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राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने मालदीव के सिविल सेवकों के 24वें बैच को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया

मालदीव के सिविल सेवकों के लिए दो सप्‍ताह का क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीबीपी) विदेश मंत्रालय (एमईए) की साझेदारी में 23 जून, 2023 को संपन्न हुआ। सुशासन राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने वर्ष 2024 तक लोक प्रशासन और शासन के क्षेत्र में 1,000 सिविल सेवकों के कौशल निर्माण और क्षमता विकास को बढ़ाने के लिए मालदीव सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते के एक भाग के रूप में, एनसीजीजी ने मालदीव के 685 अधिकारियों को पहले ही प्रशिक्षण प्रदान कर दिया है। मालदीव के सिविल सेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफल समापन साझा मूल्यों और सहयोग की भावना को दर्शाता है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘पड़ोस पहले’ दृष्टिकोण के साक्षी के रूप में कार्य करता है।

राष्ट्रीय सुशासन केंद्र

समापन सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के महानिदेशक श्री भरत लाल ने की। उन्‍होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे नागरिकों के जीवन में सुधार लाने के साथ अपनी सीख का अनुसरण करें, उसे मूर्त रूप दें और सकारात्मक बदलाव तथा समग्र विकास के माध्‍यम से कार्यरूप में परिणत करें।

अभिनव दृष्टिकोण को अपनाने और कार्यक्रम से प्राप्त शिक्षा को शामिल करके, अधिकारी लोक कल्याण के क्षेत्र में प्रभावी ढंग से योगदान दे सकते हैं।

सभी नागरिकों के लिए आवास, रसोई गैस, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय सेवाओं और कौशल विकास जैसी आवश्यकताओं को सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अटूट प्रतिबद्धता का उल्‍लेख करते हुए महानिदेशक श्री भरत लाल ने अधिकारियों से कहा कि वे इन पहलों का अनुकरण करें और लोगों के जीवन को सुगम बनायें। महानिदेशक ने गति के साथ कार्य करने के महत्‍व पर बल देते हुए कहा कि सिविल सेवक मूलभूत सुविधाओं के वितरण के अपने प्रयास में कोई कसर न छोड़ें।  

श्री भरत लाल ने कहा कि सुशिक्षित और कुशल कार्यबल एक संपन्न अर्थव्यवस्था का मूल आधार बनता है, जो वैश्विक क्षेत्र में नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि सिविल सेवकों पर प्रमुख जिम्मेदारी होती है क्‍योंकि वे शिक्षा क्षेत्र को प्रभावित करने वाली नीतियों को तैयार करने और कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने सिविल सेवकों से आग्रह किया कि वे शिक्षा तक सब की समान पहुंच कायम करने, सीखने के अवसरों में अंतराल को दूर करने और कौशल विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा दें।

महानिदेशक ने महिलाओं के लिए 24 घंटे पानी और बिजली की आपूर्ति और पर्याप्त स्वच्छता सुविधाओं जैसी आवश्यक सुविधाओं के प्रावधान के माध्यम से एक सक्षम वातावरण बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्‍होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना न केवल आर्थिक परिणामों को बढ़ावा देता है, 

बल्कि लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक गतिविधियों में अपनी समान भागीदारी सुनिश्चित करके, समाज अपनी मानव पूंजी की पूरी क्षमता का उपयोग कर सकता है और सतत विकास को आगे बढ़ा सकता है।

उन्होंने डिजिटल क्रांति की क्षमता का उपयोग करने और डिजिटल शासन को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में नवीनतम प्रौद्योगिकी नवाचारों को अपनाने के लिए सिविल सेवकों की आवश्यकता पर बल दिया। डिजिटल उपकरणों और प्लेटफार्मों को अपनाने से तेजी से निर्णय लेने, बेहतर डेटा प्रबंधन और सरकारी सेवाओं तक पहुंच में वृद्धि हो सकती है, जिससे शासन की समग्र दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ सकती है।

उन्होंने परिवर्तन एजेंटों के रूप में सिविल सेवकों की भूमिका और स्थानीय संदर्भों की उनकी गहरी समझ का जिक्र किया और नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने तथा अपने संबंधित कार्य क्षेत्र में अनुकूल परिणाम प्राप्त करने की उनकी क्षमता में विश्वास व्यक्त किया।

कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बी.एस बिष्ट ने कहा कि 24वें क्षमता निर्माण कार्यक्रम (एनसीजीजी) ने देश में की गई विभिन्न पहलों को साझा किया है। इनमें केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली, भारत-मालदीव संबंध, आधार: सुशासन का एक उपकरण, सार्वजनिक नीतियों का कार्यान्वयन, महिला समावेशी शासन, लोक प्रशासन में नवाचार, डिजिटल शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण, 

स्मार्ट सिटी विकास, सभी के लिए आवास, डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ, विभिन्न विकास योजनाओं से सर्वोत्तम प्रथाएं, शहरी शासन, पेयजल के लिए कम लागत का अलवणीकरण, जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, जल जीवन मिशन, ई-गवर्नेंस और डिजिटल इंडिया उमंग, नेतृत्व, समन्वय और संचार, मुद्रा योजना, गरीबी उन्मूलन पहल, स्वास्थ्य देखभाल शासन, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवहार, वृत्तीय अर्थव्यवस्था, कौशल भारत, भ्रष्टाचार विरोधी रणनीतियां, हिंद महासागर क्षेत्र के प्रति भारत की नीति आदि शामिल हैं।

प्रतिभागियों को उन यात्राओं में शामिल होने का अवसर मिला जिनकी रूपरेखा उन्हें विकास परियोजनाओं और संस्थानों की एक विविध श्रृंखला की व्यापक समझ प्रदान करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार की गई थी। उल्लेखनीय यात्राओं के बीच, प्रतिभागी देहरादून में स्मार्ट सिटी, केंद्रीय सूचना आयोग, प्रधानमंत्री संग्रहालय भी गए। इससे उन्हें शासन के व्यावहारिक पहलुओं को जानने का अवसर मिला।

24वें क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीबीपी) की देखरेख में पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ बीएस बिष्ट, सह-पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ संजीव शर्मा और सुशासन के लिए ष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) की क्षमता निर्माण कार्यक्रम (सीबीपी) टीम का योगदान रहा। पाठ्यक्रम विकास, सत्र समन्वय और ज्ञान प्रसार में उनका योगदान प्रतिभागियों के लिए एक व्यापक और प्रभावशाली अध्ययन अनुभव रहा।

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