नई दिल्ली: यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान और ऊर्जा समिति (आईटीआरई) के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के प्रभावी क्रियान्वयन को भी प्रमुख विषय के रूप में उठाया गया।

एंजेलिका विन्ज़िग और राफेल स्टैनकैनेली के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और 6जी जैसी अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में मजबूत सहयोग से नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे दोनों पक्षों के व्यवसायों, उपभोक्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मंत्री ने यूरोपीय संसद से समझौते के शीघ्र हस्ताक्षर और अनुमोदन की प्रक्रिया में निरंतर सहयोग की अपेक्षा भी व्यक्त की। उनके अनुसार, व्यापार संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में साझेदारी भारत-ईयू रणनीतिक संबंधों को व्यापक आधार दे सकती है।
अनुसंधान और नवाचार पर विशेष जोर
बैठक में भारत की अनुसंधान एवं नवाचार प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुसंधान और नवाचार भारत के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार का जोर उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने, अनुसंधान परिणामों को प्रौद्योगिकी और उत्पादों में बदलने तथा उद्योग की भागीदारी बढ़ाने पर है।
उन्होंने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और 10 अरब यूरो की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों का उद्देश्य उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान को गति देना तथा डीप-टेक स्टार्टअप के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
एआई, क्वांटम और सेमीकंडक्टर में सहयोग की संभावनाएं
डॉ. सिंह ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और 6जी जैसी उभरती दूरसंचार प्रौद्योगिकियों को भी संभावित सहयोग के क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संदर्भ में स्वास्थ्य सेवा और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों पर सहयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया गया। साथ ही एआई के जिम्मेदार और विश्वसनीय उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की बात कही गई।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और यूरोपीय संघ की सुरक्षित तथा गतिशील सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की प्राथमिकताओं के बीच संभावित तालमेल पर भी चर्चा हुई। अनुसंधान, नवाचार, निवेश और इकोसिस्टम विकास के माध्यम से दोनों पक्ष इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ा सकते हैं।
स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकी सहयोग
बैठक में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और स्वच्छ प्रौद्योगिकी से संबंधित चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के तहत अपशिष्ट से हाइड्रोजन, समुद्री प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया गया।
इन क्षेत्रों में चार वर्षों के दौरान 60 मिलियन यूरो के संयुक्त निवेश के माध्यम से सहयोगात्मक अनुसंधान को समर्थन देने की पहल भी चर्चा का हिस्सा रही। इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकी और परीक्षण के लिए प्रस्तावित भारत-ईयू नवाचार केंद्र पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों की अनुसंधान क्षमता, परीक्षण अवसंरचना, मानक विशेषज्ञता और स्टार्टअप इकोसिस्टम को एक साझा मंच से जोड़ना है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाइड्रोजन वैली से संबंधित ज्ञान साझा करने तथा हाइड्रोजन सुरक्षा मानकों पर सहयोग की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। डॉ. सिंह ने हरित हाइड्रोजन को भविष्य में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश के संभावित क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया।
होराइजन यूरोप से जुड़ाव पर चर्चा
बैठक में होराइजन यूरोप कार्यक्रम के साथ भारत के जुड़ाव की प्रगति पर भी चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने कहा कि इससे भारतीय शोधकर्ताओं को यूरोपीय संस्थानों के साथ अत्याधुनिक और पारस्परिक प्राथमिकता वाले अनुसंधान क्षेत्रों में सहयोग के अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत के जुड़ाव से संबंधित बातचीत आगे बढ़ रही है और कई मुद्दों पर व्यापक सहमति बनी है। हालांकि कानूनी, वित्तीय और संस्थागत पहलुओं से जुड़े कुछ विषय अभी विचाराधीन हैं। भारत ऐसे समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो शोधकर्ताओं, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के लिए अवसरों का विस्तार कर सके।
यूरोपीय संसद प्रतिनिधिमंडल ने साझा हितों पर दिया जोर
यूरोपीय संसद की सदस्य और आईटीआरई की पूर्ण सदस्य एंजेलिका विन्ज़िग ने बैठक के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह का आभार व्यक्त करते हुए भारत को यूरोपीय संघ का प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा का उद्देश्य देश की औद्योगिक और प्रौद्योगिकी नीतियों को समझना तथा भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करना है।
प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा, हरित एवं डिजिटल परिवर्तन तथा प्रौद्योगिकी सहयोग को साझा हितों वाले क्षेत्र बताया। इन विषयों पर भारत और यूरोपीय संसद के बीच निरंतर संवाद को भी महत्वपूर्ण माना गया। बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और यूरोप की अनुसंधान एवं नवाचार प्राथमिकताओं के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाओं पर विचार किया। संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार के विस्तार के लिए संभावित क्षेत्रों की पहचान करने पर भी जोर दिया गया।