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हिमाचल में सेब किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण दे रहा है अदाणी एग्री फ्रेश 

रोहड़ू, रामपुर और सैंज में आयोजित हो रहे इस 15 दिवसीय कैंप से सुधरेगी फसल की गुणवत्ता 

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों की फसल गुणवत्ता, उत्पादकता और आय बढ़ाने की दिशा में अदाणी एग्री फ्रेश लिमिटेड ने एक विशेष पहल के तहत ‘ग्रोअर साइंटिफिक प्रोग्राम’ की शुरुआत की है। रोहड़ू, रामपुर और सैंज में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को फसल प्रबंधन, कीट और रोग नियंत्रण, मौसम आधारित खेती और तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराना है। गत वर्षों में भी यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया चुका है और किसानों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के आधार पर इसे इस वर्ष फिर सेविस्तारित रूप में शुरू किया गया है।

अदाणी एग्री फ्रेश द्वारा आयोजित ‘ग्रोअर साइंटिफिक प्रोग्राम’ का इस वर्ष का पहला चरण कुल 15 दिनों तक चलेगा। रोहड़ू में 20 से 24 मई, रामपुर में 27 से 31 मई, और सैंज में 3 से 7 जून के बीच विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। हर स्थान पर हर दिन औसतन 150 किसानों की भागीदारी की उम्मीद है और इस चरण में 2000 से अधिक किसानों तक पहुँचने का लक्ष्य है। कार्यक्रम का दूसरा चरण जुलाई माह में, फसल तुड़ान से ठीक पहले आयोजित किया जाएगा, ताकि किसानों को अंतिम समय पर भी उपयोगी मार्गदर्शन मिल सके।

प्रशिक्षण शिविरों में कृषि विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को व्यावहारिक और गहन स्वरूप मिलेगा। रोहड़ू में डॉ. उषा (प्लांट पैथोलॉजिस्ट, कृषि विज्ञान केंद्र) और डॉ. एन. पी. बुटेल (मृदा वैज्ञानिक) को मिट्टी की उर्वरता, पौधों के स्वास्थ्य और फसल सुरक्षा से संबंधित व्यावहारिक जानकारी साझा करने का श्रेय जाता है। अगला कैंप रामपुर में होगा, जिसमें डॉ. एस. पी. भारद्वाज (पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर, हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, सोलन) किसानों को कीट नियंत्रण की आधुनिक विधियों और बागवानी प्रबंधन के उपायों पर विस्तार से जानकारी देंगे। वहीं, सैंज में डॉ. भूपेश गुप्ता (प्रोफेसर, प्लांट पैथोलॉजिस्ट, हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, सोलन) किसानों को फसल रोगों की समय पर पहचान और रोकथाम की रणनीतियों के बारे में प्रशिक्षण देंगे।

अदाणी एग्री फ्रेश द्वारा आयोजित किए जा रहे इन प्रशिक्षण सत्रों में किसानों को वर्तमान फसल की स्थिति और उससे जुड़ी चुनौतियों, बागवानी की उन्नत विधियों और ऑर्चर्ड प्रैक्टिसेस (फलदार पेड़ों की देखभाल, वृद्धि और उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल), कीट नियंत्रण और रोग प्रबंधन, मौसम की स्थिति और उसके अनुसार फसल योजना, फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता सुधारने के तरीके और तकनीकी नवाचारों की मदद से स्मार्ट खेती के समाधान जैसे मुख्य विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम से न सिर्फ किसानों की खेती से संबंधित वैज्ञानिक समझ को मजबूती मिलेगी, बल्कि इससे हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन की श्रृंखला अधिक संगठित और टिकाऊ भी बन सकेगी। अदाणी एग्री फ्रेश का यह प्रयास कृषि क्षेत्र में ज्ञान, नवाचार और स्थायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुस्कान सिंह

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