01 नवंबर – छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के अवसर पर विशेष
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महतारी के मया,
हमर पहचान।
अरपा के धारा,
अमृत के खान।
धान के कटोरा,
हरियर संसार।
कोसा के चमक,
संस्कृति के सिंगार।
पंथी के पांव,
कर्मा के ताल।
सुआ के सुरता,
ददरिया के हाल।
घोटुल के गाथा,
पुरखा के मान।
लोक कला मं
बसथे हमर बिहान।
गिरौधपुरी के जोती,
सिरपुर के शान।
बस्तर के जंगल,
प्रकृति के परान।
चित्रकोट के धारा,
बादर के छांव।
माटी के महक,
गांव गांव ठांव।
नदिया के निर्मल,
जंगल के सांस।
किसान के मेहनत,
धरती के आस
सरल मनखे,
निर्मल ब्यवहार।
सेवा अउ सद्भाव,
हमर संस्कार।
भाखा के मिठास,
पुरखा के बानी।
छत्तीसगढ़ महतारी,
सबके जिंदगानी।
एकता के डोरी,
अपन-पन के मान।
जय जय छत्तीसगढ़,
तोर-हमर अभिमान।।

वरिष्ठ पत्रकार / साहित्यकार / अधिवक्ता, एवीके न्यूज सर्विस