साहित्य और काव्य के क्षेत्र में डॉ. प्रमोद सेठिया और दुर्गेश्वर राय को मिला ‘पं. हरिनाथ दूबे सम्मान 2025’

चित्रकूट। चित्रकूट में आयोजित एक भव्य साहित्यिक समारोह के दौरान साहित्य और काव्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली दो साहित्यकारों को ‘पं. हरिनाथ दूबे सम्मान 2025’ से विभूषित किया गया। यह सम्मान श्री दीनदयाल फाउंडेशन द्वारा हिंदी साहित्य की सेवा और काव्य सृजन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले विद्वानों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदान किया गया।

सम्मान के संस्थापक और श्री दीनदयाल फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार द्विवेदी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस सम्मान की स्थापना वर्ष 2025 में उनके पूज्य पिता स्व. पं. हरिनाथ दूबे की स्मृति में की गई है। स्व. दूबे न केवल राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त एक आदर्श शिक्षक थे बल्कि लोक साहित्य के भी वरिष्ठ हस्ताक्षर थे। उनके द्वारा रचित संवाद और गीतों का जादू रामायण के मंचन के दौरान श्रोताओं को सम्मोहित कर देता था। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि इस सम्मान का मुख्य ध्येय गद्य और काव्य लेखन के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य कर रहे साहित्यकारों को एक प्रतिष्ठित मंच और नई पहचान दिलाना है।

सम्मान के प्रथम संस्करण के अंतर्गत वर्ष 2025 के लिए साहित्य श्रेणी का सम्मान जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंदसौर के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. प्रमोद कुमार सेठिया को प्रदान किया गया। डॉ. सेठिया ने प्रख्यात शिक्षाविद् गिजुभाई बधेका के साहित्य पर गहन शोध किया है, जो शिक्षा और साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं, काव्य श्रेणी का सम्मान शैक्षिक संवाद मंच के संयोजक और गोरखपुर के ख्यातिलब्ध शिक्षक साहित्यकार दुर्गेश्वर राय को उनके उत्कृष्ट काव्य सृजन और साहित्य सेवा के प्रदान किया गया।

शैक्षिक संवाद मंच की तीन दिवसीय वार्षिक कार्यशाला के अवसर पर आयोजित इस गरिमामयी समारोह में दोनों विभूतियों को सम्मान स्वरूप 1100 रुपये की नकद धनराशि, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, शाल, मेडल, श्रीफल और मोती की माला भेंट कर गौरवान्वित किया गया। यह सम्मान पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय, ‘पाठा के गांधी’ गोपाल भाई, उत्तराखंड के डॉ. सुरेन्द्र कुमार आर्यन और शैक्षिक संवाद मंच के संस्थापक प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ की विशिष्ट उपस्थिति में प्रदान किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि डॉ. प्रमोद सेठिया और दुर्गेश्वर राय द्वारा साहित्य एवं काव्य सर्जना के क्षेत्र में किए गए कार्य अत्यंत सराहनीय और समाज के लिए प्रेरणाप्रद हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल लेखकों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि भावी पीढ़ी को भी अपनी जड़ों और लोक साहित्य से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित साहित्यकारों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और शिक्षकों ने पुरस्कृत साथियों को बधाई देते हुए उनके निरंतर यशस्वी होने और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

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