अलीगढ़ : माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन श्री योगी आदित्यनाथ जी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के क्रम में अलीगढ़ नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा द्वारा नगर निगम का वित्तीय नुकसान करने के एक गंभीर प्रकरण में कठोर कार्रवाई की गई है।
वित्तीय हानि पर कार्रवाई
नगर आयुक्त के आदेशों के क्रम में जोन संख्या-02 से संबंधित संपत्ति कर के एक मामले में नगर निगम को वित्तीय हानि पहुँचाने के आरोप सिद्ध होने पर गृहकर विभाग में तैनात आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप जैन की सेवाएँ तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं तथा उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई प्रारम्भ करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रकरण का विवरण
जोन-02 स्थित भवन संख्या-1/200 सी-8, मोहल्ला संजय गांधी कॉलोनी की संपत्ति कर की बकाया धनराशि ₹1,73,488 को बिना सक्षम अनुमति एवं नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किए बिना एडमिन आईडी का दुरुपयोग कर गलत तरीके से समाप्त (एडजस्ट) कर दिया गया। इस अनियमितता के कारण नगर निगम को वित्तीय क्षति हुई, जो कूटरचना, गबन एवं धोखाधड़ी की श्रेणी में आती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के निर्देश पर पूर्व में एक जांच समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा प्रस्तुत जांच आख्या में यह तथ्य सामने आया कि उक्त अनियमितता कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा एडमिन आईडी का अनुचित उपयोग कर की गई, जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कार्मिक के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि नगर निगम की वित्तीय प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्ट आचरण को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता के धन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है। दोषी पाए गए व्यक्ति के विरुद्ध सेवा समाप्ति के साथ-साथ विधिक कार्यवाही एवं एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस प्रकार की गलत गतिविधि करने का साहस न कर सके।
कार्यदाही कंपनी से 3 साल का डाटा तलब
उक्त प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा नगर निगम अलीगढ़ के संपत्ति कर विभाग में प्रयुक्त सॉफ्टवेयर के संचालन एवं डाटा अभिलेखन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संपत्ति कर विभाग के सॉफ्टवेयर का संचालन मैसर्स मार्सेलोस टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. से 3 साल का डाटा तलब किया है ।
नगर आयुक्त ने बताया कि संज्ञान में यह तथ्य आया है कि उक्त फर्म द्वारा सॉफ्टवेयर की वार्षिक बैकअप फाइलें नगर निगम में नियमित रूप से जमा नहीं कराई गईं जिसके कारण सॉफ्टवेयर के माध्यम से संपादित कार्यों का समुचित ऑडिट संभव नहीं हो पा रहा था। इस स्थिति से कार्यों की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न हुआ है। उक्त प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम द्वारा संबंधित फर्म को निर्देशित किया गया है कि पिछले तीन वर्षों का समस्त डाटा तत्काल नगर निगम को उपलब्ध कराया जाए। इस डाटा में संपत्ति कर से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अभिलेख जैसे रसीदों के रोल बैक, पोस्टिंग, नामांतरण, संशोधन तथा अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं का पूर्ण विवरण शामिल होना अनिवार्य होगा। उपलब्ध कराए जाने वाले डाटा की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाएगी।
नगर आयुक्त ने कहा माननीय मुख्यमंत्री महोदय की मंशा के अनुरूप भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतिशत अनुश्रवण सुरक्षित करने लिए नगर निगम पूर्ण रूप से वचनबद्ध है नगर निगम के सभी विभागों को सतर्क रहने तथा राजस्व संबंधी कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।