान 12 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया गया और अब मिशन का दूसरा चरण ओडीएफ प्लस की दिशा में कार्य कर रहा है, जिसमें ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया जा रहा है।

चर्चा सत्र के दौरान श्रीलंकाई प्रतिनिधियों ने जल स्रोतों में भारी धातुओं, विशेषकर पारे के उच्च स्तर को एक गंभीर चुनौती बताया और किफायती जल शोधन तकनीकों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पेयजल के बहुउद्देशीय उपयोग से बढ़ती लागत पर भी चिंता व्यक्त की और भारत से सस्ती एवं प्रभावी तकनीकी समाधान साझा करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक ने भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि ज्ञान साझा करने और सहयोग के माध्यम से भारत और श्रीलंका जल प्रबंधन एवं स्वच्छता के क्षेत्र में मजबूत साझेदारी विकसित कर सकते हैं।

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