लखनऊ। वरिष्ठ लेखक लव भार्गव की पुस्तक ‘एक अनोखी दास्तान’ केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि इतिहास, विरासत, संघर्ष, संस्कृति और आत्मअन्वेषण का ऐसा जीवंत दस्तावेज है, जिसमें एक व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ बदलते भारतीय समाज और समय की भी तस्वीर दिखाई देती है।
पुस्तक की शुरुआत लेखक के गौरवशाली पारिवारिक इतिहास से होती है। महान प्रकाशक मुंशी नवल किशोर की विरासत से जुड़े परिवार की कहानी भारतीय प्रकाशन जगत के स्वर्णिम इतिहास से पाठकों को परिचित कराती है। नवल किशोर प्रेस की स्थापना, भारतीय भाषाओं में महत्वपूर्ण ग्रंथों के प्रकाशन तथा साहित्यिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख पुस्तक को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।
‘बचपन की फुसफुसाहटें’ अध्याय में लखनऊ की तहजीब, पारिवारिक वातावरण, विशाल हवेली, पुराने नौकरों, ऐतिहासिक प्रिंटिंग प्रेस, स्कूल जीवन, पारिवारिक संबंधों और बचपन की भावनात्मक स्मृतियों का अत्यंत आत्मीय चित्रण किया गया है। लेखक की सहज शैली पाठक को उनके बचपन के दौर में ले जाती है और पारिवारिक जीवन की खुशियों, तनावों, अनुशासन तथा संघर्षों से रूबरू कराती है।
पुस्तक में लखनऊ स्वयं एक महत्वपूर्ण पात्र की तरह उपस्थित दिखाई देता है। नवाबी विरासत, गंगा-जमुनी संस्कृति, खानपान, साहित्य, स्थापत्य और सामाजिक जीवन के माध्यम से लेखक ने शहर की उस सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा है, जिसने देशभर में लखनऊ को विशिष्ट स्थान दिलाया। विभिन्न इतिहासकारों और लेखकों के संदर्भ पुस्तक के ऐतिहासिक पक्ष को और मजबूत करते हैं।
‘जवानी की गर्मी’ में लेखक के संघर्षशील और प्रयोगधर्मी व्यक्तित्व का विस्तार दिखाई देता है। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में चयन तथा फिल्म, संगीत और कला जगत की अनेक प्रसिद्ध हस्तियों से जुड़े संस्मरण पुस्तक को विशेष रूप से रोचक बनाते हैं। यश चोपड़ा, रोमेश शर्मा, दुर्गा खोटे, शंकर-जयकिशन, मोहम्मद रफी, दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, बेगम अख्तर, अनूप जलोटा, वैजयंतीमाला और पद्मा सुब्रह्मण्यम जैसी विभूतियों से संबंधित प्रसंग पाठकों को उस दौर की सांस्कृतिक दुनिया की झलक देते हैं।
डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘एक अनोखी दास्तान’ का दायरा साहित्य और फिल्म जगत से कहीं आगे तक जाता है। राजनीति, उद्योग, व्यापार, सामाजिक सेवा, चिकित्सा, विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े अनुभव भी इसमें शामिल हैं। लौह अयस्क व्यापार, मध्य अफ्रीकी गणराज्य से जुड़े कूटनीतिक प्रयास, स्वास्थ्य क्षेत्र में लैप्रोस्कोपी कार्यक्रम तथा विभिन्न व्यावसायिक प्रयोगों की सफलता और असफलताओं को लेखक ने आत्मस्वीकृति के साथ प्रस्तुत किया है।
पुस्तक की एक बड़ी विशेषता इसकी भाषा और प्रस्तुति शैली है। सरल, सहज, प्रवाहपूर्ण और संवादात्मक भाषा पाठक को लगातार जोड़े रखती है। व्यक्तिगत संस्मरणों और ऐतिहासिक तथ्यों के बीच लेखक ने संतुलन स्थापित किया है। उनकी आत्मस्वीकृति इस कृति को विशेष विश्वसनीयता प्रदान करती है, क्योंकि उन्होंने केवल उपलब्धियों को ही नहीं, बल्कि असफलताओं, आर्थिक चुनौतियों, पारिवारिक मतभेदों, अधूरे सपनों और भावनात्मक संघर्षों को भी खुलकर सामने रखा है।
पुस्तक वर्तमान और भविष्य से भी संवाद करती है। शिक्षा, तकनीकी विकास, उद्यमिता, नई पीढ़ी और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लेखक के विचार इसे केवल अतीत की कहानी नहीं रहने देते, बल्कि समकालीन संदर्भों से जोड़ते हैं।
हालांकि कुछ स्थानों पर घटनाओं और व्यक्तियों का विवरण लंबा हो जाता है तथा अनेक नाम और प्रसंग सामान्य पाठक के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। कुछ अध्यायों का संपादन अधिक संक्षिप्त होता तो पुस्तक की गति और प्रभाव और बेहतर हो सकता था। फिर भी इसकी व्यापक सामग्री और ऐतिहासिक महत्व के सामने यह कमी गौण है।
समीक्षक उमेश कुमार सिंह के अनुसार, ‘एक अनोखी दास्तान’ एक व्यक्ति के जीवन की कथा से आगे बढ़कर भारतीय समाज, संस्कृति, प्रकाशन, राजनीति, फिल्म, व्यापार और बदलते समय का बहुआयामी दस्तावेज बन जाती है। इतिहास, संस्मरण, आत्मचिंतन और प्रेरणा का यह संगम पुस्तक को विशिष्ट बनाता है। एवीके न्यूज सर्विस


