2025 वर्ष का लेखा-जोखा; क्या खोया क्या पाया

आगत 2026 का स्वागत; विगत 2025 अलविदा

वर्तमान दौर में भारत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति को लगातार सुदृढ़ किया है। आर्थिक विकास, विज्ञान-तकनीक, डिजिटल क्रांति, खेल और सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियाँ यह संकेत देती हैं कि देश आत्मनिर्भरता और प्रगति के पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सन् 2025 भारत के लिए एक तरफ उपलब्धियों, प्रगति और आत्मविश्वास का वर्ष रहा तो 2025 में देश के अनेक क्षेत्र में अभी बहुत काम बाकी है। जहाँ देश ने आर्थिक, वैज्ञानिक, डिजिटल, कूटनीतिक और खेल क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। वर्ष 2025 ने यह स्पष्ट किया कि भारत न केवल विकास की राह पर है, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है।

2025 में भारत ने क्या पाया

राष्ट्रीय व वैश्विक खेल और सांस्कृतिक उपलब्धियाँ

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला विश्व कप 2025 में शानदार प्रदर्शन किया और श्रीलंका के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज की, जिससे भारतीय खेल के स्तर में मजबूती दिखाई। सामाजिक-आर्थिक बदलाव के क्षेत्र में देखे तो 1 जुलाई 2025 से लागू हुए कई नए वित्तीय नियमों और पॉलिसियों के कारण आम आदमी के लिए बचत और नियम-व्यवस्था में बदलाव आया, जिसे कई लोगों के लिए उपयोगी माना गया। राष्ट्रीय और सुरक्षा क्षेत्र में तैयारी तीव्र गति से बढी है। ऑपरेशन अभ्य्यास नामक 7 मई 2025 को आयोजित देशव्यापी नागरिक सुरक्षा अभ्यास से देश की आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तत्परता को और मजबूत किया गया। वैश्विक मंच पर भारत ने  प्रभावित करते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाई है। विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक मंच पर मजबूती से उठाने में भारत अग्रणी रहा। विश्व शांति, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका को व्यापक सराहना मिली है।

भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है। डिजिटल भुगतान प्रणाली, विशेषकर यूपीआई ने देश को डिजिटल लेन-देन में वैश्विक पहचान दिलाई है। स्टार्ट-अप संस्कृति, स्वदेशी उत्पादन और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों से रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिला है। विज्ञान और अंतरिक्ष में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन  ने कम लागत और उच्च तकनीकी क्षमता के साथ कई सफल मिशनों को अंजाम दिया। इससे भारत विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल हुआ है। शिक्षा और युवा शक्ति के रूप में भारत में वैश्विक शक्ति हासिल कर ली। नई शिक्षा नीति के माध्यम से कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ज़ोर दिया गया है। तकनीकी शिक्षा, स्टार्ट-अप और नवाचार के क्षेत्र में युवा वर्ग की भागीदारी बढ़ी है, जो देश के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। वही अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। महिला खिलाड़ियों की बढ़ती सफलता और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं ने खेल जगत में भारत की स्थिति को मजबूत किया है। सन् 2025 में भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। महिला और युवा खिलाड़ियों की सफलता ने देश को गौरवान्वित किया। खेलो इंडिया जैसे अभियानों से जमीनी प्रतिभाओं को नया मंच मिला।सामाजिक और पर्यावरणीय पहल के तहत स्वच्छता, स्वास्थ्य, आवास और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं ने आम नागरिक के जीवन स्तर में सुधार किया है। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भविष्य के लिए आशा जगाती है। कुल मिलाकर, भारत की उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि देश चुनौतियों के बीच भी विकास, आत्मनिर्भरता और नवाचार के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मजबूत नीतियाँ, युवा शक्ति और तकनीकी प्रगति भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रही हैं। सन् 2025 में भारत विश्व की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बना रहा। औद्योगिक निवेश में वृद्धि, स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों से आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आई। डिजिटल भुगतान प्रणाली और वित्तीय समावेशन ने आम नागरिक की अर्थव्यवस्था में भागीदारी को मजबूत किया। डिजिटल लेन-देन, ई-गवर्नेस और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में भारत ने नई उपलब्धियाँ हासिल कीं। यूपीआई और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से भारत विश्व के अग्रणी डिजिटल देशों में शामिल हुआ। सरकारी सेवाओं के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता और सुशासन को बल मिला। स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं ने करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित किया। नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों ने सतत विकास की नींव को मजबूत किया।कुल मिलाकर सन् 2025 भारत के लिए उपलब्धियों का वर्ष रहा। चुनौतियों के बावजूद देश ने विकास, आत्मनिर्भरता और नवाचार के रास्ते पर निरंतर प्रगति की। भारत की ये उपलब्धियाँ आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती हैं।

2025  में भारत ने क्या खोया

प्राकृतिक आपदा और मानवीय त्रासदी

2025 वर्ष के दौरान देश के कई हिस्सों में भारी हादसे और अप्रिय घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जानें गईं, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा तैयारियों पर सवाल उठे। देश के कुछ हिस्सों में आतंकवाद और सुरक्षा समस्याएँ बनी रहीं, जिनमें पहलगाम आतंक हमला जैसे घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जवाबी कार्रवाई बढ़ाई। नवंबर 2025 में दिल्ली और आसपास जहरीले स्मॉग की गंभीर स्थिति ने वायु गुणवत्ता के मुद्दे को उभारा, जिससे स्वास्थ्य पर असर हुआ।

सड़क दुर्घटनाओं का बढ़ता बोझ असहनीय

सड़क सुरक्षा के सारे खराब रिकार्ड भारत, के खाते में हैं। हाईवे आम तौर पर डराते हैं, शहरी और ग्रामीण सड़कों पर दोपहिया वाहन सवार तरह-तरह के जोखिमों के बीच चलते हैं, फुटपाथों की सुरक्षा सरकारें तो क्या सुप्रीम कोर्ट भी नहीं कर पा रहा है ताकि कम से कम पैदल चलने वालों की जान बच सके। नितिन गडकरी ने हाईवे और एक्सप्रेस वे तो बनवाए, लेकिन वह उन्हें सुरक्षित नहीं बना सके। पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि मार्ग दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या पौने दो लाख के करीब पहुंच गई है यानी एक दशक के भीतर लगभग तीन गुनी वृद्धि। 2020 में जब मोटर वाहन एक्ट में कुछ कड़े प्रविधान किए गए थे तो यह कल्पना की गई थी कि इनका कुछ सकारात्मक असर होगा, लेकिन राजनीतिक नुकसान की आशंका में राज्यों में इन्हें भी कुचल दिया गया। इसका मतलब है कि सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी माना गया एक ई यानी इन्फोर्समेंट लचर बना हुआ है। बाकी तीन ई-यानी एजुकेशन, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी केयर का भी यही हाल है। बातें दस्तावेज और नोट तक सीमित हैं। समस्या यह है कि नए-नए हस्तक्षेप तो किए जा रहे हैं, लेकिन अनियंत्रित ई रिक्शा और जुवेनाइल ड्राइविंग जैसी नई-नई चुनौतियां भी गंभीर होती जा रही है। हर हादसे को तेज रफ्तार का नतीजा बता देने वाले लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि हाईवे और एक्सप्रेस वे तेज 8 साल के इंतजार और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस वर्ष से किसी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को कैशलेस उपचार की योजना पूरे देश में लागू करने की घोषणा की गई, लेकिन अभी भी यह पायलट प्रोजेक्ट वाले मोड में ही है। हाईवे रफ्तार के लिए ही बनाए जाते हैं। कारों में सुरक्षा के लिए छह एयरबैग्स से लेकर राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरा और एआइ आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग बढ़ाने की बात पर अमल जरूर होने लगा है, ब्लैक स्पाट्स भी पहचान कर सुधारे जा रहे हैं मगर सबसे अधिक जरूरत जनता के बीच वह माहौल बनाने की है जहां गलतियां जानलेवा न बनने पाएं।

हवा भी हुई अब ज़हरीली

2024 में भारत दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश था। 2025 में भी खास सुधार नहीं हुआ जबकि वायु प्रदूषण को भारत में जीवन प्रत्याशा के लिए सबसे बड़ा बाहरी खतरा बताया गया है! दरअसल वायु प्रदूषण अब पूरे देश का संकट है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के छोटे शहर हो या फिर दिल्ली-मुंबई जैसी मेगासिटी, जहरीली हवा हर जगह है। एक और साल जहरीली हवा में सांस ले ही बीता…इस धुंधली आस में कि शायद जिम्मेदार जागें और जहरीली  हवा से निपटने का उपाय करेंगे। 

देश की राजधानी और एनसीआर के अन्य शहरों की हवा में साल दर साल जहर, बढ़ता ही जा रहा है। एनकैप और ग्रेप के बावजूद यहां सदी की शुरुआत के साथ एक स्वास्थ्य आपातकाल सी स्थिति बन जाती है। अस्पतालों में सांस और गले संबंधी बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। अब तो मास्क भी जैसे एनसीआर के वायु प्रदूषण के सामने दम तोड़ रहे हैं। छोटे बच्चे न तो स्कूल जा पा रहे हैं, न घर-आंगन-पार्क में खेल पा रहे हैं। मगर सरकारें मानो गहरी निद्रा में है। केवल बातें हो रही है वर्षों से। जो कथित उपाय किए जाने का दावा है, वे भी फौरी ही है। बड़ी विडंबना यह कि वायु प्रदूषण के जो अहम कारक है, उन पर खास ध्यान ही नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क से उड़ती धूल, कोयला और उपले का बेरोकटोक उद्यमों और घरेलू स्तर पर प्रयोग और निर्माण कार्यों से उत्पन्न हो रहे प्रदूषक, इनके संबंध में तो जैसे कोई जिम्मेदार सोच ही नहीं रहा। लंबे समय तक पराली को एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताया जाता रहा जबकि उसकी हिस्सेदारी बहुत कम थी। दिल्ली में जाम के कारण हालात और खराब है। वाहन रेंगने पर विवश है और उनका काला धुआं हवा में जहर बनकर जीवन लील रहा है। 

न्यायपालिका बढ़ते मामलों की लंबी फेहरिस्त

सुप्रीम कोर्ट रोजाना चर्चा में होता है। जाहिर तौर पर कई बड़े फैसले भी होते हैं लेकिन चर्चा इसलिए ज्यादा होती है कि केस या तो टल जाते है या फिर प्राथमिकता में ही नहीं आ पाते। बड़े फैसलों के लिहाज से भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में 2025 को एक असाधारण वर्ष कहा जा सकता है क्योंकि इस साल सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ही पीठ के एक फैसले को पलट दिया और कहा कि कोर्ट विधेयकों पर निर्णय लेने के संबंध में राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए कोई समयसीमा नहीं तय कर सकता। इस फैसले ने न्यायपालिका को उसकी हद बताई क्योंकि सुप्रीमकोर्ट के ही दो न्यायाधीशों की पीठ नेइसी साल विधेयकों पर कैसला लेने के संबंध में राज्यपाल और राष्ट्रपति के लिए

टाइमलाइन तय कर दी थी। यह सब कुछ महज डेढ़ दो महीनों में हो गया, लेकिन दुख की बात यह है कि कई मुख्य न्यायाधीशों की ओर से खुद लंबित मामलों को लेकर चिंता जताने और इसे दूर करने की बात करने के बाद भी बड़ा बदलाव नहीं आ रहा है। भारत में न्याय की धीमी प्रक्रिया एक गंभीर और बहु-स्तरीय समस्या है, जिससे आज भी निजात पाना बाकी है। जस्टिस संजीव खन्ना कहते हैं कि 5.0 करोड़ मुकदमे लंबित है भारत भर के न्यायालयों में, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा राज्यसभा में दिए उत्तर के अनुसार। सर्वोच्च न्यायालय की ही बात करें तो यहां दिसंबर 2025 तक कुल 90, 897 मुकदमे लंबित हैं। हर बार जब नए-न्यायाधीश आते हैं, इस वर्ष तो सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के पद पर तीन बार नियुक्ति हुई, उनकी पहली प्राथमिकता और चिंता वादों का शीघ्न निस्तारण होती है। मगर परिणाम नहीं दिखता।

सफेदपोश आतंकी: आए नए रूप में

भारत में प्रायोजित आतंकवाद के पीछे बैठे शातिर लोग आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए हमेशा से ऐसे लोगों का इस्तेमाल करते रहे हैं, जो सामान्यतया कट्टरता का पाठ पढ़ते थे, आर्थिक प्रलोभनों के कारण आत्मघाती प्यादों की तरह इस्तेमाल होते थे, लेकिन इस साल मदरसे और मौलवियों की कट्टरता से आगे बढ़ते हुए भारत में पहली बार सक्रिय रूप से आतंकवाद का सफेदपोश चेहरा भी सामने आया है। जम्मू- -कश्मीर में डाक्टरों से जुड़े आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के माड्यूल के पर्दाफाश, उनके ठिकाने से 3000 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक की बरादगी और दिल्ली में लाल किला के सामने एक डाक्टर द्वारा आत्मघाती धमाके को अंजाम दिए जाने की घटना ने जनमानस को

झकझोर दिया, लेकिन चिंता बढ़ाने वाली बात यह भी रही कि पढ़े-लिखे प्रोफेशनल द्वारा हथियार उठाने और आत्मघाती हमला करने की घटना पहली बार सामनें आई। आतंकवाद के सफेदपोश चेहरे ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी करने के साथ ही उनके द्वारा युवाओं को कट्टरता से दूर करने की रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया। अभी तक एजेंसियों का जोर मदरसों, मौलवियों और इमामों के सहारे युवाओं को कट्टरता से बचाने के लिए अभियान चलाए जाने पर था। अब एजेंसियों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून, एमबीए व अन्य प्रोफेशनल कोर्स बाले संस्थानों पर भी नजर रखनी होगी और वहां पढ़ने वाले युवाओं को कट्टरता से बचाने की कोशिश करनी होगी।

पहलगाम/आपरेशन सिंदूर

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों द्वारा 26 निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या की घटना के बाद दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेलते आ रहे भारत ने अपने धैर्य की अंतिम सीमा रेखा खींच दी। पहलगाम के आतंकी गुनहगारों के साथ पाकिस्तान को सख्त संदेश देने के लिए भारत ने छह-सात मई, 2025 की रात आपरेशन सिंदूर की सैन्य कार्रवाई की शुरूआत कर पाक अधिकृत कश्मीर ही नहीं, पाकिस्तान के भीतर आतंक के नौ बड़े ठिकानों को ध्वस्त करने के साथ करीब 100 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। इस कार्रवाई के जरिए भारत ने पाकिस्तान के इस भ्रम को हमेशा के लिए खत्म कर दिया कि वह उसकी सरजमीं पर पनपे आतंकी ठिकानों पर सीधे सैन्य हमला नहीं करेगा। भारत ने आपरेशन सिंदूर के जरिए साबित कर दिया कि पाकिस्तान में स्थित सभी आतंकी ठिकानों तक वह पहुंच सकता है। यह एक ऐसी सामरिक कार्रवाई थी, जिसने भारत के सुरक्षा सोच को धैर्य’ से’ प्रतिकार की दिशा में निर्णायक मोड़ दिया। आपरेशन सिंदूर महज एक जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि भारत की यह घोषणा है कि वह सीमाधार आतंकवाद को अपनी संप्रभुता पर हमला तथा युद्ध मानेगा। भारत अब शातिको केवल आदर्श नहीं समझता, बल्कि उसे सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक शक्ति और साहस भी रखता है। भविष्य में जब रणनीतिक-सामरिक इतिहासकार इस कालखंड पर गौर करेंगे तो बेशक आपरेशन सिंदूर को नार भारत की उभरती रणनीतिक चेतना का निर्णायक मोड़ मानेंगे। इस आपरेशन के बाद कूटनीतिक मोर्च पर भी भारत ने एक नई शुरुआत की और तीन दर्जन से ज्यादा देशों में सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजकर उन्हें अपने सोच के साथ जोड़ लिया।

आनलाइन फ्राड और लालच का साइबर जाल

धोखाधड़ी मानव सभ्यता के इतिहास के सबसे पुराने अपराधों में से एक रही है। सोचने-समझने की शक्ति विकसित होने के साथ ही इंसानों से यह अपराध होना शुरू हुआ और तब से लेकर अब तक देशकाल, परिस्थितियों के हिसाब से इसमें बदलाव आता गया। आज के तकनीकी युग में इस अपराध ने एक ऐसा जामा पहन लिया है जिसमें आपके साथ हो रहे अपराध का आपको आभास ही नहीं होता और जब होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। आंकड़े डराते हैं। हर 14 सेकेंड (14 बार मंद गति से पलक झपकने में लगा समय) में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर आनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ी एक शिकायत दर्ज कराई जाती है। 2024 के सिर्फ पहले पांच महीनों में इस पोर्टल पर 9.5 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। यह आलम तब है जब सामाजिक दबाव, प्रतिष्ठा आदि के चलते संकोचवश आज भी अच्छी खासी संख्या में लोग मामले दर्ज नहीं कराते। एक अध्ययन के मुताबिक अप्रैल 2021 से देश के नागरिकों को अब तक 10,300 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है। धोखाधड़ी करने वाले अपराधी बहुत शातिर हैं। वे डिजिटल अरेस्ट, निवेश का झांसा, केवाईसी अपडेट करने या कस्टमर केयर और रोजगार दिलाने जैसे उनके प्रमुख तौर-तरीके हैं। भोला-भाला इंसान जैसे ही ज्यादा मुनाफा पाने या किसी भी चीज की लालच में फंसता है वैसे ही उसके साथ धोखाधड़ी हो जाती है। तकनीकी ने निश्चितरूष से हमारा जीवन बहुत आसान कर दिया है। याद कीजिए, कुछ दशक पहले सिर्फ पासबुक अपडेट कराने के लिए घंटों बैंक की लाइन में लगना पड़ता था, लेकिन अब आपको याद नहीं आएगा कि पिछली बार कब आप बैंक गए थे। इस तकनीकी सहूलियत का स्याह पक्ष यह है कि समस्त प्रकार की आनलाइन धोखाधड़ी में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी वित्तीय लेनदेन से जुड़ी है। आपका मोबाइल ही चलता-फिरता बैंक और एटीएम बन चुका है। वहां पर जरा सी गफलत आपको मुश्किल में डाल दे रही है। इस आनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के कड़े नियम-कानून तो हैं, लेकिन सबसे बड़ा नियम आप पर लागू होता है। जागरूक रहें। चैतन्य रहें। कुछ भी असामान्य लगे तो सतर्कता बरतनी आवश्यक है।

 देश की आर्थिकी सही दिशा में तेज गति से बढ़ी

वर्ष 2047 में विकसित भारत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब इस एजेंडे को रखा था तो प्रश्न था कि क्या हम इस लक्ष्य को पूरा कर सकेंगे? परंतु वर्ष 2025 में वैश्विक चुनौतियों के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने लगभग पौने सात प्रतिशत की तेजी दिखाई है तो, यह हमारे मनोबल और सही दिशा को बताती है। परंतु, आगे शर्त यह है कि हमें सुधारों के मोर्चे पर बढ़ते रहना होगा। उद्यमिता, रोजगार, कौशल विकास और औद्योगीकरण की गति तेज करनी होगी। दुनियाभर से निवेश लाने की कोशिशों को सफल बनाने के लिए नीतियों में जरूरत के मुताबिक बदलाव करते रहने होंगे। वर्ष 2025 के अंत में अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के साथ भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है तो यह वैश्विक स्तर पर देश की भूमिका में वृद्धि की झलक है। स्वतंत्रता के बाद भारतीय आर्थिकी की बातें चाहे जितनी होती रही हों लेकिन उसके दो मील के पत्थर है। पहला वर्ष 1991 में प्रारंभआर्थिक उदारीकरण और दूसरा वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत गठबंधन सरकार की बदलाव की गति। पहला दौर मनमाफिक परिणाम न दे सका तो इसकी वजह अस्थिर सरकारें और भ्रष्टाचार रहा। जबकि मोदी सरकार ने सुधारों पर ध्यान फोकस किया।कोरोना जैसी महामारी के दौरान मेक इन इंडिया की घोषणा की। डिजिटल नयाचार, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम जारी कीं। बेहतर मानसून के दौर और उन्नत होती कृषि ने भी सरकार का पूरा साथ दिया। यही वजह है कि आर्थिकी की तेज गति 8.2 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर रही भारत की, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में। वहीं मई में खुदरा महंगाई दर गिर कर 2.8 प्रतिशत पर आ गई थी ! वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि पर रहे। सरकार ने बुनियादी ढांचे में खर्च बढ़ाकर रोजगार बढ़ाए हैं। सरकार की पीएलआइ जैसी स्कीम ही हैं कि नवंबर में एपल कंपनी ने दुनियाभर में बेचे पांच मोबाइल फोन में से एक भारत से सप्लाई किया। भारतीय आटोमोबाइल क्षेत्र भी बेहतर कर रहा है। वर्ष 2025 में भारत सरकार ने गरीबी से सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों के जीवन स्तर को भी ऊपर उठाया है। इसके बावजूद देश के सामने लगातार चुनौतियां आ रही हैं। पड़ोस की चुनौतियां हैं तो अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर सर्वाधिक 50 प्रतिशत टैरिफ भी थोपा। इससे निर्यात घटा है, लेकिन हमारे उद्योग नए रास्ते खो​जकर भविष्य के लिए सुदृढ़ हो रहे हैं। भारतीय स्टार्टअप अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में जिस तरह आगे बढ़ रहे हैं, वह यह दर्शाने को पर्याप्त हैं किं आगामी पांच वर्षों में यह आर्थिकी में बड़ा योगदान देंगे।

2025: में छत्तीसगढ़ में क्या पाया

 इन्वेस्टर कनेक्ट मीट  के आयोजन से राज्य ने करीब ₹1.25 ट्रिलियन निवेश प्रस्ताव सुरक्षित किए, जिससे आर्थिक विकास, उद्योग, रोजगार और बुनियादी ढांचे को बल मिला।छत्तीसगढ़ आल इंडिया फॉरेस्ट स्पोर्ट मीट 2025 में 13वीं बार लगातार ओवरआल चैंपियनशिप जीती यह राज्य की खेल प्रतिभा की निरंतरता का प्रतीक है। राज्य की अंडर-16 क्रिकेट टीम ने विजय मर्चेंट ट्रॉफी के नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। जहाँ प्रदेश के युवा प्रतिभाओं का उभरता प्रदर्शन देखा गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने कुछ पिछड़े समुदायों को अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणियों के समान शैत्रि लाभ देने सहित आठ बड़े  निर्णय लिये, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिला। वर्ष की शुरुआत में बीजापुर नक्सल हमला में आठ जवानों और एक नागरिक की जान चली गई, जो राज्य के सुरक्षा संकट को उजागर करता है।हालांकि बाद में अबुझमाड़ और बीजापुर जैसे इलाके में सुरक्षा बलों के सफल ऑपरेशन भी हुए, पर स्थानीय सुरक्षा मुद्दे और नक्सलवाद की चुनौतियाँ बनीं। वर्तमान में राज्य सरकार और केंद्र ने मिलकर 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा, जिस पर एक हद तक काबू पाया जा सका है पर यह अभी तक पूरी तरह सुलझा नहीं है।अतः 2025 भारत और छत्तीसगढ़ दोनों के लिए मिला-जुला वर्ष रहा – जहाँ कई उपलब्धियाँ, आर्थिक परिवर्तन और युवा प्रतिभा उभरी, वहीं सुरक्षा चुनौतियाँ और मानवीय संकट ने सबक भी दिए।

छत्तीसगढ़ में इस साल चुनौती बनी

वर्ष की शुरुआत में बीजापुर नक्सल हमला में आठ जवानों और एक नागरिक की जान चली गई, जो राज्य के सुरक्षा संकट को उजागर करता है।हालांकि बाद में अबुक्मढ़ और बीजापुर जैसे इलाके में सुरक्षा बलों के सफल ऑपरेशन भी हुए, पर स्थानीय सुरक्षा मुद्दे और नक्सलवाद की चुनौतियाँ बनीं। जुलाई 2025 में दो मलयाली ननाओं की धर्मान्तरण और मानव-तस्करी के आरोपों में गिरफ्तारी ने व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा किया।कुलमिलाकर 2025 भारत और छत्तीसगढ़ दोनों के लिए मिला-जुला वर्ष रहा – जहाँ कई उपलब्धियाँ, आर्थिक परिवर्तन और युवा प्रतिभा उभरी, वहीं सुरक्षा चुनौतियाँ और मानवीय संकट ने सबक भी दिए।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
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