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नई दिल्ली में आईएसओ की अंतरराष्ट्रीय उपसमिति की ऐतिहासिक बैठक आयोजित

भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और वैश्विक मानकीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) की उपसमिति “आईएसओ टीसी 20/एससी 14 — अंतरिक्ष प्रणाली और संचालन” की 35वीं प्लेनरी तथा कार्य समूह बैठकों की मेजबानी की। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा आयोजित यह उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय बैठक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में संपन्न हुई, जिसमें दुनिया के अनेक देशों से आए विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

यह आयोजन केवल एक तकनीकी सम्मेलन भर नहीं था, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष शासन, मानकीकरण और सहयोगात्मक अंतरिक्ष विकास में भारत की बढ़ती भागीदारी का स्पष्ट संकेत भी बनकर सामने आया। ऐसे समय में जब अंतरिक्ष गतिविधियां तेजी से व्यावसायिक, रणनीतिक और बहु-हितधारक स्वरूप ग्रहण कर रही हैं, भारत की यह मेजबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी बढ़ती तकनीकी विश्वसनीयता और नेतृत्व क्षमता को रेखांकित करती है।

अंतरिक्ष मानकों के माध्यम से सुरक्षित और सतत भविष्य की दिशा

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव सुश्री निधि खरे ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष गतिविधियों के विस्तार के बीच साझा मानकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विकसित मानक अंतरिक्ष को सुरक्षित, सतत और समावेशी बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

सुश्री खरे ने कहा कि भारत के लिए इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करना गर्व का विषय है, क्योंकि देश आज वैश्विक अंतरिक्ष परिवर्तन के प्रमुख केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों तथा आईएन-एसपीएसीई जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं ने देश में एक ऐसा वातावरण तैयार किया है, जहां स्टार्टअप, निजी उद्योग और अनुसंधान संस्थान समान रूप से विकसित हो सकते हैं।

उनके अनुसार, भविष्य का अंतरिक्ष क्षेत्र केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह बहुस्तरीय साझेदारी, निजी निवेश और वैश्विक सहयोग पर आधारित होगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मानकों का निर्माण और उनका अनुपालन विश्वसनीयता तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मानकीकरण से वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई दिशा

भारतीय मानक ब्यूरो के महानिदेशक श्री संजय गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और इस परिवर्तन को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने में मानकीकरण की केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने कहा कि बीआईएस भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है, ताकि देश का अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज भारत में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे प्रक्षेपण सेवाओं, उपग्रह निर्माण, डेटा सेवाओं तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में वैश्विक अवसरों की ओर अग्रसर हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करना केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक अनिवार्यता भी बन चुका है।

श्री गर्ग ने कहा कि भारत में इस बैठक का आयोजन भारतीय विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। इससे न केवल राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक मानकों के निर्माण में भारत की सक्रिय भूमिका भी सुनिश्चित होगी।

आईएन-एसपीएसीई और निजी भागीदारी से बदलता भारतीय अंतरिक्ष परिदृश्य

आईएन-एसपीएसीई के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे संरचनात्मक परिवर्तन को रेखांकित करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में नीतिगत सुधारों और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी ने देश के अंतरिक्ष इकोसिस्‍टम को नई गति प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि मजबूत और स्पष्ट मानक नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं, उद्योग में विश्वास पैदा करते हैं और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं। उनके अनुसार, भारत अब केवल सरकारी अंतरिक्ष अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक व्यापक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें स्टार्टअप, विनिर्माण कंपनियां, डेटा सेवा प्रदाता और अनुसंधान संस्थान समान रूप से भागीदार हैं।

13 देशों के प्रतिनिधियों ने की भागीदारी

इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में 13 देशों के 131 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न राष्ट्रीय मानक निकायों के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद और वैज्ञानिक शामिल थे। भारत की ओर से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सहित कई संस्थानों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

उद्घाटन सत्र में बीआईएस की उप महानिदेशक (मानकीकरण) सुश्री रीना गर्ग, आईएसओ टीसी 20/एससी 14 के अध्यक्ष श्री फ्रेडरिक स्लेन तथा एयर एंड स्पेस व्हीकल्स संबंधी बीआईएस समिति टीईडी 14 के अध्यक्ष श्री राजीव ज्योति भी उपस्थित रहे।

अंतरिक्ष प्रणाली के संपूर्ण जीवनचक्र के लिए विकसित होते हैं मानक

आईएसओ टीसी 20/एससी 14 अंतरिक्ष प्रणालियों और संचालन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के लिए कार्यरत प्रमुख उपसमिति है। यह उपसमिति अंतरिक्ष प्रणालियों के डिजाइन, निर्माण, परीक्षण, प्रक्षेपण, संचालन और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं तक पूरे जीवनचक्र के लिए मानक तैयार करती है।

इन मानकों का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, अंतर-संचालनीयता और सततता सुनिश्चित करना है, ताकि विभिन्न देशों और संस्थाओं द्वारा संचालित अंतरिक्ष गतिविधियां समन्वित और सुरक्षित तरीके से संचालित हो सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में अंतरिक्ष कचरे की बढ़ती समस्या, उपग्रहों की भीड़, अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन तथा दीर्घकालिक मिशन संचालन जैसी चुनौतियां वैश्विक सहयोग और मानकीकरण को और अधिक महत्वपूर्ण बना देंगी। भारत की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में उसकी दूरदर्शी रणनीति को दर्शाती है।

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