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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट कर आंध्र प्रदेश की विज्ञान और नवाचार योजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता की मांग की

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आज केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट कर आंध्र प्रदेश को आधुनिक हाई-टेक हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी सहायता की मांग की है। उन्होंने राज्य को उभरती प्रौद्योगिकियों और वैज्ञानिक नवाचार के केंद्र में बदलने के उद्देश्य से कई प्रस्ताव भी रखे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रस्तावों को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए संबंधित विभागों द्वारा पूर्ण विचार और उचित अनुवर्ती कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री श्री नायडू ने बैठक के दौरान, राज्य में केंद्र सरकार की “विज्ञान धारा” योजना के बेहतर उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। श्री नायडू ने आंध्र प्रदेश में जमीनी स्तर पर नवाचार और अनुसंधान क्षमताओं को सशक्त बनाने के लिए अधिक सहयोग का आह्वान किया।

प्रमुख प्रस्तावों में तिरुपति में एक राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र की स्थापना शामिल है। यह इस क्षेत्र में शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों के लिए उच्च-स्तरीय अनुसंधान और गणनाओं की आवश्यकताओं का समर्थन करेगी। विशाखापत्तनम में आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन (एएमटीज़ैड) को विज्ञान और प्रौद्योगिकी-संचालित इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने पर भी चर्चा की गई। इसमें राज्य केंद्रीय वैज्ञानिक एजेंसियों के साथ भविष्य में सहयोग की मांग की गई है।

मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) प्रयोगशाला की स्थापना का अनुरोध किया। श्री नायडू ने जीवन विज्ञान में अनुसंधान और उद्योग संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित बायोटेक पार्क तथा एक जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसके अलावा राज्य को क्वांटम प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दृष्टि से राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत शामिल होने में गहरी रुचि व्यक्त की। राज्य ने किसानों के लिए कृषि-तकनीक समाधानों को मजबूत करने के लिए केंद्रीय सहायता भी मांग की है। मुख्यमंत्री ने डीप टैक और एकीकृत नवाचार प्लेटफार्मों सहित भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए आंध्र प्रदेश को एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में ब्रांडिंग करने में सहायता का आह्वान किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्य के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए सभी क्षेत्रों में विज्ञान आधारित विकास को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश में वैज्ञानिक विकास के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम है। केंद्रीय मंत्री महोदय ने आश्वासन दिया कि सभी प्रस्तावों की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अन्य संबंधित विभागों के परामर्श से जांच की जाएगी।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने प्रमुख राष्ट्रीय मिशनों में राज्य सरकारों को सम्मिलित करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि सभी प्रस्तावों को अधिकतम और समावेशी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रक्रियाओं और नीतिगत ढाँचों का पालन करना चाहिए।

बैठक केंद्र-राज्य सहयोग को प्रगाढ करने और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तालमेल बनाने के लिए एक मजबूत इरादे का संकेत देती है। केंद्र के समर्थन से, ये पहल क्षेत्र में नवाचार-संचालित विकास का एक नया मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।

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