NEW English Version

पेट का मोटापा बना उभरता ‘साइलेंट रिस्क’: सामान्य दिखने वाले शरीर में भी छिपा हो सकता है गंभीर खतरा

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेट या शरीर के मध्य भाग में जमा वसा को एक गंभीर और स्वतंत्र स्वास्थ्य जोखिम करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य मोटापे की तुलना में ‘सेंट्रल ओबेसिटी’ यानी पेट के आसपास की चर्बी अधिक खतरनाक है, विशेषकर भारतीय जनसंख्या में, जहां देखने में दुबले-पतले व्यक्तियों में भी आंतरिक वसा (विसरल फैट) का स्तर अधिक पाया जाता है।

यह विचार उन्होंने “एडवांसेज इन ओबेसिटी एंड लिपिड मैनेजमेंट इन सीवीडी” शीर्षक से प्रकाशित एक महत्वपूर्ण कार्डियोलॉजी पाठ्यपुस्तक के विमोचन अवसर पर व्यक्त किए। इस अवसर पर देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित हृदय रोग विशेषज्ञ और चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेट का मोटापा केवल सौंदर्य का विषय नहीं है, बल्कि यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, फैटी लिवर और डिस्लिपिडेमिया जैसे गंभीर चयापचय विकारों का प्रमुख कारण बन सकता है। उन्होंने इस तथ्य पर विशेष बल दिया कि कई बार व्यक्ति का वजन सामान्य होने के बावजूद पेट के भीतर जमा वसा उसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की श्रेणी में ला सकता है।

भारतीय शारीरिक संरचना की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में ‘लीन फैट’ यानी बाहर से सामान्य दिखने वाले लेकिन अंदर से अधिक वसा वाले व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि इससे कम उम्र में ही हृदय संबंधी बीमारियों और टाइप-2 मधुमेह के मामले बढ़ रहे हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि पेट की चर्बी और फैटी लिवर, इंसुलिन प्रतिरोध तथा हृदय रोगों के बीच संबंध को लेकर अब पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। उन्होंने बदलती जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि में कमी को इन बढ़ती समस्याओं का प्रमुख कारण बताया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मोटापा मुक्त भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में संतुलित आहार, कम तेल और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन तथा नियमित व्यायाम को अपनाएं।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि फिटनेस के नाम पर अत्यधिक और अवैज्ञानिक प्रयास भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। बिना उचित तैयारी और आराम के अत्यधिक शारीरिक परिश्रम शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक रूप से निर्देशित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नियमित स्वास्थ्य जांच को आवश्यक बताया।

इस अवसर पर विमोचित पुस्तक, जिसे प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एच.के. चोपड़ा द्वारा संपादित किया गया है, में 300 से अधिक विशेषज्ञों के शोध और अनुभव को संकलित किया गया है। यह पुस्तक पारंपरिक उपचार पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए सटीक और व्यक्तिगत चिकित्सा (प्रिसिजन मेडिसिन) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पुस्तक में लिपिड प्रबंधन और मोटापे के उपचार के लिए उभरती चिकित्सा तकनीकों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें सेमाग्लूटाइड और तिरज़ेपाटाइड जैसे आधुनिक जीएलपी-1 आधारित उपचारों के साथ-साथ स्टेटिन, एज़ेटिमिब, पीसीके9 अवरोधक, इन्क्लिसिरन और जीन आधारित चिकित्सा पद्धतियों का भी उल्लेख है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रगतियों से हृदय रोगों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुस्तक की प्रस्तावना में मोटापा और डिस्लिपिडेमिया को वैश्विक स्तर पर उभरती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह समस्या स्वास्थ्य तंत्र के साथ-साथ आर्थिक संरचना पर भी भारी दबाव डाल सकती है।

उन्होंने 2050 तक भारत में मोटापे की दर में संभावित वृद्धि के अनुमानों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अभी से ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने जागरूकता अभियान, प्रारंभिक जांच और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

23 खंडों और 172 अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक चिकित्सा शोध और व्यावहारिक उपचार के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह ग्रंथ चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में स्थापित होगा।

कार्यक्रम में डॉ. विवेका कुमार, डॉ. प्रवीण चंद्र, डॉ. जेपीएस साहनी, डॉ. मोना भाटिया, डॉ. अनु ग्रोवर सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया और इसे चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान बताया।

Book Showcase

Best Selling Books

Ikigai: The Japanese secret to a long and happy life

By Héctor García, Francesc Miralles

₹318

Book 2 Cover

Why I am an Atheist and Other Works

By Bhagat Singh

₹104

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

Until Love Sets Us Apart

By Aditya Nighhot

₹176

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »