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पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा का पावरहाउस है: श्री सर्बानंद सोनोवाल

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज यहां पूर्वोत्तर को भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा का पावरहाउस बताया। केंद्रीय मंत्री ने आज यहां 2014 से ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास’ के संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

श्री सोनोवाल ने निरंतर शांति और सुरक्षा की दिशा में ईमानदार और ठोस प्रयास, समाज के सीमांत वर्गों के उत्थान के लिए केंद्रित दृष्टिकोण के साथ पूर्वोत्तर भारत को भारत की विकास गाथा में सबसे आगे लाने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्हें सम्मान का जीवन जीने हेतु, कारोबार और व्यापार को समृद्ध करने के लिए एक सकारात्मक वातावरण को सक्षम करने वाली नवीन नीतिगत संरचना के कारण 2014 के बाद से पूर्वोत्तर का ऐतिहासिक उत्थान हुआ।

इस अवसर पर उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा का पावर हाउस है। पिछले 9 वर्षों में पूर्वोत्तर ने जिस परिवर्तनकारी कनेक्टिविटी का अनुभव किया है, उसे देखते हुए यह क्षेत्र अब कारोबार और व्यापार का संभावित केंद्र बन गया है। मोदी जी ने पूर्वोत्तर के रणनीतिक महत्व को महसूस किया और आसियान, बीबीआईएन समूह के देशों के साथ आशाजनक वाणिज्य के साथ आर्थिक पुनरुत्थान का माहौल बनाया।”

केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए शांति प्रयासों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी हमेशा ही पूर्वोत्तर के लोगों से अत्यंत सम्मान के साथ और राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार के रूप में उनकी गहरी स्वीकृति की भावना के साथ मिले हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी के इस मानवीय दृष्टिकोण के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद की संख्या में भारी कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप 2023 में हताहत नागरिकों की संख्या में लगभग शत-प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 8,000 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) को अप्रभावी करने के एक ठोस प्रयास के अंतर्गत इसे त्रिपुरा और मेघालय से पूरी तरह वापस ले लिया गया है। इसके अलावा असम, नागालैंड और मणिपुर में अधिनियम के तहत अधिकार क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी की गई है। बोडो, नागा, कार्बी, त्रिपुरी और ब्रू तथा अन्य आदिवासियों के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते किये गए हैं। इन प्रयासों के द्वारा असंतुष्ट समुदायों को बातचीत के माध्यम से मुख्यधारा में लाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप स्थायी शांति स्थापित हुई है। यह ऐसी सफलता है, जिसकी पूर्वोत्तर दशकों से उम्मीद व आशा कर रहा था। यह ‘मोदी की गारंटी’ ही है क्योंकि सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए दशकों पुराने मतभेदों को गरिमा एवं सम्मान के साथ दूर किया गया है। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों को विस्तार दिया गया है, बल्कि रोजगार के लिए प्रवासन में भी काफी कमी आई है और विकास को बढ़ावा मिला है। इसका दूसरा परिणाम यह है कि असम के अलावा अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय तक रेलवे लाइनें शीघ्रता से पहुंच जाने से पूर्वोत्तर तथा अन्य राज्यों के बीच यात्रा में लगने वाला समय कम हो गया है। स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद से पूर्वोत्तर के लिए और इस क्षेत्र के भीतर युगान्तरकारी परिवहन साधन लाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व के पिछले नौ वर्षों में ही संभव हो सका है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी जी ने 64 बार पूर्वोत्तर का दौरा किया है, जो भारत के किसी भी प्रधानमंत्री के लिए अब तक का एकमात्र श्रेष्ठ और उच्चतम उदाहरण है। यह पूर्वोत्तर के लोगों को मुख्यधारा में लाने और वर्ष 2047 में आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय सदस्य बनाने के लिए मोदी जी की प्रतिबद्धता को व्यक्त करता है।

प्रधानमंत्री द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अक्टूबर, 2022 में 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण के साथ नई पीएम-डिवाइन योजना शुरू की गई। इस योजना पर 2022-23 से 2025-26 तक 4 साल की अवधि के लिए 6,600 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में 1,503 करोड़ रुपये की 11 परियोजनाओं को स्वीकृति के लिए चुना गया है। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए अवसरों के नए द्वार खुले हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के साथ ही भारत में सरकार की निवेश और विकास संबंधी पहलों में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है।

मोदी सरकार ने जलमार्गों के विकास पर 1,040 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसके चलते एनईआर में 20 जलमार्गों का संचालन शुरू हुआ है जो 2014 तक सिर्फ एक ही हुआ करता था। पिछले 9 वर्षों में शुरू की गई पहलों के कारण भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग (आईबीपीआर) के जरिए होने वाली माल ढुलाई बढ़कर 170 प्रतिशत हो गई है। यह भी उल्लेखनीय है कि एनईआर में 208 करोड़ रुपये के निवेश के साथ पहली जहाज मरम्मत की सुविधा, ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे पांडु में हुगली-कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (एचसीएसएल) के जरिए विकसित की जा रही है।

इस वर्ष ब्रह्मपुत्र में क्रूज पर्यटन का महत्वपूर्ण विकास हुआ है, इस कड़ी में एमवी गंगा विलास ने बांग्लादेश के रास्ते वाराणसी से डिब्रूगढ़ तक 51 दिनों में लगभग 3,200 किमी की यात्रा करके दुनिया का सबसे लंबा नदी क्रूज मार्ग पार किया।

इसके अलावा असम में कुरुआ, बहारी, धुबरी, गुइजान, घगोर और मटमोरा में 310 करोड़ रुपये की लागत से 6 फैरी टर्मिनलों का विकास यात्रियों की परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करेगा, जिससे परिवहन की मौजूदा बाधाएं कम हो जाएंगी।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने अपने सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत, पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं शुरू की हैं।

यूपीए-2 (2009-14) की तुलना में बाद के वर्षों में एनईआर के लिए औसत वार्षिक बजट आवंटन में 370 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2014 से पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र में केवल गुवाहाटी (असम) ही रेल नेटवर्क से जुड़ा था। आज ‘कैपिटल कनेक्टिविटी’ प्रोजेक्ट के तहत अब ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) और अगरतला (त्रिपुरा) भी इससे जुड़ गए हैं।

पिछले 9 वर्षों के दौरान उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में अग्रणी कदम उठाए गए हैं, जिससे इस क्षेत्र के लोगों को पहली बार यहां कई सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिली है।

साल 2022 में पहली मालगाड़ी मणिपुर के तमेंगलोंग स्थित रानी गाइदिन्ल्यू रेलवे स्टेशन पहुंची। इसके अलावा पहली लीज्ड पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन (पीसीईटी) ने असम के गुवाहाटी स्थित अजारा से गोवा के वास्को-डी-गामा तक यात्रा की। साल 2023 में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन मेघालय पहुंची। ध्यान खींचने वाली बात यह है कि बांग्लादेश और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाली नवनिर्मित अगरतला-अखौरा रेलवे परियोजना से कोलकाता और अगरतला के बीच की दूरी तय करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

इसके अलावा पिछले 9 वर्षों के दौरान उत्तर पूर्वी क्षेत्र में कई बुनियादी ढांचागत विकास हुए हैं। इसका एक उदाहरण असम में उत्तर और दक्षिण तट (लंबाई-73 किलोमीटर) पर लिंक लाइनों के साथ बोगीबील के पास ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल का निर्माण है। इसे 5,920 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ दिसंबर, 2018 में पूरा किया गया था।

केंद्रीय मंत्री ने इन उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने आगे कहा, “2014 के बाद से एनईआर में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 45 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 10,905 किलोमीटर से बढ़कर 15,735 किलोमीटर हो गई है।  साल 2009 से 2014 की अवधि में 181 सड़क निर्माण परियोजनाओं को पूरा किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 2,778 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया, जबकि साल 2014 से 2019 के दौरान 394 सड़क निर्माण कार्य किए गए। इनके तहत 5,520 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया।”

उत्तर पूर्व विशेष बुनियादी ढांचा विकास योजना (एनईएसआईडीएस) के तहत उत्तर पूर्वी राज्यों में विकास के लिए 3,392.99 करोड़ रुपये की 145 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में हवाई अड्डों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वर्ष 2013 में 9 हवाई अड्डों की तुलना में 2023 में हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। तब के एक अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा की तुलना में अब तीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। यातायात की आवाजाही में भी 113 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

विद्युत मंत्रालय के तहत उत्तर पूर्वी क्षेत्र विद्युत प्रणाली सुधार परियोजना (एनईआरपीएसआईपी) को हाल ही में अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए 6,700 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान प्राप्त हुआ है, जिसे जनवरी 2024 से शुरू करने का लक्ष्य है।

कुल 9,265 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड की परिकल्पना की गई है, जो उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सभी 8 राज्यों में 1,656 किलोमीटर की दूरी कवर करता है। असम में 3,250 करोड़ रुपये की लागत से एक बायो रिफाइनिंग प्लांट भी स्थापित किया गया है।

शिक्षा क्षेत्र में मोदी सरकार ने 21,151 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। वर्ष 2014 के बाद से, सरकार ने 843 स्कूलों की स्थापना की है और 25,64,628 शिक्षकों के शिक्षण-कौशल को उन्नत किया है। न केवल स्कूल के स्तर पर बल्कि उच्च शिक्षा स्तर पर भी, सरकार ने आठ नए मेडिकल कॉलेज,  दो नए आईआईआईटी (मणिपुर और त्रिपुरा), एक नया आईआईएमसी (मिजोरम), एक नया एम्स (असम), और एक नया खेल विश्वविद्यालय (मणिपुर) की स्थापना की है।

सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी 31,794 करोड़ रुपये खर्च किए हैं जिसमें 19 राज्य स्तरीय कैंसर संस्थानों और 20 तृतीयक देखभाल वाले कैंसर केंद्रों की मंजूरी शामिल है। गुवाहाटी के पास चांगसारी में स्थित उत्तर पूर्वी क्षेत्र के पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब कामकाज शुरू है।

वित्तीय वर्ष 2014-15 से विभिन्न परियोजनाओं के लिए 37,092 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कुल 19,992 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सुबनसिरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट (2000 मेगावाट) से इस क्षेत्र में भारी विकास होने की उम्मीद है। ‘सौभाग्य योजना’ के तहत 30 लाख घरों सहित 77 लाख घरों का विद्युतीकरण किया गया है। ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना’ के तहत 5,790 गांवों का विद्युतीकरण किया गया है।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में दूरसंचार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए, वर्ष 2014 से 4,360 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 12,690 से अधिक ग्राम पंचायतों को भारत नेट परियोजना के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। बीएसएनएल ने इस क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने हेतु बांग्लादेश से 20 जीबीपीएस कनेक्शन लिया है। अब क्षेत्र में 4जी के 1,000 टावर हैं और कुल 5,600 गांव इससे जुड़े हुए हैं। 

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