अमेरिका–इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को 30 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को झकझोर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति को भी प्रभावित किया है। ताजा घटनाक्रम इस युद्ध को और अधिक खतरनाक मोड़ पर ले जाता दिखाई दे रहा है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी जंगी जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमला किया, जिसके बाद उसे अपनी पोजिशन बदलनी पड़ी। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि ईरान अब सीधे अमेरिकी सैन्य ताकत को चुनौती देने के मूड में है। ईरानी नौसेना ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी बेड़ा उसकी मिसाइल रेंज में दोबारा आता है, तो और भी बड़े हमले किए जाएंगे।

दूसरी ओर, इजराइल की ओर से आक्रामक रुख जारी है। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज के अनुसार, अब तक ईरान पर लगभग 15,000 से अधिक बम गिराए जा चुके हैं। यह आंकड़ा इस युद्ध की भयावहता और व्यापकता को दर्शाता है। लगातार हो रहे हमलों ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।
ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध का अंत केवल उसकी शर्तों और समय के अनुसार ही होगा। इसके लिए उसने पांच प्रमुख शर्तें भी सामने रखी हैं, जो उसके आत्मविश्वास और रणनीतिक सोच को दर्शाती हैं। यह स्थिति शांति वार्ता की संभावनाओं को फिलहाल कमजोर बनाती है।
इसी बीच एक राहत भरी खबर यह है कि ईरान ने भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन देशों को “मित्र राष्ट्र” बताते हुए कहा कि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि केवल उन देशों के लिए प्रतिबंधित है जो ईरान के खिलाफ हैं। यह कदम ईरान की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए वह अपने मित्र देशों का समर्थन बनाए रखना चाहता है।
इस युद्ध का भारत पर बहुआयामी प्रभाव पड़ रहा है। सबसे पहले, ऊर्जा सुरक्षा की बात करें तो भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। हालांकि भारत को फिलहाल इस रास्ते से गुजरने की अनुमति मिली है, लेकिन युद्ध के चलते यहां किसी भी समय खतरा बढ़ सकता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतों में उछाल आ सकता है।
दूसरा बड़ा असर भारत की कूटनीति पर पड़ रहा है। भारत के अमेरिका, इजराइल और ईरान तीनों देशों के साथ रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में इस युद्ध में संतुलन बनाए रखना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत अब तक तटस्थ रुख अपनाते हुए शांति और संवाद की अपील करता रहा है, लेकिन परिस्थितियां जटिल होती जा रही हैं।

