महावीर जयंती पर लोक-धर्मोत्सव 2026 भव्य रूप से सम्पन्न
नई दिल्ली : केन्द्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भगवान महावीर की जन्मभूमि बिहार केवल जैन समाज की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की आस्था और शांति की भूमि है। इस भूमि से युद्ध एवं अशांति के इस माहौल में एक ऐसी क्रांति घटित होनी चाहिए, जो दुनिया में शांति, अहिंसा एवं प्रेम का माध्यम बने। श्री पासवान मुख्य अतिथि के रूप में तीर्थंकर भगवान महावीर के 2625वें जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर महावीरायतन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित लोक-धर्मोत्सव 2026 समारोह को संबोधित करते हुए बोल रहे थे। यह समारोह आज मावलंकर ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ। उन्होंने आगे कहा कि बिहार को अहिंसा और शांति की वैश्विक भूमि के रूप में स्थापित करने तथा भगवान महावीर की जन्मस्थली को एक भव्य अंतरराष्ट्रीय महातीर्थ के रूप में विकसित करने के लिए जैन समाज को संगठित और व्यापक प्रयास करने चाहिए। उन्होंने इस दिशा में सामूहिक पहल का आह्वान किया। इस अवसर पर अनेक केंद्रीय मंत्री, सांसद, संत-महात्मा, विद्वान, समाजसेवी एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह एवं “जियो और जीने दो” के संदेश को वर्तमान विश्व परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक बताया और स्वामी देवेन्द्र ब्रह्मचारी द्वारा जैन धर्म को जन धर्म बनाने की दिशा में प्रयासों की सराहना की।
राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा- “आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता के दौर से गुजर रही है, तब भगवान महावीर का अहिंसा और अनेकांत का संदेश मानवता के लिए सबसे बड़ा समाधान है। महावीर का दर्शन विश्व शांति की आधारशिला बन सकता है।” लोकप्रिय सांसद, प्रसिद्ध कलाकार एवं गायक मनोज तिवारी ने अपने गीतों के माध्यम से भगवान महावीर को श्रद्धासुमन अर्पित किए और कहा- “आज आवश्यकता बिहार से एक ऐसी अहिंसा और नैतिकता की क्रांति की है, जो केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को नई दिशा दे सके।” भारत विकास परिषद के महामंत्री श्री सुरेश जैन ने अपने वक्तव्य में कहा- “भगवान महावीर का अहिंसा, अनेकांत और शांति का संदेश केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है। इन सिद्धांतों को विश्वव्यापी बनाने की आवश्यकता है।”
महावीरायतन फाउंडेशन के संस्थापक स्वामी देवेन्द्र ब्रह्मचारी (गुरुजी) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भगवान महावीर का जीवन आत्मविजय, संयम और करुणा का महान उदाहरण है। उन्होंने कहा कि महावीर ने दुनिया को स्वयं पर विजय प्राप्त करने का मार्ग सिखाया। आज मनुष्य ने विज्ञान से दुनिया को जीत लिया, लेकिन अपने मन को नहीं जीत पाया, इसलिए अशांति और संघर्ष बढ़ रहे हैं। महावीर का मार्ग भीतर की शांति, संतुलन और सहअस्तित्व का मार्ग है। उन्होंने यह भी कहा कि अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं, बल्कि विचार, वाणी और व्यवहार में करुणा और संवेदना लाना है। सुखी परिवार फाउंडेशन के संस्थापक गणि राजेंद्र विजय जी महाराज भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात लेखक, पत्रकार एवं स्तंभकार ललित गर्ग द्वारा स्वामी देवेन्द्र ब्रह्मचारी पर लिखित पुस्तक “निर्गुण चदरिया” का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर ललित गर्ग ने कहा- “स्वामी देवेन्द्र ब्रह्मचारी केवल एक संत नहीं, बल्कि एक विचार, एक चेतना और एक आध्यात्मिक यात्रा का नाम हैं। ‘निर्गुण चदरिया’ एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि आत्मचेतना, साधना और मानवीय मूल्यों की यात्रा का दस्तावेज है।”
कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों-साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक सेवा एवं मानवीय सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक व्यक्तित्वों को “लोक सेवा रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में प्रमुख रूप से प्रख्यात समाजसेवी श्री धर्मेंद्र जैन, श्री चंद्र कुमार जाजोदिया, श्री मानिकलाल मूलचंद साह, श्री सुरेश पूनमिया, श्री मनोज जैन इशिका, श्री सोहन गिरी एवं उत्कृष्ट लेखन एवं समाज सेवा के लिए श्री ललित गर्ग शामिल थे।
समग्र रूप से लोक-धर्मोत्सव 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अहिंसा, शांति, परिवार, संस्कार और मानवीय मूल्यों का राष्ट्रीय उत्सव बनकर सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने भगवान महावीर के संदेश को नई पीढ़ी और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। यह आयोजन वास्तव में एक विचार, एक संस्कार और एक शांति-यात्रा का उत्सव बन गया, जिसने यह संदेश दिया कि विश्व को हथियारों से नहीं, बल्कि विचारों, अहिंसा और सहअस्तित्व से शांति मिल सकती है। कार्यक्रम का संयोजन आवाज के जादूगर अनुराग जैन ने किया। भारत की एकता और विविधता एवं महावीर के दर्शन को दर्शाते हुए अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए।