भारत की समुद्री क्षमता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज करते हुए, मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज (MoPSW) ने कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (KOICA) के साथ भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने हेतु एक व्यापक कार्यान्वयन योजना पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल देश के दीर्घकालिक समुद्री दृष्टिकोण ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

परियोजना, जिसका शीर्षक ‘भारतीय शिपबिल्डिंग और मरीन सेक्टर के लिए कुशल एवं पेशेवर प्रतिभाओं की नींव तैयार करने और विकास रणनीतियों की स्थापना का समर्थन’ है, देश के समुद्री उद्योग को रणनीतिक दृष्टि से सुदृढ़ बनाने पर केंद्रित है। इस पहल के तहत कार्यबल मैपिंग, कौशल अंतर (स्किल गैप) का विश्लेषण, और मानव संसाधन विकास के लिए एक सुदृढ़ मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर कार्यान्वयन योग्य रोडमैप विकसित किया जाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने कहा कि यह साझेदारी भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक निर्णायक क्षण है। उन्होंने इसे भविष्य-उन्मुख, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि Narendra Modi के नेतृत्व में भारत समुद्री क्षेत्र को आर्थिक विकास और रणनीतिक शक्ति के प्रमुख आधार के रूप में विकसित कर रहा है।
इस सहयोग के अंतर्गत, कोइका, कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग तथा अन्य संस्थागत भागीदारों के साथ मिलकर भारतीय शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्षेत्रों पर व्यापक अध्ययन करेगा। इस अध्ययन का उद्देश्य उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास रणनीतियों को तैयार करना है, जिससे रोजगार सृजन और उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
परियोजना के अंतर्गत भारत और गणतंत्र कोरिया में द्विपक्षीय कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिनमें नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। इन कार्यशालाओं के माध्यम से सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं का आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, MoPSW और Korea International Cooperation Agency के बीच ‘शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर’ की स्थापना को लेकर चर्चा अंतिम चरण में है। प्रस्तावित केंद्र उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता में वृद्धि तथा उन्नत कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिपबिल्डिंग सेक्टर की उत्पादकता और गुणवत्ता को सुदृढ़ करेगा।