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दुर्गा स्तुति

जगजननी मां तुझे नमन है,
भवतारिणी मां तुझे नमन।
ब्रह्मस्वरूपिणी तुझे नमन है,
भयहारिणी मां तुझे नमन।

तू ही है परधाम निवासिनी,
मूलाधार निवासिनी तू।
अष्टमातृका योगिनी तू ही,
सकल कष्ट निवारिणी तू।

हे विश्वेश्वरी तुझे नमन है,
हे नारायणी तुझे नमन।
सर्वमंत्रमयी तुझे नमन है,
महातपा मां तुझे नमन।

दश विद्या और नव दुर्गा तू,
सर्व सौभाग्य दायिनी तू।
तू ही शक्ति है, तू ही सौम्या,
मंगला व्याधि विनाशिनी तू।

हे कात्यायनी तुझे नमन है,
हे भवभामिनी तुझे नमन।
तपस्विनी मां तुझे नमन है,
हे शाम्भवी मां तुझे नमन।

तू ही जयंती, तू ही काली,
सर्व शत्रु विनाशिनी तू।
तू ही शिवा है, तू ही धात्री,
चतुर्भुजा परमेश्वरी तू।

हे करुणामयी तुझे नमन है,
स्नेहसुधामयी तुझे नमन।
कृपादृष्टि और दयादृष्टि,
बरसाओ हम करते वंदन !!!

स्मृति श्रीवास्तव
स्मृति श्रीवास्तव : लेखक के बारे में : स्मृति श्रीवास्तव का तृतीय काव्य संग्रह  डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित “अन्तर्ध्वनि” समकालीन हिंदी काव्यधारा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में उभरता है। हिंदी साहित्य में एम.ए. उपाधि प्राप्त करने के उपरांत लेखिका ने अपना जीवन हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संवर्धन को समर्पित किया है। नई दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल में दो दशकों तक हिंदी एवं संस्कृत का अध्यापन, दिल्ली विश्वविद्यालय के नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए दुर्लभ ग्रंथों का वाचन-रिकॉर्डिंग तथा वंचित महिलाओं के लिए सामाजिक सक्रियता—इन सभी अनुभवों की गहन मानवीय संवेदना इस कृति की पंक्तियों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
अन्तर्ध्वनि
अन्तर्ध्वनि

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