आसमान में नीर बहुत है।
खेत-बाग में पीर बहुत है।।
संकट सहे हमेशा हंसकर।
माताओं में धीर बहुत है।।
बांट रहे वे नित समाज को।
तरकश में कटु तीर बहुत हैं।।
झूमते द्वार-गली दुशासन।
बढ़े नहीं अब चीर बहुत है।।
जल जंगल जन जमीं जानवर।
जीवन हित तकदीर बहुत है।।
गंगा यमुना मैली-मैली।
मिले स्वच्छता वीर बहुत हैं।।

शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)